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PURNIMA MAHOTSAV - 28 JUNE 2018 - VRINDAVAN

Program Shedule

पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 03 जून से 10 जून तक प्रतिदिन राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय का खेल मैदान, खाटूश्याम जी में 108 श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। सप्तम दिवस पर महाराज श्री ने श्री कृष्ण- रूक्मिणी विवाह का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया।

भागवत कथा के सप्तम दिवस की शुरुआत भागवत आरती और विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ की गई।


आज पूज्य देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के द्वारा विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय के स्कूल बच्चों की पढ़ाई में आ रही रूकावट को दूर करने के लिए 1,21,000 रूपए की राशि का चेक भेंट किया गया ताकि बच्चों के उज्जवल भविष्य की राह में आ रही रूकावट को दूर किया जा सके।
कथा के मध्य में नवीन दशहरा समिति खाटू श्याम जी द्वारा पूज्य देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज को भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासो को देखते हुए “भारतीय संस्कृति गौरव सम्मान की उपाधी से अलंकृत किया गया। यह सम्मान समिति के अध्यक्ष पप्पू शर्मा खाटू वाले के द्वारा दिया गया। इस मौके पर संरक्षक सुरेश तिवाड़ी, प्रताप सिंह चौहान, लक्ष्मीनारायण सैन, समिति मंत्री गोवर्धन सैन, कोषाध्यक्ष दीनदयाल शर्मा उपस्थित रहे। 


पूज्य देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कथा की शुरुआत करते हुए कहा कि मॉर्डन एज्यूकेशन जो आजकल हमारे बच्चे स्कूलों में पढ़ाई जा रही है, ध्यान दें की वहां से बच्चे सीख कर क्या आ रहे हैं ? पहले यह बात प्रच्चलित थी की तुम्हारी कलम में वो ताकत है कि बड़े से बड़े विवाद को, आतंकवाद को समाप्त कर सकती है। पहले व्यक्ति शस्त्र नहीं, शास्त्र उठाते थे। कलम से बिना गोली चलाए समाज का कितना बडा कल्याण कर सकते हैं। पहले हमारे गुरूजन पैसा कमाने वाला इंसान नहीं बनाते थे, वो एक सच्चा मानव बनाते थे और वो मानव ऐसा होता ना सिर्फ घर का पालन करता था, ना सिर्फ अपने समाज की देखभाल करता था बल्कि देश और धर्म पर कुर्बान होने के लिए एक समय भी सोचता नहीं था। लेकिन आज आतंकवाद को समाप्त करने में नहीं आतंकवाद को बढ़ाने में शिक्षा काम कर रही है। आजकल होने वाली ज्यादातर आतंकी घटनाओं में पढ़े लिखे लोग ही शामिल है। हम बड़े बड़े स्कूल कॉलेजों में अपने बच्चों को इंसान बनने के लिए भेजते हैं और वही उच्च शिक्षा हमारे बच्चों को आतंकवादी बना कर लौटाती है। दूसरे धर्म के गुरू शिक्षा देते है की जेहादी बनो क्या ये शिक्षा है ? बड़े बड़े डॉक्टर, इंजिनियर, पढ़े लिखे बच्चे आतंकवादी बन रहे हैं। गलती वहां नहीं है, दरअसल शिक्षा इसका मूल आधार है। मूल आधार ऐसे है कि बच्चा मन लगा कर नहीं पढ़ता है मां बाप कहते हैं कि पढ़ोगे नहीं तो नौकरी नहीं मिलेगी, नौकरी नहीं मिलेगी तो पैसा नहीं मिलेगा और पैसा नहीं तो कौन पूछेगा। बचपन से ही हमारे बच्चों के दिमाग में पैसा बूरी तक डाल दिया जाता है। इंटरनेट की माध्यम से बडे बड़े ऑफर दिए जाते हैं, तुम यह काम कर दो तुमहे भरपूर पैसा मिलेगा, तुम मर भी गए तो तुम्हारे घर वाले चैन से आनंद लेंगे। इस आतंकवाद को रोका जा सकता है, युवाओं को उचित संस्कार देकर, अगर संस्कार होंगे तो व्यक्ति को सही गलत का बोध होगा। अपने बच्चो को संस्कार दिजिए, उन्हे सही गलत का ज्ञान दिजिए उनसे सिर्फ पैसा बनाने की मशीन मत बनाइए वरना हाथ मलते रह जाओगे।


महाराज श्री ने कहा कि अपने मन में गुरू और गोविंद के लिए कभी गांठ मत रखना। गुरू और गोविंद में कोई अंतर नहीं है। गुरू गोविंद के प्रति जब आपकी गांठ नहीं होगी तो गोविंद से मिलने के लिए आप तैयार हो जाओगे। उन्होंने कहा कि मौन भी एक साधना है इसलिए बिना वजह कभी बोलना नहीं चाहिए, जहां जरूरत हो वही बोलो।
महाराज श्री ने कहा कि महंगे कपड़े पहनने से कोई बड़ा नहीं होता जिसके विचार महान होते हैं वही बड़ा होता है। 


पूज्य देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज जी ने कथा का वृतांत सुनाते हुए कहा कि बिना साधना के भगवान का सानिध्य नहीं मिलता। द्वापर युग में गोपियों को भगवान श्री कृष्ण का सानिध्य इसलिए मिला, क्योंकि वे त्रेता युग में ऋषि - मुनि के जन्म में भगवान के सानिध्य की इच्छा को लेकर कठोर साधना की थी। शुद्ध भाव से की गई परमात्मा की भक्ति सभी सिद्धियों को देने वाली है। जितना समय हम इस दुनिया को देते हैं, उसका 5% भी यदि भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लगाएं तो भगवान की कृपा निश्चित मिलेगी। पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कहा कि गोपियों ने श्री कृष्ण को पाने के लिए त्याग किया परंतु हम चाहते हैं कि हमें भगवान बिना कुछ किये ही मिल जाये, जो की असम्भव है। महाराज श्री ने बताया कि शुकदेव जी महाराज परीक्षित से कहते हैं राजन जो इस कथा को सुनता हैं उसे भगवान के रसमय स्वरूप का दर्शन होता हैं। उसके अंदर से काम हटकर श्याम के प्रति प्रेम जाग्रत होता हैं। जब भगवान प्रकट हुए तो गोपियों ने भगवान से 3 प्रकार के प्राणियों के विषय में पूछा। 1 . एक व्यक्ति वो हैं जो प्रेम करने वाले से प्रेम करता हैं। 2 . दूसरा व्यक्ति वो हैं जो सबसे प्रेम करता हैं चाहे उससे कोई करे या न करे। 3 . तीसरे प्रकार का प्राणी प्रेम करने वाले से कोई सम्बन्ध नही रखता और न करने वाले से तो कोई संबंध हैं ही नही। आप इन तीनो में कोनसे व्यक्ति की श्रेणियों में आते हो? भगवान ने कहा की गोपियों! जो प्रेम करने वाले के लिए प्रेम करता हैं वहां प्रेम नही हैं वहां स्वार्थ झलकता हैं। केवल व्यापर हैं वहां। आपने किसी को प्रेम किया और आपने उसे प्रेम किया। ये बस स्वार्थ हैं। दूसरे प्रकार के प्राणियों के बारे में आपने पूछा वो हैं माता-पिता, गुरुजन। संतान भले ही अपने माता-पिता के , गुरुदेव के प्रति प्रेम हो या न हो। लेकिन माता-पिता और गुरु के मन में पुत्र के प्रति हमेशा कल्याण की भावना बनी रहती हैं। लेकिन तीसरे प्रकार के व्यक्ति के बारे में आपने कहा की ये किसी से प्रेम नही करते तो इनके 4 लक्षण होते हैं- आत्माराम- जो बस अपनी आत्मा में ही रमन करता हैं। पूर्ण काम- संसार के सब भोग पड़े हैं लेकिन तृप्त हैं। किसी तरह की कोई इच्छा नहीं हैं। कृतघ्न – जो किसी के उपकार को नहीं मानता हैं। गुरुद्रोही- जो उपकार करने वाले को अपना शत्रु समझता हैं। श्री कृष्ण कहते हैं की गोपियों इनमे से मैं कोई भी नही हूँ। मैं तो तुम्हारे जन्म जन्म का ऋणियां हूँ। सबके कर्जे को मैं उतार सकता हूँ पर तुम्हारे प्रेम के कर्जे को नहीं। तुम प्रेम की ध्वजा हो। संसार में जब-जब प्रेम की गाथा गाई जाएगी वहां पर तुम्हे अवश्य याद किया जायेगा।

।। राधे-राधे बोलना पड़ेगा ।।

अब आपको रोज नित्य सुबह प्रियकांत जू भगवान का संदेश मिलेगा आपके फोन पर।

आपकी हर सुबह सूहानी हो। आपका हर दिन शुभ हो।। अब आपको रोज नित्य सुबह प्रियकांत जू भगवान का संदेश मिलेगा आपके फोन पर। जिसे स्वयं पूज्य महाराज श्री भेजेंगे आपको पूज्य श्री महाराज का सन्देश प्राप्त करने के लिए आप ये नंबर सेव कर लिजिए और आपको सन्देश प्राप्त हो उसके लिए आप अपना नंबर, नाम, शहर का पता, ईमेल आईडी सहित भेज दीजिये।

श्री प्रियाकांतजू भगवान जी की संध्या आरती के लाइव दर्शन करें

जिनके दर्शन मात्र से हो जाता है सभी दुखों का नाश, मिट जाते है सभी कष्ट, ऐसे हैं भगवान श्री प्रियाकांतजू। अपने नेत्रों से हृदय में उतारें कष्ट हरने वाले श्री प्रियाकांतजू भगवान जी की संध्या आरती के लाइव दर्शन करें, आप सभी भक्त प्रियाकांतजू भगवान के दर्शन फेसबुक के पेज पर देख सकते है। यह आप आज से यानि 9.4.2016 से शाम को 7:30 बजे देख सकते है।

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