#day1 नवरात्रों में शुद्धता एवं पवित्रता का रखें विशेष ध्यान- पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज
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sonu
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#day1 नवरात्रों में शुद्धता एवं पवित्रता का रखें विशेष ध्यान- पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज
आज की कथा के दौरान पूज्य महाराज श्री ने बताया कि जब हमारी भक्ति सच्चे हृदय से परमात्मा में लीन हो जाती है, तो जीवन में आने वाले विशाल और कठिन दुखों का प्रभाव भी कम हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सच्ची भक्ति के दो मुख्य लाभ होते हैं। पहला यह कि भगवान अपने भक्तों को हर कठिनाई को सहने की अद्भुत शक्ति और सामर्थ्य प्रदान करते हैं, दूसरा यह कि यदि भक्त निस्वार्थ भाव से भगवान की आराधना करता है, तो वे स्वयं उसके दुखों को समाप्त कर देते हैं।
जहां पर श्रीमद्भागवत कथा होती है, वहां पर 33 कोटि (33 करोड़) देवी-देवताओं का वास होता है। इसका तात्पर्य यह है कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि स्वयं ईश्वर का साक्षात् स्वरूप होती है। जहां भागवत कथा का आयोजन होता है, वहां दिव्य ऊर्जा का संचार होता है, जिससे संपूर्ण वातावरण पवित्र और सकारात्मक हो जाता है।
माता-पिता अपने बच्चों को बचपन से ही भागवत कथा का श्रवण कराएं। इससे वे सनातन धर्म और उसकी महान परंपराओं को समझ सकेंगे। जब बच्चे धर्म को जानेंगे और उसका पालन करेंगे, तो वे सच्चे अर्थों में धार्मिक और संस्कारी बनेंगे।
जब हम निस्वार्थ भाव से दूसरों की सहायता करते हैं, तो भगवान स्वयं हमारे जीवन से कष्टों को दूर कर देते हैं। सनातन धर्म में दान का विशेष महत्व बताया गया है और इसे मोक्ष प्राप्ति का मार्ग भी माना गया है।
जब कोई महिला भजन, पूजा, मंदिर, शादी या कथा में जाती है, तो उसे अपने बाल बांधकर जाना चाहिए। बंधे बाल संयम और श्रद्धा का प्रतीक होते हैं। धार्मिक आयोजनों में अनुशासन और मर्यादा का पालन करना आवश्यक होता है, जिससे भक्तों का ध्यान पूरी तरह भक्ति और आध्यात्मिकता में लगा रहे।
यदि कोई व्यक्ति श्रद्धा और निष्ठा के साथ सात दिनों तक कथा सुनता है, तो उसे सभी तीर्थस्थानों की यात्रा के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। कथा सुनने से आत्मा शुद्ध होती है, मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।
पहाड़ जैसा प्रतीत होने वाला दुख भगवान की कृपा से कंकर के समान भी नहीं रहता और भक्त के जीवन से पूरी तरह समाप्त हो जाता है। यह भगवान की असीम करुणा और भक्तों पर उनकी विशेष कृपा का प्रमाण है।
भगवान के भक्तों के लिए यह आवश्यक है कि वे सुख में अहंकार और अभिमान से बचें तथा दुख में धैर्य और विश्वास बनाए रखें। जब जीवन में सुख आता है, तब परमात्मा से प्रार्थना करनी चाहिए कि वे हमें अहंकार और गर्व से बचाएं, जब जीवन में दुख आता है, तब भी भगवान पर अटूट श्रद्धा रखनी चाहिए, क्योंकि उनकी कृपा से यह दुख भी शीघ्र ही समाप्त हो जाएगा।
मनुष्य को अपने जीवन में दान अवश्य करना चाहिए। दान केवल धन का ही नहीं, बल्कि ज्ञान, प्रेम, सेवा और सहयोग का भी किया जा सकता है। दान करने से हमारे जीवन के सभी दुख धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं और व्यक्ति आत्मिक शांति की ओर बढ़ता है।
श्रीमद भागवत कथा का भव्य आयोजन
दिनांक- 31 मार्च से 06 अप्रैल 2025 तक
समय- दोपहर 12 बजे से सायं 4 बजे तक
स्थान: सागौरिया फार्म हाउस, मोदी कोल्ड के सामने, सेल्स टैक्स बैरियर, ए.बी रोड, मुरैना, मध्य प्रदेश