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#Day2 माथे पर तिलक, हाथ में कलावा और गले में कांठी होना आवश्यक है – पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज

Day2 माथे पर तिलक, हाथ में कलावा और गले में कांठी होना आवश्यक है - पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज

पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कथा में कहा कि कोई कहता है नींद नहीं आती, जो मेहनत करता है, उसे नींद के लिए मेहनत नहीं करनी पड़ती। मेहनत और संघर्ष में अपनी नींद और आराम की कीमत नहीं होती। जब हम अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होते हैं और पूरी निष्ठा से काम करते हैं, तो हमारी मेहनत ही हमें शांति और संतोष देती है। कहने का मतलब यह है कि नींद सिर्फ आराम की नहीं, बल्कि मानसिक शांति और संतोष की भी होती है।

माथे पर तिलक, हाथ में कलावा और गले में कांठी होना आवश्यक है। शास्त्र कहते हैं कि जिसके माथे पर तिलक नहीं होता, वह पाप का भागी होता है। माथे पर तिलक लगाने से व्यक्ति के मस्तिष्क में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और वह मानसिक शांति का अनुभव करता है।

व्यास पीठ में जो शक्ति होती है, वह न केवल भौतिक रूप में होती है, बल्कि यह आध्यात्मिक उर्जा का रूप भी होती है। यह शक्ति हमें हमारी आस्थाओं और जीवन के उद्देश्य को समझने में मदद करती है। कथा सुनने से न केवल हमारा ज्ञान वर्धित होता है, बल्कि हमारी आत्मा भी शुद्ध होती है। व्यास पीठ और कथाएँ दोनों में ही एक अद्वितीय शक्ति होती है, जो हमें आत्मिक उन्नति, मानसिक शांति और जीवन के उच्चतम उद्देश्य की ओर मार्गदर्शन करती हैं।

माँ कर्ज़ हम कभी चुका नहीं सकते। वह सिर्फ हमारी देखभाल नहीं करती, बल्कि हमारे अस्तित्व को संजीवनी शक्ति देती है। एक माँ का प्यार और बलिदान अनमोल होते हैं, और इसे शब्दों में समेटना असंभव है। माँ की ममता और उसके प्यार का कोई हिसाब नहीं होता। वह अपनी पूरी ज़िंदगी अपने बच्चों के लिए समर्पित कर देती है।

पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के सानिध्य में
श्रीमद्भागवत कथा
दिनांक: 13 से 19 फरवरी 2025
समय: दोपहर 12:30
स्थान: गल्ला मंडी राधा कृष्ण मंदिर, राठ रोड, उरई, उत्तर प्रदेश

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