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पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 03 जून से 10 जून तक प्रतिदिन राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय का खेल मैदान, हॉस्पिटल चौराहा के पास, खाटूश्याम जी में 108 श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के द्वितीय दिवस पर महाराज श्री ने भागवत कथा में अमर कथा एवं शुकदेव जी के जन्म का वृतांत विस्तार से वर्णन किया। भागवत कथा के द्वितीय दिवस की शुरुआत, भागवत आरती और विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ की गई।

पूज्य देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कथा की शुरुआत में कल्चर टेरेरिजम पर बात की उन्होंने कहा कि हमारी जो संस्कृत भाषा है यह संस्कृति को बनाती है, संस्कृत कोई साधारण भाषा नहीं है। संसार में जितनी भी भाषाएं है वो किसी ना किसी के द्वारा बनाई गई है लेकिन संस्कृत भाषा देव भाषा है। संस्कृत भाषा जोड़ना सिखाती है, संस्कृत भाषा पढ़ने वाले बच्चे तीव्र बुद्धि के होते हैं, उनमे हर एक भाषा समझने की शक्ति होती है। यह दुर्भाग्य का विषय ही है कि आज संस्कृत की बात करने वालों की बाते अनसुनी की जाती हैं और सिर्फ अंग्रेजी पढ़े लिखे बच्चों को भी बुद्धिमान समझा जाता है। लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा की बाहरी देशों में संस्कृत भाषा की विशेषता को समझते हुए उन्होंने पाठय क्रम में बच्चों को संस्कृत अनिवार्य कर दिया। एक ओर बात सुनकर आपको आश्चर्य होगा की 7वीं जेनरेशन का जो महाकंप्यूटर बन रहा है उसका बेस ही संस्कृत में रखा जा रहा है। दुर्भाग्य यह है कि हम अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं, आजकल तो संस्कृत को मरी हुई भाषा कहा जाता है। लेकिन याद रखिए संस्कृत कभी मर नहीं सकती जब तक यह धरती रहेगी संस्कृत रहेगी। संस्कृत पढ़ने वाले बच्चे संस्कारी होते हैं, घर परिवार को जोड़ने वाले होते हैं। 


महाराज जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा वो है जिस भागवत को लिखने के बाद वेद व्यास जी महाराज को कुछ और लिखने की आवश्यकता ही नहीं पड़ी इसलिए भागवत को कहा गया है सर्व वेदांत सारिणी यानि यह सभी वेदों का सार है। 


महाराज जी ने कहा कि भगवान ज्ञान सिद्ध नहीं है, भगवान वैराग्य से मिलेंगे गारंटी नहीं है, ज्ञान से मिलेंगे गारंटी नहीं है, लेकिन प्रेम से मिलेग इस बात की पूरी गारंटी है। 
महाराज जी ने आगे कहा कि जो देवताओं के लिए दुर्लभ है वो आप लोगों के लिए सुलभ है। आप लोग जो भी सतकर्म करते हैं उससे सुख की प्राप्ति तो हो सकती है लेकिन भागवत की प्राप्ति नहीं हो सकती। 100 अश्वमेघ यज्ञ करने से इंद्र तो बन जाओगे, स्वर्ग की प्राप्ति कर लोगे लेकिन भागवत मिल जाएगी यह संभव नहीं है। 


महाराज जी ने कहा कि जैसे ही मनुष्य भागवत सुनने का संकल्प लेता है उसी वक्त प्रभु उसके ह्रदय में विराजमान हो जाते हैं, ऐसी है भागवत की महिमा। अमृत अमर कर सकता है लेकिन निर्भय नहीं कर सकता, जो अमृत नहीं कर सकता वो भागवत आपको एक बार ही कथा सुनने से कर देती है। लेकिन यह उसके लिए ही संभव है जो सच्चे मन से कथा सुने। 


देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कथा का वृतांत सुनाते हुए कहा की श्रीकृष्ण दुखी है की इस कलयुग के व्यक्ति का कल्याण कैसे हो ? राधारानी ने पूछा क्या आपने इनके लिए कुछ सोचा है। प्रभु बोले एक उपाय है हमारे वहां से कोई जाए और हमारी कथाओं का गायन कराए और जब ये सुनेंगे तो इनका कल्याण निश्चित हो जाएगा। बात आई की कौन जाएगा, तो बोले की शुक जी जा सकते हैं, शुक को कहा गया वो जाने के लिए तैयार हो गए। श्री शुक भगवान की कथाओंका गायन करने के लिए जा रहे हैं तो मार्ग में कैलाश पर्वत पड़ा, कैलाश में भगवान शिव माता पार्वती के साथ विराजमान हैं। 
भागवत वही अमर कथा है जो भगवान शिव ने माता पार्वती को सुनाई थी। कथा सुनना भी सबके भाग्य में नहीं होता जब भगवान् भोलेनाथ से माता पार्वती ने उनसे अमर कथा सुनाने की प्रार्थना की तो बाबा भोलेनाथ ने कहा की जाओ पहले यह देखकर आओ की कैलाश पर तुम्हारे या मेरे अलावा और कोई तो नहीं है क्योकि यह कथा सबको नसीब में नहीं है। माता ने पूरा कैलाश देख आई पर शुक के अपरिपक्व अंडो पर उनकी नज़र नहीं पड़ी। भगवान शंकर जी ने पार्वती जी को जो अमर कथा सुनाई वह भागवत कथा ही थी। लेकिन मध्य में पार्वती जी को निद्रा आ गई और वो कथा शुक ने पूरी सुन ली। यह भी पूर्व जन्मों के पाप का प्रभाव होता है कि कथा बीच में छूट जाती है। भगवान की कथा मन से नहीं सुनने के कारण ही जीवन में पूरी तरह से धार्मिकता नहीं आ पाती है। जीवन में श्याम नहीं तो आराम नहीं। भगवान को अपना परिवार मानकर उनकी लीलाओं में रमना चाहिए। गोविंद के गीत गाए बिना शांति नहीं मिलेगी। धर्म, संत, मां-बाप और गुरु की सेवा करो। जितना भजन करोगे उतनी ही शांति मिलेगी। संतों का सानिध्य हृदय में भगवान को बसा देता है। क्योंकि कथाएं सुनने से चित्त पिघल जाता है और पिघला चित ही भगवान को बसा सकता है।


श्री शुक जी की कथा सुनाते पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने बताया कि श्री शुक जी द्वारा चुपके से अमर कथा सुन लेने के कारण जब शंकर जी ने उन्हें मारने के लिए दौड़ाया तो वह एक ब्राह्मणी के गर्भ में छुप गए। कई वर्षों बाद व्यास जी के निवेदन पर भगवान शंकर जी इस पुत्र के ज्ञानवान होने का वरदान दे कर चले गए। व्यास जी ने जब श्री शुक को बाहर आने के लिए कहा तो उन्होंने कहा कि जब तक मुझे माया से सदा मुक्त होने का आश्वासन नहीं मिलेगा। मैं नहीं आऊंगा। तब भगवान नारायण को स्वयं आकर ये कहना पड़ा की श्री शुक आप आओ आपको मेरी माया कभी नहीं लगेगी ,उन्हें आश्वासन मिला तभी वह बाहर आए।


यानि की माया का बंधन उनको नहीं चाहिए था। पर आज का मानव तो केवल माया का बंधन ही चारो ओर बांधता फिरता है। और बार बार इस माया के चक्कर में इस धरती पर अलग अलग योनियों में जन्म लेता है। तो जब आपके पास भागवत कथा जैसा सरल माध्यम दिया है जो आपको इस जनम मरण के चक्कर से मुक्त कर देगा और नारायण के धाम में सदा के लिए आपको स्थान मिलेगा।

।। राधे-राधे बोलना पड़ेगा ।।

अब आपको रोज नित्य सुबह प्रियकांत जू भगवान का संदेश मिलेगा आपके फोन पर।

आपकी हर सुबह सूहानी हो। आपका हर दिन शुभ हो।। अब आपको रोज नित्य सुबह प्रियकांत जू भगवान का संदेश मिलेगा आपके फोन पर। जिसे स्वयं पूज्य महाराज श्री भेजेंगे आपको पूज्य श्री महाराज का सन्देश प्राप्त करने के लिए आप ये नंबर सेव कर लिजिए और आपको सन्देश प्राप्त हो उसके लिए आप अपना नंबर, नाम, शहर का पता, ईमेल आईडी सहित भेज दीजिये।

श्री प्रियाकांतजू भगवान जी की संध्या आरती के लाइव दर्शन करें

जिनके दर्शन मात्र से हो जाता है सभी दुखों का नाश, मिट जाते है सभी कष्ट, ऐसे हैं भगवान श्री प्रियाकांतजू। अपने नेत्रों से हृदय में उतारें कष्ट हरने वाले श्री प्रियाकांतजू भगवान जी की संध्या आरती के लाइव दर्शन करें, आप सभी भक्त प्रियाकांतजू भगवान के दर्शन फेसबुक के पेज पर देख सकते है। यह आप आज से यानि 9.4.2016 से शाम को 7:30 बजे देख सकते है।

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