वृंदावन में अधिक मास के पावन अवसर पर पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के सानिध्य में वराह पुराण कथा का तृतीय दिवस
ब्रजभूमि केवल एक स्थान नहीं, बल्कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण की लीला भूमि है। वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना, नंदगाँव और गोकुल जैसे पवित्र धामों में भगवान ने अपनी दिव्य लीलाएँ की हैं। ब्रज यात्रा करने से मन को शांति, आत्मा को पवित्रता और जीवन में भक्ति का अनुभव प्राप्त होता है। श्रद्धा और प्रेम से की गई ब्रज यात्रा व्यक्ति के जीवन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है। ब्रज की धूल भी भक्तों के लिए पूजनीय मानी जाती है। यहाँ हर कदम पर राधा-कृष्ण की दिव्य लीलाओं का स्मरण होता है।
तीर्थ यात्रा केवल घूमने या दर्शन करने का साधन नहीं है, बल्कि यह आत्मा की शुद्धि और भगवान से जुड़ने का एक पवित्र मार्ग है। तीर्थ में हमेशा मर्यादा, श्रद्धा और सही मार्गदर्शन के साथ जाना चाहिए। जब हम किसी संत, गुरु या ज्ञानी व्यक्ति के निर्देशन में तीर्थ करते हैं, तब हमें वहाँ की महिमा, नियम और आध्यात्मिक महत्व का सही ज्ञान प्राप्त होता है। बिना मर्यादा के किया गया तीर्थ केवल यात्रा बनकर रह जाता है।
जिन लोगों के पितृ प्रसन्न होते हैं, उनके जीवन में देवताओं की कृपा भी बनी रहती है। सनातन धर्म में पितरों का सम्मान, तर्पण और श्राद्ध अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।जो व्यक्ति श्रद्धा और विधि-विधान से अपने पितरों का तर्पण करता है, उसके जीवन के अनेक कष्ट दूर होने लगते हैं और घर में सुख-शांति एवं समृद्धि का वास होता है। प्रयागराज, गया जी और बद्री विशाल जैसे पवित्र तीर्थों में पितरों का तर्पण करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
महाराज श्री ने भोपाल की ट्विशा शर्मा और नोएडा की दीपिका की हाल की घटना पर दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि आज समाज में इस प्रकार की घटनाएँ बढ़ने का एक बड़ा कारण हमारी संस्कृति, संस्कार और सनातन ग्रंथों से दूर होना है। आधुनिकता की अंधी दौड़ में लोग बाहरी सुखों के पीछे भाग रहे हैं, लेकिन मानसिक शांति, परिवार और आध्यात्मिक मूल्यों को भूलते जा रहे हैं। महाराज श्री ने सभी युवाओं से निवेदन करते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में आत्महत्या जैसा कदम कभी नहीं उठाना चाहिए। हर समस्या का समाधान धैर्य, परिवार, गुरुजनों के मार्गदर्शन और भगवान के नाम में मिलता है।
आज के समय में बहुत से लोग अपने स्वार्थ, जरूरत और लाभ के अनुसार अपने विचार और कभी-कभी अपना धर्म तक बदल लेते हैं। जब व्यक्ति अपने संस्कार, आस्था और सनातन मूल्यों से दूर हो जाता है, तब वह परिस्थितियों के अनुसार बदलने लगता है। सनातन धर्म हमें सिखाता है कि चाहे कैसी भी परिस्थिति आए, हमें अपने धर्म, संस्कृति और सिद्धांतों पर अडिग रहना चाहिए।
वराह पुराण कथा का भव्य आयोजन
दिनांक – 18 मई से 24 मई 2026 तक
समय : प्रतिदिन शाम 4 बजे से 6 बजे तक
स्थान : ठाकुर श्रीप्रियाकांत जू मंदिर, शान्ति सेवा धाम, वृंदावन