अयोध्या में 14 किलोमीटर की परिधि में शराब और मांस की दुकानों को बंद किया गया है, उसी प्रकार भारत के सभी धार्मिक स्थलों पर मांस और शराब की बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित की जानी चाहिए। सम्पूर्ण ब्रज मंडल को मांस और शराब मुक्त किया जाना चाहिए। धार्मिक स्थानों पर मांस और शराब जैसी अपवित्र चीजों की बिक्री होना हमारे धर्म और संस्कृति का अपमान है। तीर्थों में मांस और शराब का सेवन हमारी धार्मिक परंपराओं के विरुद्ध है और सामाजिक मूल्यों को कमजोर करता है।

हमेशा धर्म के मार्ग पर चलो, धर्म के विरुद्ध कभी मत जाओ। जब मनुष्य धर्म के मार्ग पर चलता है, तब उसका जीवन स्वतः ही संतुलित, शांत और सफल बनता है। धर्म का मार्ग सरल नहीं होता, पर वह सदैव सही होता है। कई बार अधर्म का मार्ग तात्कालिक लाभ, सुख या सुविधा देता हुआ प्रतीत होता है, पर उसका अंत हमेशा पीड़ा, पश्चाताप और पतन में होता है। इसके विपरीत, धर्म का पथ भले ही प्रारंभ में कठिन लगे, पर उसका फल स्थायी शांति, आत्मबल और ईश्वर-कृपा के रूप में प्राप्त होता है।

ब्रज के कण-कण में श्रीकृष्ण का वास है । ब्रज वह पावन भूमि है जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बाल, किशोर और रास लीलाओं से इस धरती को स्वयं साक्षात् वैकुण्ठ बना दिया। यहाँ की मिट्टी, वायु, जल, वृक्ष, लता-पता—सबमें आज भी कृष्ण-चेतना स्पंदित होती है। ब्रज की महिमा यही है कि यहाँ भक्ति ज्ञान से नहीं, प्रेम से जन्म लेती है। यहाँ भगवान राजा नहीं, सखा हैं; शासक नहीं, प्रियतम हैं। ब्रज में कृष्ण को खोजने की आवश्यकता नहीं—बस हृदय खोलने की आवश्यकता है।

ब्रज की परिक्रमा करने से 84 लाख योनियों के बंधन से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है । ब्रज वह पावन धरा है जहाँ भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाएँ आज भी कण-कण में विद्यमान हैं। इस भूमि की परिक्रमा करना मानो अपने भीतर की यात्रा करना है, जहाँ आत्मा धीरे-धीरे बंधनों से मुक्त होने लगती है।

भक्तमाल कथा का भव्य आयोजन
दिनांक: 12 से 16 जनवरी 2026
समय: शाम 4 बजे से
स्थान: ठाकुर श्री प्रियाकांत-जू मंदिर, शांति सेवा धाम ,वृंदावन

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