परम पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुरजी के प्रात:स्मरणीय पूजनीय गुरूजी का जीवन परिचय :-
पूज्य ठाकुरजी श्री देवकीनंदन जी महाराज के परम पूज्य गुरूजी -अनादि
वैदिक सत्य सनातन भागवतधर्म परंपरा के स्तम्भ
-भागवतसम्राट-शास्त्रार्थमहारथी श्रीवृंदावन भागवतपीठाधीश्वर श्री पुरुषोत्तमशरण शास्त्री जी महाराज का जन्म भाद्रपद शुक्ला वामनद्वादशी विक्रम संवत २०११ दि. ३० अगस्त १९५५ ई . को प्रियावल्लभ श्रीराधाकृष्ण युगल सरकार की नित्यविहार स्थली श्रीधाम वृन्दावन मे हुआ I इनके पिताश्री -वेदांतकेशरी भागवतभूषण मानसमार्तण्ड पण्डितप्रवर श्रीछ्गनलाल जी शास्त्री शास्त्रार्थमहारथी
थे I और माताश्री परमभागवत पूर्णेश्वरी ( पूरनदेवी ) जी
जगद्गुरु निम्बार्काचार्य श्री " श्रीजी " महाराज की शिष्या हैं I
पूज्य गुरुदेव श्री पुरुषोत्तमशरण शास्त्री जी का यज्ञोपवीत -
संस्कार आठ वर्ष की अवस्था में हुआ I यज्ञोपवीत - संस्कार के ठीक ग्यारह
महीने बाद श्रीमन्निखिल-महीमण्डलाचार्य - चक्रचूडामणि , सर्वतंत्रस्वतंत्र ,
यतिपतिदिनेश , अनन्तश्री विभूषित जगद्गुरु श्रीनिम्बर्काचार्य पीठाधीश्वर श्रीराधासर्वेश्वरशरणदेवाचार्य
श्री " श्रीजी " महाराज निम्बार्कतीर्थ ( सलेमाबाद ) किशनगढ़ ( राज.) से
सविधान पूर्वक वैष्णव गुरुदीक्षा प्राप्त की I शास्त्री जी के बड़े भाई
श्रीललितविहारीशरण जी थे जो लगभग दस वर्ष की अवस्था में ही निकुंज्वास कर
गये इन के छोटे भाई गिरधारी शरण हैं I पूज्य गुरूजी बच्चपन से ही
धार्मिक खेल खेलते थे I जैसे युगल सरकार श्यामाश्याम की पूजा अर्चना करना
बच्चों के साथ राम लीला का अभिनय करना I श्रीराम लीला मे भगवान श्रीराम
का पाठ करना , कथा कहना आदि I इसके बाद कुछ बड़े होने
पर विद्या अध्ययन के लिए विद्यालय गये I वेद , ज्योतिष, व्याकरण ,
कर्मकाण्ड, चारों वेदांतो का दार्शिनिक अध्ययन किया I आज तक के समय मे
आप श्री ने लगभग १२०० भागवत सप्ताह कथाओं का बाचन किया , जिन मे
अनन्तश्री विभूषित जगद्गुरु श्री शंकराचार्यों का एवं वैष्णवाचार्यों ,
महामण्डलेश्वरों तथा अनन्तश्री विभूषित जगद्गुरु श्रीनिम्बर्काचार्य श्रीराधासर्वेश्वरशरणदेवाचार्य श्री " श्रीजी " महाराज का पादार्पण हुआ I अपने जीवन मे अनेक विद्यार्थियों को आप श्री
ने भागवत , कर्मकाण्ड व ज्योतिष- शास्त्र का अध्ययन कराया है I भगवान
श्रीराधामाधव प्रियावल्लभ की कृपा से श्रीधाम वृन्दावन में कुछ एसे
रसिक संतों के सत्संग व उन की सेवा का लाभ प्राप्त किया जिनकी गोदी में
श्यामाश्याम खेलते थे ,जिसके फलस्वरूप श्री राधामाधव प्रियावल्लभ की पूर्ण
कृपा हो गई I तब से आप श्री अपने अतिशय अत्यंत अन्तरंग निभृत नित्य
निकुंज विलासी प्रियावल्लभ भगवान की सेवा में मन - वाणी - कर्म से तन्मय है
I
श्री सदगुरुदेव भगवान की जय हो !!!!!!!