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Shrimad Bhagwat Katha - Mumbai (MH)

Program Shedule

"धार्मिक शिक्षा हमको बताती है कि हमें किस तरह से जीवन को जीना चाहिए।"

परम पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के सानिध्य में सास्काटून, कनाडा में शुरू हुई श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस में श्रीमद भागवत कथा के महत्त्व का वर्णन भक्तों को श्रवण कराया। महाराज श्री ने कथा प्रारम्भ करते हुए कहा की भगवान ने हमको हाथ, पैर, आँख, नाक, दिमाग सभी कुछ दिया हुआ है। मेरे ठाकुर जी ने हमको इतनी सूंदर सी जिंदगी दी है। तो हमको उनके इस वरदान को कभी भी नहीं भूलना चाहिए। इस मानव योनि को प्राप्त करने के बाद भी अगर मानव मेरे प्रभु को याद न करे तो हमसे बड़ा आत्मघाती या पापी इस दुनिया में और कोई नहीं है। अगर हमारा कोई बुरा कर रहे है तो वो मैं खुद हूँ। मुझसे ज्यादा मेरा बुरा कोई भी नहीं कर सकता है। दुनिया कितना भी मेरा बुरा कर ले पर कहीं न कहीं उसकी भरपाई हो ही जाएगी। लेकिन मैं मेरे लिए जितना बुरा करता हूँ उसकी भरपाई कही भी नहीं हो सकती है। हम अपने धन, दौलत की कितनी भी बुराई कर ले लेकिन उसकी भरपाई हो सकती है लेकिन हम खुद बुरा कर रहे है लाइफ का, जीवन का, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती है। क्या एक बार जीवन जाने के बाद कभी जीवन प्राप्त हो सकता है क्या? नहीं हो सकता है। मानव जीवन प्राप्त करना बहुत ही दुर्लभ है और इस मानव जीवन को पाने के बाद उस ठाकुर को हमको याद करना ही चाहिए। चाहे कितना भी बड़ा पापी क्योँ न हो एक बार जो मेरे ठाकुर की शरण में आ जाता है तो मेरे ठाकुर जी उसको माफ़ कर ही देते है। उस पापी को कभी भी त्यागते नहीं है। उस पापी को तो मेरे ठाकुर जी स्वीकार कर ही लेते है और उस पापी का बेडा सदा के लिए पार कर देते है। मैं तो भगवान से बस यही प्रार्थना करता हूँ की जितने भी संत, महात्मा, पापी, मनुष्य है अगर मेरे ठाकुर की शरण में आएं तो उनको मेरे ठाकुर जी सदा के लिए स्वीकार कर लेना और उन सब का बेडा सदा के लिए पार कर देना। बस यही प्रार्थना मैं अपने उन ठाकुर जी से करता हूँ। तब महाराज श्री ने एकादशी के बारे में वहां पर मौजूद भक्तों को बताया कि एकादशी के दिन लोगों को अन्न नहीं खाना चाहिए। अगर हमने व्रत रखा है या नहीं। हमको एकादशी के व्रत में चावल तो बिलकुल भी नहीं खाने चाहिए। न ही चावल खिलाने चाहिए क्योँकि चावल खिलाने से भी हमको पाप लगता है। ये पाप हमको ही नहीं ये तो हमारी स्वर्ग में जा चुकी पीडियों तक लगता है। इस दिन हमको हो सके तो अन्न ही नहीं खाना चाहिए। जौ और चावल तो दूर की बात है। एक संत थे जो अपनी माँ से डरे हुए थे और वो पृथ्वी में जाकर छुप गए थे और जब बाहर आये तो चावल और जौं के रूप में निकले थे। इसलिए हम इनको जीवात्मा ही समझते है। इसलिए अन्न हमारे यहाँ भगवान का रूप है। हमारे यहाँ पर अन्न का सम्मान भी भगवान के रूप में ही किया जाता है। इसलिए हमको अन्न का निरादर भी कभी नहीं करना चाहिए। अगर चावल के साइंटिफिक वर्जन के बात करे तो चावल में जल तत्व की मात्रा अधिक होती है। और जल तत्व का राजा है चंद्र और चंद्र होता है चंचल। एकादशी का व्रत रखने वाले को चावल क्योँ वर्जित है। क्योँकि ये जो चावल खाने से हमारा मन चंचल होता है पर व्रत का मतलब है की मन को संयमित रखना। इसलिए हमको अपने आप से चावल को दूर रखना है। अगर ये चावल हमारे शरीर के नादरा जायेगा तो हमारे शरीर को अंदर से चंचल कर देगा। इसलिए हमलोग चावल का भोग नहीं लगाते है। अगर भोग मिले भी तो उसको कल तक के लिए रख लो और फिर उस दिन को निकलने के बाद ग्रहण कर लो। अब महाराज श्री ने आगे कहा की कल आपने सुना था कि ध्रुव को अपनी अल्प आयु में ही भगवान के दर्शन हो गए थे। धार्मिक शिक्षा हमको बताती है कि हमको किस तरह से जीवन को जीना चाहिए। इसलिए ही तो संतों की वाणी बोलती है कि तू करले याद राम को ये कितनी बड़ी बात है। लेकिन हम लोगों को ये बात इतनी आसानी से समझ में नहीं आती है। आज कल के बच्चे तो इस मॉडर्न शिक्षा को पढ़ते है। उनके लिए आज की शिक्षा को बदल दिया गया है। जो आज कल के बच्चे पढ़ेंगे उसकी को ही तो वो समझेंगे। जब उनको इस बारे में समझाया ही नहीं जा रहा है तो वो समझेंगे कैसे? वो क्या समझेंगे की भगवान इस पत्थर में है तो इसके लिए उनको प्रह्लाद का चरित्र के बारे में सुनना चाहिए। ये मेरे और आपके द्वारा गयी हुई कथा नहीं है ये तो प्रमाण है इसका। अब बताओ कि क्या कहीं पिलर में से भी कोई भगवान निकलता है क्या? जो खुद जड़ है, जिसमें चेतन ही नहीं है उसमें से कौन आ सकता है? ।। राधे राधे बोलना पड़ेगा ।।

अब आपको रोज नित्य सुबह प्रियकांत जू भगवान का संदेश मिलेगा आपके फोन पर।

आपकी हर सुबह सूहानी हो। आपका हर दिन शुभ हो।। अब आपको रोज नित्य सुबह प्रियकांत जू भगवान का संदेश मिलेगा आपके फोन पर। जिसे स्वयं पूज्य महाराज श्री भेजेंगे आपको पूज्य श्री महाराज का सन्देश प्राप्त करने के लिए आप ये नंबर सेव कर लिजिए और आपको सन्देश प्राप्त हो उसके लिए आप अपना नंबर, नाम, शहर का पता, ईमेल आईडी सहित भेज दीजिये।

श्री प्रियाकांतजू भगवान जी की संध्या आरती के लाइव दर्शन करें

जिनके दर्शन मात्र से हो जाता है सभी दुखों का नाश, मिट जाते है सभी कष्ट, ऐसे हैं भगवान श्री प्रियाकांतजू। अपने नेत्रों से हृदय में उतारें कष्ट हरने वाले श्री प्रियाकांतजू भगवान जी की संध्या आरती के लाइव दर्शन करें, आप सभी भक्त प्रियाकांतजू भगवान के दर्शन फेसबुक के पेज पर देख सकते है। यह आप आज से यानि 9.4.2016 से शाम को 7:30 बजे देख सकते है।

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