current events : Shrimad Bhagwat katha From  27/05/2013 To  02/06/2013 2:30 Vill-Chiraiyapur,Gram Panchyat-barona kala,Dist-auraiya (U.P.)
 

Sri Satguru



परम पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुरजी के प्रात:स्मरणीय पूजनीय गुरूजी का जीवन परिचय :-

पूज्य  ठाकुरजी श्री देवकीनंदन जी महाराज के परम पूज्य गुरूजी -अनादि
वैदिक सत्य सनातन भागवतधर्म परंपरा के स्तम्भ
-भागवतसम्राट-शास्त्रार्थमहारथी श्रीवृंदावन भागवतपीठाधीश्वर श्री पुरुषोत्तमशरण शास्त्री जी महाराज का जन्म भाद्रपद शुक्ला वामनद्वादशी विक्रम संवत २०११ दि. ३० अगस्त १९५५ ई . को प्रियावल्लभ श्रीराधाकृष्ण युगल सरकार की नित्यविहार स्थली श्रीधाम वृन्दावन  मे हुआ   I     इनके पिताश्री -वेदांतकेशरी भागवतभूषण  मानसमार्तण्ड पण्डितप्रवर श्रीछ्गनलाल जी शास्त्री  शास्त्रार्थमहारथी 
थे I  और माताश्री परमभागवत पूर्णेश्वरी ( पूरनदेवी ) जी
जगद्गुरु निम्बार्काचार्य  श्री " श्रीजी " महाराज की शिष्या हैं I
पूज्य गुरुदेव  श्री पुरुषोत्तमशरण शास्त्री जी का यज्ञोपवीत -
संस्कार आठ वर्ष  की अवस्था में हुआ  I यज्ञोपवीत - संस्कार के ठीक ग्यारह
महीने बाद श्रीमन्निखिल-महीमण्डलाचार्य - चक्रचूडामणि , सर्वतंत्रस्वतंत्र ,
यतिपतिदिनेश , अनन्तश्री विभूषित जगद्गुरु श्रीनिम्बर्काचार्य पीठाधीश्वर श्रीराधासर्वेश्वरशरणदेवाचार्य 
श्री " श्रीजी " महाराज निम्बार्कतीर्थ ( सलेमाबाद ) किशनगढ़ ( राज.) से
सविधान पूर्वक  वैष्णव गुरुदीक्षा प्राप्त की I शास्त्री जी के बड़े भाई
श्रीललितविहारीशरण जी थे जो लगभग दस वर्ष की अवस्था में ही निकुंज्वास  कर
गये   इन के छोटे भाई गिरधारी शरण हैं I  पूज्य गुरूजी  बच्चपन  से  ही
धार्मिक खेल खेलते थे I जैसे युगल सरकार श्यामाश्याम  की पूजा अर्चना करना
बच्चों के साथ राम लीला का अभिनय करना  I श्रीराम लीला मे भगवान  श्रीराम
का पाठ करना , कथा कहना आदि  I इसके बाद  कुछ बड़े होने
पर विद्या अध्ययन के लिए विद्यालय गये I वेद , ज्योतिष, व्याकरण ,
कर्मकाण्ड, चारों वेदांतो का दार्शिनिक अध्ययन किया I आज तक के समय मे
आप श्री ने लगभग १२०० भागवत  सप्ताह कथाओं का बाचन  किया , जिन मे
अनन्तश्री विभूषित जगद्गुरु श्री   शंकराचार्यों  का एवं  वैष्णवाचार्यों ,
महामण्डलेश्वरों तथा अनन्तश्री  विभूषित जगद्गुरु श्रीनिम्बर्काचार्य  श्रीराधासर्वेश्वरशरणदेवाचार्य  श्री " श्रीजी " महाराज का पादार्पण हुआ I  अपने जीवन मे अनेक विद्यार्थियों को आप श्री
ने भागवत , कर्मकाण्ड  व ज्योतिष- शास्त्र का अध्ययन कराया है I भगवान
श्रीराधामाधव प्रियावल्लभ  की कृपा  से श्रीधाम वृन्दावन में कुछ एसे
रसिक संतों के सत्संग व उन की सेवा का लाभ प्राप्त किया जिनकी  गोदी में
श्यामाश्याम खेलते थे ,जिसके फलस्वरूप श्री राधामाधव प्रियावल्लभ की पूर्ण
कृपा हो गई  I तब से आप श्री  अपने अतिशय अत्यंत अन्तरंग निभृत नित्य
निकुंज विलासी प्रियावल्लभ भगवान की सेवा में मन - वाणी - कर्म से तन्मय है
I


 

श्री सदगुरुदेव भगवान की जय हो !!!!!!!

II राधे राधे II क्रोध से मानव विवेकहीन होकर कर्तव्याकर्तव्य को भुला देता है I