सनातन धर्म के संरक्षण के लिए गुरूकुलों का होना परम आवश्यक है- पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज
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sonu
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सनातन धर्म के संरक्षण के लिए गुरूकुलों का होना परम आवश्यक है- पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज
महाकुंभ में निरंतर तीन कथाओं के दिव्य आयोजन के पश्चात्, पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज आज उत्तर प्रदेश के उरई पधारे, महाराज श्री 13 से 19 फरवरी 2025 तक भक्तों को श्रीमद्भागवत कथा के अमृत वचनों से अभिभूत करेंगे।
उरई में कथा स्थल पर पहुंचकर पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने दीप प्रज्वलित कर श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया। इस शुभ अवसर पर विधायक श्री विनोद चतुवेदी जी, श्री किशन पालीवाल जी और श्री देवी देनबापू जी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
महाराज श्री कथा में कहा कि क्या होना है और क्या नहीं होना है, यह सब भगवान जानते हैं। जब कोई मरता है, तो भगवान का ही आदेश होता है, और जब कोई बचता है, तो वह भी भगवान की कृपा से ही संभव होता है। जीवन में हर पल जो घटित होता है, वह ईश्वर की रजा पर निर्भर है। इसलिए हमें हर परिस्थिति को धैर्य और श्रद्धा के साथ स्वीकार करना चाहिए, क्योंकि भगवान का रास्ता हमेशा हमारे भले के लिए होता है।
आज के समय में बच्चों को सिर्फ पढ़ाई और आधुनिकता के बारे में ही नहीं, बल्कि हमारे ग्रंथों और संस्कृति के बारे में भी जानकारी देना जरूरी है। हम अपने बच्चों को गीता, रामायण जैसे ग्रंथों की कथाएँ सुनाएं, ताकि वे अपने संस्कारों और धरोहर से जुड़ सकें। जब गीता के उपदेश, रामायण की कथाएँ और अन्य ग्रंथों की गहरी बातें समझेंगे, तब उनका जीवन अधिक संस्कारित, नैतिक और सही मार्ग पर चलेगा। सनातन धर्म के संरक्षण के लिए गुरूकुलों का होना परम आवश्यक है।
इस बार प्रयागराज महाकुंभ में एक अद्भुत नजारा देखने को मिला। महाकुंभ का आनंद इस बार कुछ अलग है। गंगा के पवित्र जल में लाखों दीपों का प्रज्वलन, मंत्रोच्चारण और श्रद्धा का अद्वितीय मिलाजुला वातावरण सभी को एक विशेष अनुभव दे रहा है। सचमुच, इस बार महाकुंभ का आनंद अद्भुत और अविस्मरणीय है।
अंधकार दो प्रकार का होता है – एक शरीर के अंदर और एक शरीर के बाहर। बाहरी अंधकार को सूरज की रोशनी से मिट जाता है। लेकिन शरीर के भीतर जो अंधकार है, वह सिर्फ बाहरी प्रयासों से नहीं हट सकता। इसे दूर करने के लिए ज्ञान का प्रकाश चाहिए, जो हमारे अंदर की अंधेरी राहों को रोशन कर सके। शरीर के भीतर का अंधकार, यानी अज्ञान, भ्रम और आत्मज्ञान की कमी, केवल सच्चे ज्ञान और सत्य के द्वारा ही समाप्त हो सकता है।
वैलेंटाइन डे भारत के संस्कारों का मर्डर डे है। भारतीय संस्कृति में एक दिन का प्यार नहीं होता, हमारे यहां जन्म जन्मांतर का प्यार होता है। माहाराज श्री ने सभी सनातनी बच्चों से निवेदन किया कि वैलेंटाइन डे के चंकुल में मत फसिये, अपने माता-पिता के आदर्शों पर चलो।
पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के सानिध्य में
श्रीमद्भागवत कथा
दिनांक: 13 से 19 फरवरी 2025
समय: दोपहर 12:30
स्थान: गल्ला मंडी राधा कृष्ण मंदिर, राठ रोड, उरई, उत्तर प्रदेश