Program Shedule

पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 30 मार्च से 5 अप्रैल 2018 तक Sri Mandir Cumberland Road, Auburn, NSW, Sydney (Australia) में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस पर महाराज श्री ने पुतना उद्धार एवं श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया।

श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस की शुरूआत भागवत आरती और विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ की गई।

धर्मरत्न शांतिदूत पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कथा की शुरुआत करते हुए कहा कि संसार में बहुत से चीजे दुर्लभ होती हैं लेकिन जब भगवान कृपा करता है तो छप्पर फाड़ कर करता है। उन्होंने कहा की पुत्र का होना, धन का होना, गाड़ी का होना, घर का होना बड़ी बात नहीं है। बड़ी बात है संत का समागम, संत का मिलना, संत के दर्शन और संत मिलेंगे तो हरि चर्चा होगी। संत का मिलना दुर्लभ है लेकिन अगर संत मिल जाए और हरि कथा मिल जाए तो समझ लेना भगवान ने अपने कृपा के द्वार तुम्हारे लिए खोल दिए हैं।

महाराज श्री ने कहा कि जब भी कोई भक्ति के मार्ग पर चलता है तो उसे कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ता है और इसका सामना उन्हीं को करना पड़ता है जो अच्छी राह पर चलते हैं। महाराज श्री ने एक वाक्या सुनाते हुए कहा कि एक बार ब्रह्मा जी ने भगवान से पूछा कि हे प्रभु जो आपके भजन करता है आपकी उसकी ही परीक्षा क्यों लेते हो ? भगवान ने बहुत अच्छा जवाब देते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति भक्ति करता है उसमें अहंकार होता है। उसमें अहंकार इस प्रकार से होने लगता है कि वो व्यक्ति कहने लग जाता है कि मैं भजन बहुत करता हूं, मैं कथा बहुत सुनता हूं, ये मंदिर मैं ही चला रहा हूं दूसरा कोई चला ही नहीं सकता, ये जो अंहकार रूपी कैंसर हैं इसकी वजह से जीव परमात्मा से दूर होता चला जाता है। लेकिन भगवान को जिसके ऊपर विशेष कृपा होने लगती है उसका इलाज करते है। प्रभु कहते हैं कि जिस वस्तु पर व्यक्ति अहंकार करता है मैं उसकी वस्तु को धीरे धीरे छीन लेता हूं।

देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कथा का वृतांत सुनाते हुए कहा कि भगवान नारायण वासुदेव और देवकी के घर में प्रकट हुए और वहां से गोकुल पहुंचे मईयां यशोदा के घर। 85 वर्ष की उम्र में बाबा के घर में लल्ला हुआ तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। पूरा ब्रज मंडल में गीत गूंज उठे नंद के आनन्द भयो, जय कन्हैया लाल की। मेरे कन्हैया को दिखावा नहीं पसंद जैसे हो वैसे ही उसके सामने जाओ वो तुमको अपना लेगा। जब पूतना भगवान के जन्म के ६ दिन बाद प्रभु को मारने के लिए अपने स्तनों पर कालकूट विष लगा कर आई तो मेरे कन्हैया ने अपनी आँखे बंद कर ली, क्यूंकि पुतना कंस द्वारा भेजी गई एक राक्षसी थी और श्रीकृष्ण को स्तनपान के जरिए विष देकर मार देना चाहती थी। पुतना कृष्ण को विषपान कराने के लिए एक सुंदर स्त्री का रूप धारण कर वृंदावन में पहुंची थी। मौका पाकर पुतना ने बालकृष्ण को उठा लिया और स्तनपान कराने लगी। श्रीकृष्ण ने स्तनपान करते-करते ही पुतनाका वध कर उसका कल्याण किया।
महाराज जी ने एक कृष्ण को चाहने वाले व्यक्ति की कहानी सुनाते हुए बताया की किसी ने श्री कृष्ण से पूछा की हे कृष्ण तुम्हारा नाम टेढ़ा, खड़े होने का स्टाइल टेढ़ा, हमेशा झूट बोलता है उसके सारे काम टेढ़े क्या अच्छा है तुममे, तब श्री कृष्ण मुस्कुराते हुए उस व्यक्ति को एक खूंटी का उदहारण देते हुए कहाँ की ये लो इस सीधी खूंटी पर ये वस्त्र टांगो तो वह व्यक्ति जब वस्त्र टांगने गया तो वो वस्त्र गिर गए फिर श्री कृष्ण ने उस व्यक्ति को टेढी खूंटी पर वस्त्र टांगने के लिए दिए तो वस्त्र आसानी से टंग गए। तब श्री कृष्ण ने मुस्कुरात हुए उस व्यक्ति को उनकी बात का जवाब देते हुए कहते है की जब श्री राम जी त्रेता युग में आये थे तब लोग एक दम सीधे हुआ करते थे और आसानी से मान जाया करते थे। लेकिन में द्वापर युग के अंत में कलयुग के कल्याण के लिए आया हूँ और इनको तारने के लिए सीधा बनने से काम नहीं चलेगा इनको भवसागर से पार करने के लिए मुझे टेड़ा बनना पड़ेगा।


अत: श्रीकृष्ण ने क्षमारूप पृथ्वी अंश धारण किया। भगवान व्रजरज का सेवन करके यह दिखला रहे हैं कि जिन भक्तों ने मुझे अपनी सारी भावनाएं व कर्म समर्पित कर रखें हैं वे मेरे कितने प्रिय हैं। भगवान स्वयं अपने भक्तों की चरणरज मुख के द्वारा हृदय में धारण करते हैं। पृथ्वी ने गाय का रूप धारण करके श्रीकृष्ण को पुकारा तब श्रीकृष्ण पृथ्वी पर आये हैं। इसलिए वह मिट्टी में नहाते, खेलते और खाते हैं ताकि पृथ्वी का उद्धार कर सकें। अत: उसका कुछ अंश द्विजों (दांतों) को दान कर दिया। गोपबालकों ने जाकर यशोदामाता से शिकायत कर दी–’मां ! कन्हैया ने माटी खायी है।’ उन भोले-भाले ग्वालबालों को यह नहीं मालूम था कि पृथ्वी ने जब गाय का रूप धारणकर भगवान को पुकारा तब भगवान पृथ्वी के घर आये हैं। पृथ्वी माटी,मिट्टी के रूप में है अत: जिसके घर आये हैं उसकी वस्तु तो खानी ही पड़ेगी। इसलिए यदि श्रीकृष्ण ने माटी खाली तो क्या हुआ? ‘बालक माटी खायेगा तो रोगी हो जायेगा’ ऐसा सोचकर यशोदामाता हाथ में छड़ी लेकर दौड़ी आयीं। उन्होंने कान्हा का हाथ पकड़कर डाँटते हुये कहा–‘क्यों रे नटखट ! तू अब बहुत ढीठ हो गया है।


श्रीकृष्ण ने कहा–‘मैया ! मैंने माटी कहां खायी है।’ यशोदामैया ने कहा कि अकेले में खायी है। श्रीकृष्ण ने कहा कि अकेले में खायी है तो किसने देखा? 
यशोदामैया ने कहा–ग्वालों ने देखा। श्रीकृष्ण ने मैया से कहा–’तू इनको बड़ा सत्यवादी मानती है तो मेरा मुंह तुम्हारे सामने है। तुझे विश्वास न हो तो मेरा मुख देख ले।’‘अच्छा खोल मुख।’ माता के ऐसा कहने पर श्रीकृष्ण ने अपना मुख खोल दिया। भगवान के साथ ऐश्वर्यशक्ति सदा रहती है। उसने सोचा कि यदि हमारे स्वामी के मुंह में माटी निकल आयी तो यशोदामैया उनको मारेंगी और यदि माटी नहीं निकली तो दाऊ दादा पीटेंगे। इसलिए ऐसी कोई माया प्रकट करनी चाहिए जिससे माता व दाऊ दादा दोनों इधर-उधर हों जाएं और मैं अपने स्वामी को बीच के रास्ते से निकाल ले जाऊं। श्रीकृष्ण के मुख खोलते ही यशोदाजी ने देखा कि मुख में चर-अचर सम्पूर्ण जगत विद्यमान है। आकाश, दिशाएं, पहाड़, द्वीप,समुद्रों के सहित सारी पृथ्वी, बहने वाली वायु, वैद्युत, अग्नि, चन्द्रमा और तारों के साथ सम्पूर्ण ज्योतिर्मण्डल, जल, तेज अर्थात्प्रकृति, महतत्त्व, अहंकार, देवगण, इन्द्रियां, मन, बुद्धि, त्रिगुण, जीव, काल, कर्म, प्रारब्ध आदि तत्त्व भी मूर्त दीखने लगे। पूरा त्रिभुवन है, उसमें जम्बूद्वीप है, उसमें भारतवर्ष है, और उसमें यह ब्रज, ब्रज में नन्दबाबा का घर, घर में भी यशोदा और वह भी श्रीकृष्ण का हाथ पकड़े। बड़ा विस्मय हुआ माता को अब श्रीकृष्ण ने देखा कि मैया ने तो मेरा असली तत्व ही पहचान लिया है।
।। राधे राधे बोलना पड़ेगा ।।

अब आपको रोज नित्य सुबह प्रियकांत जू भगवान का संदेश मिलेगा आपके फोन पर।

आपकी हर सुबह सूहानी हो। आपका हर दिन शुभ हो।। अब आपको रोज नित्य सुबह प्रियकांत जू भगवान का संदेश मिलेगा आपके फोन पर। जिसे स्वयं पूज्य महाराज श्री भेजेंगे आपको पूज्य श्री महाराज का सन्देश प्राप्त करने के लिए आप ये नंबर सेव कर लिजिए और आपको सन्देश प्राप्त हो उसके लिए आप अपना नंबर, नाम, शहर का पता, ईमेल आईडी सहित भेज दीजिये।

श्री प्रियाकांतजू भगवान जी की संध्या आरती के लाइव दर्शन करें

जिनके दर्शन मात्र से हो जाता है सभी दुखों का नाश, मिट जाते है सभी कष्ट, ऐसे हैं भगवान श्री प्रियाकांतजू। अपने नेत्रों से हृदय में उतारें कष्ट हरने वाले श्री प्रियाकांतजू भगवान जी की संध्या आरती के लाइव दर्शन करें, आप सभी भक्त प्रियाकांतजू भगवान के दर्शन फेसबुक के पेज पर देख सकते है। यह आप आज से यानि 9.4.2016 से शाम को 7:30 बजे देख सकते है।

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