Program Shedule

पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में 06 फरवरी से 12 फरवरी 2018 तक ऊना (हिमाचल) में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के षष्ठम दिवस पर महाराज श्री ने भगवान श्री कृष्ण के जन्म की लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया।

आज कथा में हिमाचल प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री जय राम ठाकुर जी एवं हमीरपुर से माननीय सांसद श्री अनुराग ठाकुर जी ने भी कथा का रसपान किया और पूज्य महाराज श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया।

महाराज श्री ने कथा की शुरुआत करते हुए कहा कि जो लोग श्री कृष्ण को प्राप्त करना चाहते हैं उन्हें एकादशी का व्रत रखना चाहिए, बहुत से लोग हैं जो भ्रांतिया पैदा करते हैं कि इनको करना चाहिए और इनको नहीं करना चाहिए अरे जो होना हैं वो होगा ही उसको कोई नहीं रोक सकता, व्रत करो व्रत करने से ठाकुर जी की प्राप्ति होगी ही होगी।

हम ये नहीं छोड़ सकते हम वो नहीं सकते हमें मोह माया ही छोड़ देना चाहिए बस भगवान को प्राप्त करना चाहिए, अगर प्रभु को प्राप्त करना हैं तो छोटी छोटी चीजों में मोह मत करो , हम ये नहीं छोड़ सकते कहते हैं ठाकुर जी ने कहा की जब एक कन्या का विवाह होता हैं तो वह सब कुछ छोड़कर आती हैं यभी हाँ तक की अपनी पहचान अपना सर नाम भी छोड़ कर जाती हैं किसके लिए उस इंसान के लिए जो पीकर तुम्हारा नहीं रहता उस हाड मॉस के इंसान के लिए सब छोड़ देते हो और जो दया का सागर हैं दया का भंडार हैं उसके लिए छोटी छोटी चीजे नहीं छोड़ सकते, एक दिन भोजन नहीं छोड़ सकते, लहसुन प्याज नहीं छोड़ सकते ,और जो लोग लहसुन प्याज भी नहीं छोड़ सकते और भगवान को प्राप्त करने की बात करते हैं तो मजाक नहीं हैं तो क्या हैं पति को पाने के लिए सब छोड़ दिया और प्रभु को पाने के लिए कुछ नहीं छोड़ सकते याद रखो कुछ बड़ा पाने के लिए बड़ा त्याग करना पड़ता हैं जीभ को अगर स्वाद देना हैं तो कृष्ण नाम का स्वाद दीजिये।

महाराज श्री ने कथा का वृतांत बताते हुए बिना साधना के भगवान का सानिध्य नहीं मिलता। द्वापर युग में गोपियों को भगवान श्री कृष्ण का सानिध्य इसलिए मिला, क्योंकि वे त्रेता युग में ऋषि - मुनि के जन्म में भगवान के सानिध्य की इच्छा को लेकर कठोर साधना की थी। शुद्ध भाव से की गई परमात्मा की भक्ति सभी सिद्धियों को देने वाली है। जितना समय हम इस दुनिया को देते हैं, उसका 5% भी यदि भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लगाएं तो भगवान की कृपा निश्चित मिलेगी। पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कहा कि गोपियों ने श्री कृष्ण को पाने के लिए त्याग किया परंतु हम चाहते हैं कि हमें भगवान बिना कुछ किये ही मिल जाये, जो की असम्भव है। महाराज श्री ने बताया कि शुकदेव जी महाराज परीक्षित से कहते हैं राजन जो इस कथा को सुनता हैं उसे भगवान के रसमय स्वरूप का दर्शन होता हैं। उसके अंदर से काम हटकर श्याम के प्रति प्रेम जाग्रत होता हैं। जब भगवान प्रकट हुए तो गोपियों ने भगवान से 3 प्रकार के प्राणियों के विषय में पूछा। 1 . एक व्यक्ति वो हैं जो प्रेम करने वाले से प्रेम करता हैं। 2 . दूसरा व्यक्ति वो हैं जो सबसे प्रेम करता हैं चाहे उससे कोई करे या न करे। 3 . तीसरे प्रकार का प्राणी प्रेम करने वाले से कोई सम्बन्ध नही रखता और न करने वाले से तो कोई संबंध हैं ही नही। आप इन तीनो में कोनसे व्यक्ति की श्रेणियों में आते हो? भगवान ने कहा की गोपियों! जो प्रेम करने वाले के लिए प्रेम करता हैं वहां प्रेम नही हैं वहां स्वार्थ झलकता हैं। केवल व्यापर हैं वहां। आपने किसी को प्रेम किया और आपने उसे प्रेम किया। ये बस स्वार्थ हैं। दूसरे प्रकार के प्राणियों के बारे में आपने पूछा वो हैं माता-पिता, गुरुजन। संतान भले ही अपने माता-पिता के , गुरुदेव के प्रति प्रेम हो या न हो। लेकिन माता-पिता और गुरु के मन में पुत्र के प्रति हमेशा कल्याण की भावना बनी रहती हैं। लेकिन तीसरे प्रकार के व्यक्ति के बारे में आपने कहा की ये किसी से प्रेम नही करते तो इनके 4 लक्षण होते हैं- आत्माराम- जो बस अपनी आत्मा में ही रमन करता हैं। पूर्ण काम- संसार के सब भोग पड़े हैं लेकिन तृप्त हैं। किसी तरह की कोई इच्छा नहीं हैं। कृतघ्न – जो किसी के उपकार को नहीं मानता हैं। गुरुद्रोही- जो उपकार करने वाले को अपना शत्रु समझता हैं। श्री कृष्ण कहते हैं की गोपियों इनमे से मैं कोई भी नही हूँ। मैं तो तुम्हारे जन्म जन्म का ऋणियां हूँ। सबके कर्जे को मैं उतार सकता हूँ पर तुम्हारे प्रेम के कर्जे को नहीं। तुम प्रेम की ध्वजा हो। संसार में जब-जब प्रेम की गाथा गाई जाएगी वहां पर तुम्हे अवश्य याद किया जायेगा।

।। राधे राधे बोलना पड़ेगा।।

अब आपको रोज नित्य सुबह प्रियकांत जू भगवान का संदेश मिलेगा आपके फोन पर।

आपकी हर सुबह सूहानी हो। आपका हर दिन शुभ हो।। अब आपको रोज नित्य सुबह प्रियकांत जू भगवान का संदेश मिलेगा आपके फोन पर। जिसे स्वयं पूज्य महाराज श्री भेजेंगे आपको पूज्य श्री महाराज का सन्देश प्राप्त करने के लिए आप ये नंबर सेव कर लिजिए और आपको सन्देश प्राप्त हो उसके लिए आप अपना नंबर, नाम, शहर का पता, ईमेल आईडी सहित भेज दीजिये।

श्री प्रियाकांतजू भगवान जी की संध्या आरती के लाइव दर्शन करें

जिनके दर्शन मात्र से हो जाता है सभी दुखों का नाश, मिट जाते है सभी कष्ट, ऐसे हैं भगवान श्री प्रियाकांतजू। अपने नेत्रों से हृदय में उतारें कष्ट हरने वाले श्री प्रियाकांतजू भगवान जी की संध्या आरती के लाइव दर्शन करें, आप सभी भक्त प्रियाकांतजू भगवान के दर्शन फेसबुक के पेज पर देख सकते है। यह आप आज से यानि 9.4.2016 से शाम को 7:30 बजे देख सकते है।

view more
Priyakant Ju Mandir - Shanti Sewa Dham (Vrindavan)
  • Address:

    Chhatikara Vrindavan Road, Near Vaishno Devi Mandir, Shri dham Vrindavan, U.P.-281121

  • Phone : +91 9212 210 143
  • Email:info@vssct.com
Vishwa Shanti Sewa Charitable Trust (Delhi)
  • Address:

    C-5/90 Sector- 6, Rohini, New Delhi - 110085

  • Phone : (011) 47564008
  • Email: info@vssct.com

Subscribe Our Newsletter