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SHRIMAD BHAGWAT KATHA - BHADOHI- UP

Program Shedule

"जब हम भगवान की तरफ नहीं देखते है तब वो थोड़ी - थोड़ी मुसीबत भेजते है हमारे जीवन में।"

पूज्य महाराज श्री देवकीनंदन ठाकुर जी के सानिध्य में न्यू जर्सी, अमेरिका में शुरू हुई श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस में श्रीमद भागवत कथा के महत्त्व का वर्णन भक्तों को श्रवण कराया। महाराज श्री ने "दूर नगरी बड़ी दूर नगरी, कैसे आऊं रे सांवरिया कैसे आऊं रे मनवसिया तेरी गोकुल नगरी" भजन से कथा प्रारम्भ की। महाराज श्री ने कहा की हमारे इष्टदेव यानि की ठाकुर जी ही हम सब को इस संसार रुपी दलदल से सदा के लिए निकाल सकते हैं। यही है जो हमको इस मोहमाया के चंगुल से सदा के लिए आज़ाद कर सकते है। लेकिन आज का इंसान अनजाने में ही कई बार हम सब से एक प्रश्न करता है की जब भगवान हर जगह है तो इतने मंदिरों की क्या जरुरत है। इस पर स्वामी विवेकानंद जी ने बड़ा ही सुन्दर सा जबाव दिया है कि हवा चारो तरफ है लेकिन उस हवा को महसूस करने के लिए हमें कूलर, पंखा की जरुरत होती है। इसके लिए महाराज श्री ने एक दृष्टांत सुनाया कि एक जगह एक बिल्डिंग का निर्माण हो रहा था। सुपरवाइजर था बिल्डिंग के सबसे ऊपर और सभी मजदूर नीचे काम कर रहे थे। तब उस सुपरवाइजर को किसी मजदूर से जरुरी काम पड़ा। जिस मजदूर से उसे काम था उसने उसे आवाज दी लेकिन नीचे काफी होने के कारण किसी ने आवाज नहीं सुनी। तब उसने एक दस रूपये का नोट नीचे फैका। लेकिन मजदूर ने वो दस का नोट उठाया और अपनी जेब में रख लिया और दोबारा काम करने लगा। फिर उस सुपरवाइजर ने पांच सौ का नोट नीचे की तरफ फैका। लेकिन मजदूर ने उस पांच सौ के नोट को भी उठाया और फिर से काम करने लग गया। उसने फिर भी ऊपर की तरफ नहीं देखा। अब सुपरवाइजर ने वहां से अबकी बार एक छोटा सा पत्थर उठाया और उस मजदूर के सर पर दे मारा। अब उस मजदूर ने ऊपर की तरफ देखा कि ये पत्थर आया कहाँ से है? तब उस मजदूर की सुपरवाइजर से वार्ता शुरू हो गयी। ठीक वैसी ही स्थति हमारे जीवन में होती है। जब हमको छोटी-छोटी खुशियां मिलती है तो हम उस भगवान की तरफ देखते भी नहीं है। बड़ी ख़ुशी के वक़्त भी अगर हमको भगवान भी याद करता है तो भी हम अपने आप को बड़ा ही बिजी कर लेते है। जब हम भगवान की तरफ नहीं देखते है तब वो थोड़ी - थोड़ी मुसीबत भेजते है हमारे जीवन में। यहाँ पर गुरु नानकदेव जी ने एक बड़ी अच्छी बात लिखी है कि "जब हमारे जीवन में छोटी - छोटी मुसीबत आती है तब ही हमें इनकी याद आती है"। लेकिन यदि हम इनको अपने सुखी दिनों में याद करेंगे तो दुःख तो कभी आएगा ही नहीं हमारे जीवन में। उनका कहना ये है की सुखी दिनों में हम उनकी तरफ देखते भी नहीं लेकिन जब दुःख आता है तो हमको उनके सिवा कुछ दिखता भी है। इसलिए तो महाराज श्री ने कहा है कि हमको उस बुरे वक़्त का इंतज़ार नहीं करना चाहिए कि कब बुरा वक़्त आएगा और कब हम उसको याद करेंगे। इस थिंकिंग को हमको बदल देना चाहिए। अच्छे समय में ही इतने अच्छे काम कर लेना चाहिए कि बुरे समय में बुराई अपने आप ही चली जाये और ये तभी होगा जब हम अच्छे काम करेंगे। तभी हमारे सभी दुखड़ों को यानि दुखों को हमारे राम दूर कर देंगे। हमको तो अपने आत्म कल्याण के बारे में सोचना चाहिए। अपने बारे में सोचना चाहिए कि मैं कौन हूँ ये सोचना चाहिए। मैं कहाँ से आया हूँ ये भी सोचना चाहिए। हमारे वेदों में कर्म कांड का भी वर्णन मिलता है और वेदों में भक्ति का भी वर्णन मिलता है। तब महाराज श्री ने हमको बताया कि ज्ञानी तो इस संसार में पूर्णतया कोई आया ही नहीं है। हमको भगवान की भक्ति सदा ही करते रहना चाहिए। इसलिए तो हमको उस देव के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानना चाहिए। तभी तो हम अपने जीवन में सफल हो सकते है। ।। राधे राधे बोलना पड़ेगा ।।

अब आपको रोज नित्य सुबह प्रियकांत जू भगवान का संदेश मिलेगा आपके फोन पर।

आपकी हर सुबह सूहानी हो। आपका हर दिन शुभ हो।। अब आपको रोज नित्य सुबह प्रियकांत जू भगवान का संदेश मिलेगा आपके फोन पर। जिसे स्वयं पूज्य महाराज श्री भेजेंगे आपको पूज्य श्री महाराज का सन्देश प्राप्त करने के लिए आप ये नंबर सेव कर लिजिए और आपको सन्देश प्राप्त हो उसके लिए आप अपना नंबर, नाम, शहर का पता, ईमेल आईडी सहित भेज दीजिये।

श्री प्रियाकांतजू भगवान जी की संध्या आरती के लाइव दर्शन करें

जिनके दर्शन मात्र से हो जाता है सभी दुखों का नाश, मिट जाते है सभी कष्ट, ऐसे हैं भगवान श्री प्रियाकांतजू। अपने नेत्रों से हृदय में उतारें कष्ट हरने वाले श्री प्रियाकांतजू भगवान जी की संध्या आरती के लाइव दर्शन करें, आप सभी भक्त प्रियाकांतजू भगवान के दर्शन फेसबुक के पेज पर देख सकते है। यह आप आज से यानि 9.4.2016 से शाम को 7:30 बजे देख सकते है।

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