वृंदावन में अधिक मास के पावन अवसर पर पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के सानिध्य में वराह पुराण कथा का द्वितीय दिवस
अधिक मास में किए गए जप, तप, दान, भक्ति और सेवा का फल हजार गुना अधिक प्राप्त होता है। दान-पुण्य का महत्व अधिक मास में बहुत बढ़ जाता है, इस समय जरूरतमंदों की सहायता, गौ सेवा, अन्नदान, जल सेवा और धार्मिक कार्यों में सहयोग करना अत्यंत शुभ माना गया है। जो व्यक्ति श्रद्धा और निष्काम भाव से दान करता है, उसके जीवन के कष्ट दूर होने लगते हैं और घर-परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि का आगमन होता है। इस पवित्र समय में भगवान का नाम जपना, कथा सुनना और सेवा कार्य करना आत्मा को भी शुद्ध और पवित्र बनाता है।
महाराज श्री ने “Krishna Avatharam Part 2” के बारें में बताते हुए कहा कि इस फिल्म के द्वारा सनातन संस्कृति, भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य जीवन और ब्रज की महान आध्यात्मिक परंपरा को जन-जन तक पहुँचाने का एक सुंदर प्रयास किया जा रहा है। इस प्रकार की फिल्मों में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएँ, भक्ति, प्रेम, धर्म और ब्रजभूमि की महिमा को दर्शाया जाता है, जिससे नई पीढ़ी भी अपनी संस्कृति और संस्कारों से जुड़ती है। हमने हमेशा अश्लीलता और नकारात्मकता फैलाने वाली फिल्मों का बहिष्कार किया है। इस फिल्म से हमारी संस्कृति को बल मिलेगा और आने वाली पीढ़ियों में भी धर्म, भक्ति और संस्कार जीवित रहेंगे।
जो व्यक्ति अपने पितरों को भूल जाता है या उनका अनादर करता है, उसके जीवन में अनेक प्रकार की बाधाएँ, अशांति और संकट आने लगते हैं। हमारे पितृ ही हमारे कुल और जीवन की आधार शक्ति होते हैं। उनके आशीर्वाद से ही परिवार में सुख, शांति, उन्नति और समृद्धि बनी रहती है। शास्त्रों में पितरों का स्थान देवताओं के समान बताया गया है, इसलिए उनका स्मरण और सम्मान करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। पितरों की संतुष्टि के लिए तर्पण, श्राद्ध, दान-पुण्य और भगवान का स्मरण अत्यंत आवश्यक माना गया है। जब श्रद्धा और भाव से पितरों का तर्पण किया जाता है, तब उनके आशीर्वाद से जीवन के अनेक कष्ट दूर होने लगते हैं।
आज हमारे घरों से रामायण, श्रीमद्भगवद्गीता और भागवत जैसे पवित्र ग्रंथ धीरे-धीरे दूर होते जा रहे हैं। जब घरों में धर्मग्रंथों का स्थान समाप्त हो जाता है, तब जीवन में क्रोध, अहंकार, तनाव और अशांति बढ़ने लगती है। यही कारण है कि परिवारों में आपसी प्रेम और सम्मान कम होता जा रहा है तथा रिश्तों में दूरियाँ बढ़ रही हैं। यदि हम अपने घरों में पुनः रामायण, गीता और भगवान की भक्ति को स्थान देंगे, तो बच्चों में संस्कार आएंगे, परिवारों में प्रेम बढ़ेगा और जीवन में सुख-शांति स्थापित होगी।
जो व्यक्ति धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा अवश्य करता है। धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्य बोलना, माता-पिता का सम्मान करना, गौ सेवा, संत सेवा, भगवान का स्मरण, संस्कारों का पालन और मानवता के मार्ग पर चलना भी धर्म ही है। प्रत्येक सनातनी का कर्तव्य है कि वह अपने धर्म, संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करे तथा उन्हें आगे बढ़ाए। जब हम धर्म की रक्षा करेंगे, तब धर्म भी हमारी और हमारे परिवार की रक्षा करेगा और जीवन में सुख, शांति एवं प्रभु कृपा बनी रहेगी।
वराह पुराण कथा का भव्य आयोजन
दिनांक – 18 मई से 24 मई 2026 तक
समय : प्रतिदिन शाम 4 बजे से 6 बजे तक
स्थान : ठाकुर श्रीप्रियाकांत जू मंदिर, शान्ति सेवा धाम, वृंदावन