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SHRIMAD BHAGWAT KATHA - BHADOHI- UP

Program Shedule

"सिर्फ सनातन धर्म ही ऐसा है जहां पर कन्याओं का पूजन होता है।"

पूज्य महाराज श्री देवकीनंदन ठाकुर जी के सानिध्य में न्यू जर्सी, अमेरिका में शुरू हुई श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस में श्रीमद भागवत कथा के महत्त्व का वर्णन भक्तों को श्रवण कराया। महाराज श्री ने कहा कि एक भक्त को जिस तरह मैं और मेरा भगवान अधिक प्रिय लगता है। ठीक उसी तरह ही एक पत्नी को मैं और मेरा पति प्रिय लगता है। पुराने समय में जब किसी पत्नी का पति मर जाता था और तो वो भी अपने पति के साथ ही चिता में बैठ कर अपना शरीर त्याग देती थी। ऐसा ही एक प्रमाण तब देखने में आता है जब लक्ष्मण जी ने मेघनाथ जी का वध किया था। मेघनाथ की पत्नी सुलोचना जो शेषनाग की बेटी है और शेषनाग कौन है? वो तो लक्ष्मण जी है। सुलोचना ने अपने ससुर से कहा कि मुझे मेरे पति का सिर लाकर दो। तब रावण ने सुलोचना से कहा कि नहीं तुमको सती नहीं होना चाहिए और उसकी सास मंदोदरी भी सुलोचना से बोली कि नहीं तुम हमारी बेटी की तरह हो। तुमको पति के साथ सती नहीं होना चाहिए। लेकिन सुलोचना तो अपने वचन पर अडिग थी कि नहीं मुझे तो अपने पति के साथ ही सती होना है। सती होने के लिए मुझे मेरे पति का सिर चाहिए। लेकिन सिर तो राम के दल में था और वहां से सिर को लाएगा कौन? तब रावण ने सुलोचना से कहा कि मैं तो मेघनाथ का सिर मांगने नहीं जाऊंगा राम के दल में। तब सास मंदोदरी ने कहा कि अपने पति रावण की आज्ञा के बिना में भी नहीं जाउंगी। तब स्वयं सुलोचना ने राम के दल में जाने का फैसला किया वहां से मेघनाथ का सिर लाने के लिए। जब सबको पता चला कि मेघनाथ की पत्नी उसका सिर लेने के लिए आई है तो सब लोग वहां पर शांत खड़े हो गए। तब सुलोचना ने श्री राम से कहा कि मुझे मेरे पति का सिर चाहिए। तब श्री राम ने उनका सम्मान पूर्वक स्वागत किया और सम्मान पूर्वक ही मेघनाथ का सिर उनको सौप दिया। तब अपने पति का सिर लेकर सुलोचना जलती अग्नि में बैठकर अपने शरीर का त्याग कर देती है और अपने पति के साथ ही सती हो जाती है। हमारे शास्त्रों में ऐसा मानते है कि जो स्त्री अपने पति के साथ सती होती है तो वो हमेशा पति लोक में अपने पति के साथ ही वास करती है। फिर उसको इस धरती पर आने की जरुरत नहीं पड़ती है। पति व्रता पत्नी के सामने तो भगवान भी झुक जाते है। तब महाराज श्री ने करवा चौथ के बारे में भी बताया। महाराज श्री ने बताया कि स्त्रियां सोलह श्रृंगार कब करती है। अगर स्त्री टेंशन में होगी तो सोलह श्रृंगार नहीं कर सकती है। जब स्त्री खुश होगी तो ही वह सोलह श्रृंगार करती है। जब देवी खुश होगी तो ही हमारा घर स्वर्ग बन पाता है। इसीलिए तो कहते है कि जहाँ पर देवियों का सम्मान होता है वहां पर देवता वास करते है। सिर्फ सनातन धर्म ही ऐसा है जहां पर कन्याओं का पूजन होता है ,जहाँ पर देवियों का पूजन होता है। हमारे यहाँ पर कभी भी स्त्रियों का छोटा नहीं समझा गया है। हमारे यहां पर सदा से ही देवियों को पूजनीय समझा गया है। हमें ज्ञान चाहिए तो हमको सरस्वती देवी जी की पूजा करनी चाहिए। यदि हमें धन चाहिए तो हमको माता लक्ष्मी जी की पूजा करनी चाहिए। यदि हमको ताकत चाहिए तो हमको माता दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। सब की सब ताकत तो हमारी देवियों के पास ही है ,हमारे पास क्या है? हमारे पास तो कुछ भी नहीं है। उदाहरण के तौर पर शादी के बाद देवियों को कहा जाता है देवी। लेकिन शादी के बाद पुरुष को देवता कभी भी नहीं कहा जाता है। तो यही स्त्री के सम्मान का एक प्रतिक है। स्त्रियां इन्ही कारणों से सम्मान का भाव रखती है और करवाचौथ के दिन पति की लम्बी उम्र के लिए व्रत रखती है और करवाचौथ का व्रत कार्तिक मास में होता है और कार्तिक मास में किया हुआ कोई भी सत कर्म हमको कई गुणा फल देता है। कार्तिक मास इन बारह मासों में से सबसे पवित्र मास माना गया है। और इसीलिए कार्तिक मास में ही करवा चौथ का व्रत है। कार्तिक मास में एक प्रसंग का बहुत ही महत्व है गजेंद्र मोक्ष। हम सब को गजेंद्र मोक्ष अवश्य सुनना चाहिए। जो कार्तिक मास में गजेंद्र मोक्ष सुनते है उनको बहुत ही बड़ा फल मिलता है। आप को जानना चाहिए कि भगवान आपके कितने पास है, करीब है, ये सब हमको जानना चाहिए। हमारी बुद्धि तब बहुत ही छोटी होती है जब हम कहते है कि हम भगवान से बहुत ही दूर है। भगवान हमारी नहीं सुनता है। लेकिन ये गलत है कि जितनी जल्दी भगवान हमारी सुनता है और कोई हमारी नहीं सुनता है। जब हम कोई छोटी समस्या में फस जाते है तो हम और दूसरों को याद करते है। लेकिन जब हम किसी बड़ी समस्या में फस जाते है तो हम केवल और केवल भगवान को ही याद करते है। हम सब को पता होता है कि इस समस्या में केवल भगवान ही हमारी मदद कर सकते है। जब सबसे बड़ी समस्या हमारे जीवन में आती है तो तब हमको सिर्फ उस भगवान की ही याद आती है। ।। राधे राधे बोलना पड़ेगा ।।

अब आपको रोज नित्य सुबह प्रियकांत जू भगवान का संदेश मिलेगा आपके फोन पर।

आपकी हर सुबह सूहानी हो। आपका हर दिन शुभ हो।। अब आपको रोज नित्य सुबह प्रियकांत जू भगवान का संदेश मिलेगा आपके फोन पर। जिसे स्वयं पूज्य महाराज श्री भेजेंगे आपको पूज्य श्री महाराज का सन्देश प्राप्त करने के लिए आप ये नंबर सेव कर लिजिए और आपको सन्देश प्राप्त हो उसके लिए आप अपना नंबर, नाम, शहर का पता, ईमेल आईडी सहित भेज दीजिये।

श्री प्रियाकांतजू भगवान जी की संध्या आरती के लाइव दर्शन करें

जिनके दर्शन मात्र से हो जाता है सभी दुखों का नाश, मिट जाते है सभी कष्ट, ऐसे हैं भगवान श्री प्रियाकांतजू। अपने नेत्रों से हृदय में उतारें कष्ट हरने वाले श्री प्रियाकांतजू भगवान जी की संध्या आरती के लाइव दर्शन करें, आप सभी भक्त प्रियाकांतजू भगवान के दर्शन फेसबुक के पेज पर देख सकते है। यह आप आज से यानि 9.4.2016 से शाम को 7:30 बजे देख सकते है।

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