वृंदावन में अधिक मास के पावन अवसर पर पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के सानिध्य में वराह पुराण कथा का चतुर्थ दिवस

अधिक मास सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र, पुण्यदायी एवं आध्यात्मिक उन्नति का विशेष काल माना गया है। इस दिव्य मास में की गई सेवा, दान, जप, तप, कथा श्रवण एवं भगवान की भक्ति का फल अनेक गुना बढ़कर प्राप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार अधिक मास में किया गया प्रत्येक सत्कर्म भगवान श्रीहरि विष्णु की विशेष कृपा प्रदान करता है तथा जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। यह मास आत्मशुद्धि, साधना और प्रभु भक्ति के माध्यम से अपने जीवन को धर्ममय बनाने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।

संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति, वेदों, उपनिषदों और ऋषि-मुनियों के ज्ञान की दिव्य धरोहर है। लेकिन आज का दुर्भाग्य यह है कि सनातनी समाज स्वयं अपनी संस्कृति और भाषा की महत्ता को भूलता जा रहा है। आज के समय में यदि कोई व्यक्ति दो शब्द अंग्रेजी के बोल देता है तो समाज उसे अधिक बुद्धिमान और आधुनिक समझने लगता है, जबकि अपनी संस्कृत भाषा बोलने या सनातन परंपराओं का पालन करने वाले लोगों को पीछे समझा जाता है। अंग्रेजी सीखना गलत नहीं है, क्योंकि वह आज के समय की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन अपनी जड़ों और संस्कारों को भूल जाना सबसे बड़ी भूल है।

गृहस्थ जीवन केवल परिवार चलाने का नाम नहीं है, बल्कि यह त्याग, प्रेम, धैर्य और सहनशीलता की सबसे बड़ी साधना है। एक सफल गृहस्थ वही माना जाता है जो अपने परिवार की सुख-शांति के लिए त्याग करना जानता हो और परिस्थितियों को धैर्यपूर्वक सहन करने की क्षमता रखता हो। आज के समय में लोग छोटी-छोटी बातों पर रिश्ते तोड़ने लगे हैं, क्योंकि सहनशीलता और त्याग की भावना कम होती जा रही है। हमें यह समझना चाहिए कि हर परिस्थिति हमारे धैर्य और संस्कारों की परीक्षा लेती है। जो व्यक्ति कठिन समय में भी शांत रहकर परिवार को जोड़कर रखता है, वही सच्चा गृहस्थ कहलाता है।

पति-पत्नी का संबंध विश्वास, सम्मान, प्रेम और समर्पण का पवित्र रिश्ता माना गया है। पति का यह कर्तव्य होता है कि वह अपनी पत्नी की रक्षा करे, उसका सम्मान करे और हर परिस्थिति में उसका साथ निभाए। जिस घर में स्त्री का आदर होता है, वहाँ सुख, शांति और समृद्धि का वास माना जाता है। एक आदर्श पति वही कहलाता है जो अपनी पत्नी की भावनाओं को समझे, उसके आत्मसम्मान की रक्षा करे और उसे जीवन के हर निर्णय में सम्मान दे।

एकादशी का व्रत करने से मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि होती है तथा भगवान श्रीहरि विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक एकादशी का पालन करता है, उसके जीवन के अनेक कष्ट धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं और मन में सकारात्मकता एवं शांति का अनुभव होता है।

आज बच्चों के हाथ में बहुत छोटी उम्र से ही मोबाइल आ गया है, लेकिन जरूरत से ज्यादा मोबाइल चलाना बच्चों के मानसिक, शारीरिक और संस्कारिक विकास के लिए हानिकारक हो सकता है। माता-पिता को बच्चों को खेलकूद, पुस्तक पढ़ने, भगवान का स्मरण, परिवार के साथ समय बिताने और अच्छे संस्कार सीखने के लिए प्रेरित करना चाहिए। जब बच्चे संतुलित जीवन जीना सीखेंगे, तभी उनका भविष्य उज्ज्वल और संस्कारवान बनेगा।

वराह पुराण कथा का भव्य आयोजन

दिनांक – 18 मई से 24 मई 2026 तक

समय : प्रतिदिन शाम 4 बजे से 6 बजे तक

स्थान : ठाकुर श्रीप्रियाकांत जू मंदिर, शान्ति सेवा धाम, वृंदावन

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