सावन के पावन माह में शिव महापुराण कथा का श्रवण करने से मनुष्य के समस्त पापों का नाश होता है । शिव महापुराण केवल एक कथा नहीं, बल्कि जीवन को धर्म, भक्ति, वैराग्य और सदाचार की ओर प्रेरित करने वाला दिव्य ग्रंथ है। जो भक्त सावन मास में भगवान शिव का पूजन, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जप तथा शिव महापुराण का श्रवण करते हैं, उनके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।


आज हमारे बच्चे धीरे-धीरे हमारे हाथों से निकलते जा रहे हैं। इसका एक बड़ा कारण यह है कि उनके जीवन से सदाचार, संस्कार और आध्यात्मिक शिक्षा का अभाव होता जा रहा है। यदि हमें अपने परिवार, अपने घर और आने वाली पीढ़ी को संस्कारवान बनाना है, तो बच्चों को बचपन से ही शिव महापुराण का श्रवण करवाना चाहिए ताकि वे संस्कारवान, चरित्रवान और समाज व राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत बन सकें।


शिव महापुराण का श्रवण करने से अनेक यज्ञों के समान पुण्यफल की प्राप्ति होती है। भगवान शिव की कृपा से मनुष्य के जीवन के पाप क्षीण होते हैं, मन शुद्ध होता है तथा धर्म, भक्ति और सदाचार की भावना प्रबल होती है। जिस स्थान पर शिव महापुराण कथा का आयोजन होता है, वहाँ का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है और भक्तों को भगवान महादेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।


आज बहुत से लोग भगवान शिव के बारे में बिना शास्त्रों को जाने-समझे अनुचित टिप्पणियाँ कर देते हैं और उन्हें “नशेड़ी” जैसे अपमानजनक शब्दों से संबोधित करते हैं। यह न केवल अज्ञानता का परिचायक है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का भी अनादर है। भगवान शिव को भोलेनाथ, महादेव, आशुतोष और योगेश्वर कहा गया है। वे वैराग्य, तप, करुणा, त्याग और लोककल्याण के प्रतीक हैं। समुद्र मंथन के समय समस्त सृष्टि की रक्षा के लिए उन्होंने स्वयं विष का पान किया और उसे अपने कंठ में धारण कर नीलकंठ कहलाए। भगवान शिव संपूर्ण मानवता को प्रेम, करुणा, क्षमा और आत्मकल्याण का मार्ग दिखाते हैं।


सनातनियों को आपस में नहीं बंटना चाहिए। सनातनी समाज की सबसे बड़ी शक्ति उसकी एकता, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत है। इसलिए सभी सनातनियों को आपसी मतभेद, जाति, भाषा, क्षेत्र और छोटे-छोटे विवादों से ऊपर उठकर एकजुट रहने का प्रयास करना चाहिए। जब समाज संगठित रहता है, तभी वह अपने धर्म, संस्कृति और मूल्यों की प्रभावी रूप से रक्षा और संवर्धन कर सकता है। एकजुट, संस्कारवान और जागरूक समाज ही आने वाली पीढ़ियों तक अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को सशक्त रूप से पहुँचा सकता है।


सावन के पावन माह में शिवमहापुराण कथा का भव्य आयोजन
दिनांक – 30 जुलाई से 5 अगस्त 2026 तक
समय – दोपहर 3 :30 बजे से
स्थान – ठा.श्री प्रियाकांत जू मंदिर, वृन्दावन

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