वृन्दावन में पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के सानिध्य में मार्कण्डेय पुराण कथा का समापन दिवस

भगवान के सामने हमारी कोई भी चालाकी या दिखावा नहीं चलता, क्योंकि वे हमारे बाहरी व्यवहार से नहीं, बल्कि हमारे अंतर्मन की भावना को देखते हैं। मनुष्य संसार में दूसरों को अपने शब्दों और कर्मों से भ्रमित कर सकता है, लेकिन भगवान सर्वज्ञ हैं—वे हमारे मन के हर विचार, हर भावना और हर इरादे को जानते हैं।

नवरात्रि के पावन दिनों में माँ की सच्चे मन से पूजा करने से हमारे सभी पापों का नाश होता है। यह समय आत्मशुद्धि और भक्ति का विशेष अवसर होता है, जब हम माँ की आराधना करके अपने मन, वचन और कर्म को पवित्र बना सकते हैं। जो व्यक्ति श्रद्धा, नियम और भक्ति के साथ नवरात्रि का व्रत और पूजन करता है, माँ उसकी सभी बाधाओं को दूर कर उसे सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

महिषासुर का संहार केवल एक युद्ध नहीं, बल्कि धर्म और अधर्म के बीच की अंतिम विजय का प्रतीक है। महिषासुर बाहर नहीं, हमारे भीतर का अहंकार, क्रोध और मोह है। जब तक हम इन बुराइयों से लड़ते नहीं, तब तक सच्ची विजय नहीं मिलती। माँ की भक्ति, साधना और श्रद्धा से ही इन नकारात्मक शक्तियों का अंत होता है और जीवन में सुख, शांति और विजय प्राप्त होती है।

व्रत रखने से न केवल हमारी आस्था मजबूत होती है, बल्कि यह हमारे भीतर सकारात्मक ऊर्जा और आत्मबल का भी संचार करता है। जब व्यक्ति नियम, संयम और भक्ति के साथ व्रत करता है, तो उसका मन स्थिर होता है और नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है।

भगवान तक पहुँचने का सबसे सरल और सच्चा मार्ग है—निर्मल मन, सच्ची भावना और पूर्ण समर्पण। जब हम बिना किसी स्वार्थ, बिना किसी दिखावे के, पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान के पास जाते हैं, तब उनकी कृपा स्वतः प्राप्त होती है। हमेशा ईमानदारी से भगवान का स्मरण करना चाहिए, क्योंकि वही भक्ति हमारे जीवन को सुख, शांति और सफलता से भर देती है।

मार्कण्डेय पुराण कथा का भव्य आयोजन

तिथि: 19 से 25 मार्च 2026

कथा समय – दोपहर 4 बजे से शाम 6 बजे तक

कथा स्थल: ठा.श्री प्रियाकांत जू मंदिर शान्ति सेवा धाम, वृन्दावन

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