जीवन में मनुष्य को सदैव धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए, क्योंकि यही एकमात्र ऐसा सत्य है जो अंतिम समय में भी हमारे साथ जाता है। धन, वैभव, पद, प्रतिष्ठा, रिश्ते और सांसारिक सुख–सुविधाएँ सब यहीं छूट जाती हैं । अंतिम समय में न तो धन काम आता है, न ही सत्ता और न ही शरीर की शक्ति। उस क्षण केवल धर्म से अर्जित पुण्य ही सहारा बनता है।

पूतना भगवान श्रीकृष्ण को मारने के उद्देश्य से अपने स्तनों पर कालकूट विष लगाकर उन्हें दूध पिलाने के लिए आती है, किंतु भगवान ने उसका भी उद्धार कर दिया। यह दर्शाता है कि भगवान केवल अपराध नहीं देखते, बल्कि भाव को देखते हैं। जो उन्हें विष पिलाने के लिए आया, यदि उसका भी उद्धार कर सकते है तो तुम्हारा क्यों नहीं कर सकते है। जब मानव अहंकार और स्वार्थ छोड़कर भगवान की शरण में जाते हैं, तो वे अवश्य हमारा उद्धार करते हैं, हमारे पापों का नाश करते हैं और हमें जीवन के दुखों से मुक्त कर मोक्ष की ओर ले जाते हैं।

हमें ज्यादा देर तक मोबाइल का उपयोग नहीं करना चाहिए और न ही अपने बच्चों को लंबे समय तक मोबाइल चलाने की अनुमति देनी चाहिए। ज्यादा देर तक मोबाइल चलाने से हमारी नींद पूरी नहीं हो पाती और शरीर के अंदर चिड़चिड़ापन, तनाव व थकान पैदा होती है।

घर पर हुए अतिथि का हमेशा सम्मान करना चाहिए। अतिथि को भोजन कराए बिना, स्नेह और सम्मान दिए बिना विदा करना अशुभ माना जाता है। अतिथि को कुछ न कुछ देकर विदा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, लक्ष्मी का वास होता है और परिवार में सुख-शांति बढ़ती है।

श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन
दिनांक: 3 से 9 जनवरी 2026
समय: दोपहर 2 :30 बजे से
प्रिंसेस श्राईन पैलेस ग्राउंड ,गेट न.9, बैंगलोर

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