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#day6 सनातन धर्म सुरक्षित रहेगा, तो हमारा समाज भी सुरक्षित रहेगा – पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज

#day6 सनातन धर्म सुरक्षित रहेगा, तो हमारा समाज भी सुरक्षित रहेगा - पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज

कथा में परम पूज्य जगदगुरु शंकराचार्य जी महाराज द्वारका शारदापीठाधीश्वर स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी पधारे एवं कथा पंडाल में उपस्तिथ भक्तों को संबोधित किया।
कथा में नांदेड़ (महाराष्ट्र) के सांसद श्री रवींद्र चव्हाण जी ने शामिल होकर व्यासपीठ का आशीर्वाद प्राप्त किया एवं कथा पंडाल में उपस्तिथ भक्तों को संबोधित किया।

आज की कथा के दौरान पूज्य महाराज श्री ने बताया कि यदि सनातन धर्म सुरक्षित रहेगा, तो हमारा समाज भी सुरक्षित रहेगा। सनातन धर्म केवल एक पंथ या संप्रदाय नहीं है, बल्कि यह एक जीवन पद्धति है, जो समस्त मानव जाति को सत्य, धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। 

यदि हम अपने धर्म की रक्षा करेंगे, तो समाज में नैतिकता बनी रहेगी, संस्कृति और परंपराएँ सुरक्षित रहेंगी, और आने वाली पीढ़ियाँ भी सही मार्ग पर चल सकेंगी। इसीलिए देश में “सनातन बोर्ड” का निर्माण होना चाहिए, ताकि धर्म की रक्षा संगठित रूप से की जा सके और सनातन मूल्यों को सुरक्षित रखा जा सके।

हमें केवल स्वयं धर्म के मार्ग पर नहीं चलना चाहिए, बल्कि अपने बच्चों को भी धर्मात्मा बनाना चाहिए। जब हम अपने बच्चों को धार्मिक शिक्षा देंगे, उन्हें सत्य, अहिंसा, करुणा और भक्ति का महत्व सिखाएंगे, तभी वे एक सशक्त और चरित्रवान समाज की नींव रख सकेंगे। 

धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक कला है, जो व्यक्ति को अनुशासित और संयमित बनाती है। यदि हम चाहते हैं कि हमारी संस्कृति और परंपराएँ जीवित रहें, तो हमें अपनी संतानों को भी धार्मिक वातावरण प्रदान करना होगा।

जो लोग हमारे प्रमुख हिंदू त्योहारों जैसे होली, दिवाली आदि को नहीं मानते, उन्हें हमारे इन उत्सवों में भाग भी नहीं लेना चाहिए। धर्म और संस्कृति का सम्मान करना बहुत आवश्यक है। जो लोग सनातन धर्म को हीन दृष्टि से देखते हैं, वे हमारे पर्वों का आनंद लेने के लिए नहीं आ सकते। 

जब जीवन में कोई दुख आता है, तो हमें संसार के सामने रोने के बजाय भगवान के चरणों में जाकर प्रार्थना करनी चाहिए। संसार केवल देखने और टिप्पणी करने का कार्य करता है, लेकिन भगवान ही हैं जो हमारे दुखों को समाप्त कर सकते हैं। यदि हम भगवान की शरण में जाएंगे, तो वे हमारे सभी दुखों का निवारण कर देंगे। 

जब इंद्रदेव को अपने बल और शक्ति का अहंकार हो गया था, तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली पर उठाकर इंद्र के घमंड को चूर-चूर कर दिया। इंद्र को यह लगा कि वह अपनी शक्ति से संपूर्ण सृष्टि पर शासन कर सकते हैं, लेकिन भगवान कृष्ण ने यह दिखाया कि ईश्वर की कृपा के बिना कोई भी शक्तिशाली नहीं हो सकता। 

जिसका मन सुंदर नहीं है, भगवान उससे कभी प्रसन्न नहीं हो सकते। भगवान बाहरी आडंबर से नहीं, बल्कि मन की शुद्धता से प्रभावित होते हैं। यदि व्यक्ति के मन में कपट, छल और द्वेष भरा होगा, तो चाहे वह कितना भी बाह्य रूप से पूजा-पाठ कर ले, भगवान उससे प्रसन्न नहीं होंगे। 

मुस्लिम देशों में वक्फ बोर्ड नहीं है, लेकिन भारत में है, तो फिर भारत में सनातन बोर्ड क्यों नहीं हो सकता? 

आजादी के बाद सरकारों ने हमारे मंदिरों को अपने नियंत्रण में ले लिया, जिससे मंदिरों की स्वायत्तता समाप्त हो गई और उनकी संपत्ति का अनुचित उपयोग किया जाने लगा। कई मंदिरों की धन-सम्पत्ति को अन्य कार्यों में लगाया गया, जिससे उनकी पवित्रता और गरिमा प्रभावित हुई। 

तिरुपति बालाजी जैसे पवित्र मंदिरों के प्रसाद में मिलावट की घटनाएं भी देखी गईं। यदि सनातन बोर्ड का गठन किया जाता है, तो मंदिरों की संपत्ति का दुरुपयोग रोका जा सकेगा और उनके प्रबंधन में पारदर्शिता बनी रहेगी।

दुनिया को प्रेम का सच्चा अर्थ समझाने के लिए भगवान कृष्ण ने राधा जी से प्रेम किया। यह प्रेम सांसारिक नहीं, बल्कि आत्मिक था, जिसमें निस्वार्थता, समर्पण और श्रद्धा का भाव था। राधा-कृष्ण का प्रेम इस बात का प्रतीक है कि जब मनुष्य पूरी श्रद्धा और प्रेम के साथ भगवान की भक्ति करता है, तो वह स्वयं भगवान के समीप पहुँच जाता है।

लिव-इन रिलेशनशिप हमारे बच्चों के चरित्र को कमजोर करने का कार्य कर रहा है। सनातन संस्कृति में विवाह केवल एक सामाजिक अनुबंध नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक बंधन होता है, जिसमें पति-पत्नी का संबंध सात जन्मों तक माना जाता है। उन्होंने सावित्री का उदाहरण दिया, जिन्होंने अपने पति सत्यवान के प्राणों को वापस ले आने का चमत्कार किया। यह घटना यह दर्शाती है कि जब स्त्री अपने पति के प्रति पूर्ण निष्ठा और भक्ति रखती है, तो वह असंभव को भी संभव कर सकती है।

श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन
दिनांक: 27 फरवरी से 5 मार्च 2025
कथा समय: दोपहर 1 बजे से 4 बजे तक
कथा स्थल: श्री क्षेत्र उमरज (धाकटे पंढरपुर) तालुका कंधार, जिला- नांदेड़ महाराष्ट्र

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