बांग्लादेश में हिंदू महिला के साथ अमानवीय अत्याचार किया गया। जिस की पूज्य महाराज श्री ने घोर निंदा करते हुए कहा कि बांग्लादेश में हिंदू महिला के साथ बर्बरता और दुष्कर्म, संपूर्ण मानवता को शर्मसार करने वाली है। हिंदूओं के साथ होने वाला अत्याचार यदि दुनिया के किसी भी कोने में हो—चाहे वह पाकिस्तान हो, बांग्लादेश हो या भारत—और यदि ऐसे समय में हम चुप रहते हैं, तो यह चुप्पी एक अपराध है। यदि अन्याय होते हुए भी समाज मौन बना रहे, तो फिर भगवान भी हमें कभी क्षमा नहीं करेंगे, क्योंकि मौन समाज किसी भी काम का नहीं होता।

बीते दिनों हमने बांग्लादेशी क्रिकेटर के IPL से बहिष्कार का विषय उठाया और परिणामस्वरूप BCCI ने उस बांग्लादेशी क्रिकेटर को IPL बाहर कर दिया । इस पर कुछ लोग यह प्रश्न कर रहे हैं कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में शरण लिए हुए हैं, तो उस विषय पर क्यों नहीं बोला जाता तो इस पर मै उन लोगों को बता दू कि यह दो देशों के राजनीतिक स्तर की बातें होती हैं, सनातन धर्म में शरणागत की—विशेषकर जब वह एक महिला हो—हमेशा रक्षा की जाती है। यही हमारा सनातन धर्म सिखाता है। भगवान श्रीराम स्वयं कहते हैं कि जो शरण में आए, जो अपने प्राणों की रक्षा की याचना करे, उसकी रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है और उसका त्याग कभी नहीं करना चाहिए।

हम आज पहली बार बांग्लादेश की घटनाओं पर नहीं बोल रहे हैं। पिछले डेढ़-दो वर्षों से निरंतर बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के विरुद्ध आवाज उठाई जा रही है। जब पहले बांग्लादेश में इस्कॉन मंदिर के पुजारी जी को बंदी बनाया गया था, तब भी हमने इसका घोर विरोध किया था और कानपुर में इसके खिलाफ रैली तक निकाली थी।

कृष्ण जनमभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण होना चाहिए, सनातन बोर्ड का गठन होना चाहिए, मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाना चाहिए, और देश में गौ-हत्या पूर्ण रूप से बंद होनी चाहिए।

हम चाहे किसी भी भूमिका में हों—नेता हों, कलाकार हों, पत्रकार हों या व्यवसायी—लेकिन अपनी बहन-बेटियों की इज्जत और अपने देश की रक्षा के लिए हमें सदैव तत्पर रहना चाहिए। यही सनातन धर्म की सच्ची सेवा है, यही राष्ट्रधर्म है और यही मानवता का वास्तविक मार्ग है।

अभिमान मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। जो व्यक्ति अभिमान करता है, वह अपने से बड़ों का अपमान करने लगता है, और यही उसका पतन आरंभ कर देता है। शास्त्र कहते हैं कि जहाँ विनम्रता नहीं होती, वहाँ ईश्वर का वास नहीं होता। उसके जीवन से यश धीरे-धीरे लुप्त हो जाता है और लक्ष्मी भी उसका साथ छोड़ देती है।

सनातन धर्म में एक-एक चीज़ विज्ञान से जुड़ी हुई है। यहाँ कोई भी परंपरा, नियम या संस्कार बिना कारण के नहीं है। चाहे वह व्रत हों, पूजा-पद्धति हो, योग हो, मंत्र-जप हो या जीवन जीने की मर्यादा—हर व्यवस्था के पीछे गहरा वैज्ञानिक और प्राकृतिक आधार छिपा है। सनातन केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, स्वस्थ और संस्कारित बनाने का पूर्ण विज्ञान है। जिस दिन मनुष्य इस सत्य को समझ लेता है, उस दिन उसे सनातन की महानता प्रमाण के रूप में दिखाई देने लगती है, न कि केवल परंपरा के रूप में।

बचपन से ही कथा का श्रवण करना चाहिए, क्योंकि बाल्यावस्था में जो संस्कार पड़ते हैं, वही पूरे जीवन की दिशा तय करते हैं। कथा केवल कहानियाँ नहीं होतीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाती हैं। बचपन में भगवान की कथा सुनने से मन पवित्र होता है, विचार शुद्ध होते हैं और संस्कार मजबूत बनते हैं। जो बालक बचपन से कथा, सत्संग और भक्ति से जुड़ जाता है, वह जीवन में कभी भटकता नहीं है और हर परिस्थिति में धर्म, मर्यादा और सत्य के मार्ग पर चलता है।

श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन
दिनांक: 3 से 9 जनवरी 2026
समय: दोपहर 2 :30 बजे से
प्रिंसेस श्राईन पैलेस ग्राउंड ,गेट न.9, बैंगलोर

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