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#day6 भगवान की कथा सुनने से सारे पाप नष्ट हो जाते है – पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज

#day6 भगवान की कथा सुनने से सारे पाप नष्ट हो जाते है - पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज

आज कथा में श्री प्राउजुल तिवारी जी ( विभाग संगठन मंत्री),डॉ. दुर्गेश कुमार जी (पुलिस अधीक्षक), श्री चित्रांशू सिहं जी ( प्रांत सह मंत्री ) ने कथा में शामिल होकर व्यासपीठ का आशीर्वाद प्राप्त कर कथा श्रवण किया।

आज की कथा के दौरान पूज्य महाराज श्री ने भक्तों को बताया कि देश में धर्म को बचाने के लिए सनातनियों की संख्या का अधिक होना अत्यंत आवश्यक है। यदि सनातनी अधिक संख्या में होंगे, तो हमारी संस्कृति और धर्म की रक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। इसलिए प्रत्येक सनातनी को अपने परिवार और समाज में धार्मिक जागरूकता फैलानी चाहिए और अधिक से अधिक बच्चों को धार्मिक शिक्षा से जोड़ना चाहिए।

कथा पंडाल में श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह का भव्य आयोजन किया गया। इस दिव्य विवाह को देखने के लिए हजारों भक्तगण उपस्थित हुए। कथा पंडाल को फूलों, दीपों और रंगीन वस्त्रों से अत्यंत भव्य रूप से सजाया गया था। विवाह की झांकी इतनी अद्भुत थी कि ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं द्वारका में यह मंगल उत्सव संपन्न हो रहा हो।

आजकल हिंदू परिवारों में बच्चों को सनातन धर्म की शिक्षा नहीं दी जाती, लेकिन सोशल मीडिया पर स्वयं को धार्मिक दिखाने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। उन्होंने आग्रह किया कि हर सनातनी को अपने परिवार में धर्म की शिक्षा देनी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़ी रहें।

प्रत्येक सनातनी को तुलसी माता की सेवा अवश्य करनी चाहिए, क्योंकि तुलसी न केवल आध्यात्मिक रूप से पवित्र मानी जाती हैं, बल्कि घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का भी संचार करती हैं। तुलसी की पूजा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और घर में दिव्य वातावरण बना रहता है।

हर सनातनी के माथे पर तिलक, हाथ में कलावा, गले में कंठी और मुख पर भगवान का नाम होना चाहिए। यही सनातन की वास्तविक पहचान है, जो व्यक्ति को धर्म के प्रति समर्पित और गौरवान्वित महसूस कराती है।

प्रत्येक सनातनी को एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। यह व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति और शारीरिक शुद्धता का भी एक माध्यम है। भगवान श्रीहरि विष्णु को एकादशी का व्रत अत्यंत प्रिय है, और जो भक्त इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करते हैं, उन्हें विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
प्रत्येक सनातनी को गाय का पालन करना चाहिए । गौसेवा सनातन धर्म का महत्वपूर्ण अंग है। गाय को माता का स्थान दिया गया है, और उसकी सेवा करने से पुण्य प्राप्त होता है।

भगवान धरती पर जन्म धर्म की रक्षा करने के लिए लेते है। जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेते हैं और सत्य को स्थापित करते हैं।

प्रत्येक सनातनी के घर में तीन-चार बाल गोपाल अवश्य होने चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप की पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है। इससे बच्चों में धार्मिक संस्कार भी विकसित होते हैं।

पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के सानिध्य में

श्रीमद्भागवत कथा

दिनांक: 13 से 19 फरवरी 2025

समय: दोपहर 12:30 से

स्थान: गल्ला मंडी राधा कृष्ण मंदिर, राठ रोड, उरई, उत्तर प्रदेश

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