अधिक मास को अत्यंत पवित्र माना गया है। इस महीने में भगवान विष्णु की भक्ति, दान, सेवा, जप और कथा श्रवण का विशेष फल बताया गया है। जो पुण्य सामान्य दिनों में कठिन तपस्या से प्राप्त होता है, वही अधिक मास में श्रद्धा और भक्ति से किए गए कार्यों से कई गुना बढ़ जाता है। इस महीने में गरीबों की सहायता करना, गौसेवा करना, भगवान का नाम जपना और भागवत कथा सुनना मनुष्य के जीवन को पवित्र बनाता है तथा आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खोलता है।
भागवत कथा सुनने का अवसर अत्यंत दुर्लभ होता है। देवताओं के राजा इंद्र के पास स्वर्ग के असीम सुख हैं, फिर भी उन्हें भागवत कथा सुनने का सौभाग्य प्राप्त नहीं होता। मनुष्य जन्म स्वयं में दुर्लभ है और यदि इस जीवन में भगवान की कथा सुनने, संतों का संग प्राप्त करने तथा भक्ति करने का अवसर मिले तो उसे व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए। भागवत कथा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मा को भगवान से जोड़ने और जीवन को सही दिशा देने का माध्यम है। इसलिए श्रद्धा, एकाग्रता और विनम्रता के साथ कथा श्रवण करना चाहिए।
आज मोबाइल पर लोग रील बनाने, लाइक और फॉलोअर्स बढ़ाने में इतने व्यस्त हो गए है कि वे अपने परिवार, समाज और आध्यात्मिक जीवन से दूर हो गए हैं। समय का सदुपयोग करने के बजाय घंटों मोबाइल पर बिताया जाता है। मनुष्य का जीवन केवल दिखावे और प्रसिद्धि के लिए नहीं मिला है, बल्कि भगवान के स्मरण, अच्छे कर्म और आत्मकल्याण के लिए मिला है। यदि तकनीक का उपयोग संयम से किया जाए तो वह लाभदायक है, लेकिन यदि वही जीवन का केंद्र बन जाए तो व्यक्ति अपने वास्तविक उद्देश्य को भूल सकता है।
ताप्ती नदी में स्नान करने तथा श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करने से मन को शांति, सकारात्मक ऊर्जा और भगवान के प्रति भक्ति भाव की प्राप्ति होती है। यह नदी केवल जल का स्रोत नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और सनातन परंपराओं की जीवंत धरोहर भी है। ताप्ती नदी हमें प्रकृति के सम्मान, आध्यात्मिक चिंतन और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े रहने की प्रेरणा देती है। भारत की नदियाँ केवल जल का स्रोत नहीं हैं, बल्कि हमारी संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिक परंपरा की वाहक भी हैं।
मनुष्य जैसा व्यवहार दूसरों के साथ करता है, वैसा ही फल उसे किसी न किसी रूप में वापस मिलता है। यदि हम प्रेम, सम्मान, सहायता और दया देते हैं तो वही भाव हमारे जीवन में लौटकर आते हैं। वहीं यदि हम घृणा, छल या दूसरों को कष्ट देते हैं तो उसका परिणाम भी हमें भोगना पड़ता है। कर्म का सिद्धांत अटल है। इसलिए मनुष्य को सदैव अच्छे कर्म करने चाहिए, क्योंकि जो बीज बोया जाता है, उसी प्रकार का फल प्राप्त होता है।
श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन
दिनांक: 06 से 12 जून 2026 तक
समय: दोपहर 3:30 बजे से
स्थान: मेला ग्राउंड, रेलवे स्टेशन के पास, मुलताई, बैतूल (म.प्र.)