कथा के शुभारंभ से पूर्व पूज्य महाराज श्री ने समस्त भक्तों से भावपूर्ण अनुरोध किया था कि जो भी श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पधारें, वे सर पर तिलक लगाकर और अपने बच्चों को कथा में लेकर आएं। उनके इस आग्रह का भक्त पूरे भाव और अनुशासन के साथ पालन कर रहें । कथा स्थल पर उपस्थित सभी श्रद्धालु तिलक धारण किए और अपने बच्चों के साथ कथा श्रवण कर रहें हैं ।
श्रीमद्भागवत कथा किसी भी प्रकार के अभिमान को नष्ट करने में पूर्णतः सक्षम है, क्योंकि अभिमान मनुष्य को भगवान से दूर कर देता है। भगवान को अभिमानी मनुष्य कदापि प्रिय नहीं होता, बल्कि जो व्यक्ति अपने अहंकार का त्याग कर विनम्रता के मार्ग पर चलता है, वही भगवान का सच्चा प्रिय बनता है।
जहाँ गाय का सम्मान होता है, वहाँ लक्ष्मी का वास होता है और उस घर में सुख, शांति एवं समृद्धि बनी रहती है। गौ-पालन से न केवल धार्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है, बल्कि समाज, पर्यावरण और स्वास्थ्य—तीनों का कल्याण होता है।
सनातन धर्म की रक्षा और उसके शाश्वत मूल्यों को सुरक्षित रखने के लिए देश में सनातन बोर्ड का निर्माण होना चाहिए, यह बोर्ड शिक्षा के माध्यम से बच्चों और युवाओं को वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण, महाभारत और गीता जैसे ग्रंथों के मूल संदेश से परिचित कराएगा, जिससे उनमें नैतिकता, संस्कार और राष्ट्रप्रेम का भाव विकसित हो सके।
हमारे मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाये। मंदिरों की आय का उपयोग मूल रूप से धार्मिक कार्यों, साधु-संतों की सेवा, गोशालाओं, वेद-पाठशालाओं, संस्कृत शिक्षा, अन्नदान, चिकित्सा और समाज सेवा के लिए होना चाहिए। किंतु जब मंदिर सरकारी नियंत्रण में होते हैं, तब उनकी आय का उपयोग कई बार ऐसे कार्यों में हो जाता है जिनका धर्म और भक्तों की भावना से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं होता।
धर्म रील से नहीं, रियल से बचेगा—केवल सोशल मीडिया पर धार्मिक दिखावा करने से हमारा कल्याण संभव नहीं है, बल्कि धर्म को जीवन में उतारना आवश्यक है। केवल पोस्ट डालने या दिखावे से न तो आत्मा का कल्याण होता है और न ही समाज का।
भगवान केवल मंदिरों में ही नहीं, बल्कि हमारे आसपास, हमारे हृदय में और इस सृष्टि के कण-कण में विराजमान हैं, लेकिन ज्ञान के अभाव में हम उनकी उपस्थिति को न देख पाते हैं और न ही अनुभव कर पाते हैं।
मोबाइल ने हमारे आपसी रिश्तों को कमजोर कर दिया है। परिवार के लोग एक ही छत के नीचे रहते हुए भी एक-दूसरे से दूर होते जा रहे हैं। संवाद कम हो रहा है, संवेदना घट रही है और संबंधों में दरारें आ रही हैं।
हमें यह ज्ञान होना चाहिए कि किसकी पूजा करनी है, किसके दर्शन करने हैं और किस मार्ग पर चलना है। अज्ञान के कारण आज कई सनातनी घरों में ऐसी पूजा-पद्धतियाँ देखने को मिलती हैं, जिन्हें हमारे शास्त्र स्वीकार नहीं करते, जो कि अत्यंत दुःखद और चिंताजनक विषय है।
श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन
दिनांक- 15 से 21 दिसंबर 2025 तक
समय: दोपहर 2 बजे से
स्थान: वी. टी. रोड, मेला ग्राउंड, मानसरोवर, जयपुर, राजस्थान