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12Aug 2017

"भगवान की भक्ति कहीं भी की जा सकती है उसके लिए इधर-उधर भटकने की ज़रूरत नहीं है।"

जन्माष्टमी के पावन अवसर पर श्री कृष्ण की जन्मभूमि से परम पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने अपने मुखारविंद से चतुर्थ दिवस की श्रीमद्भागवत कथा का रसपान भक्तों को कराया। महाराज श्री ने कहा कि इस बार हम जन्माष्टमी महा महोत्सव 15 अगस्त को मना रहे है। इतना ही नहीं देश को आजाद हुए भी 70 साल पुरे हो जाएंगे। तो यह मात्र जन्माष्टमी महोत्सव नहीं है बल्कि देश की आजादी का भी पर्व है। इस बार स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर श्री कृष्ण भगवान हमे कोई न कोई तो सन्देश देना चाहते होंगे तभी तो स्वतंत्रता दिवस पर जन्माष्टमी का पर्व आया है। महाराज श्री ने कहा कि हमें सदा ही अपने माता पिता का हर जगह पर सम्मान करना चाहिए। तभी हमारा हर प्रकार से कल्याण हो सकता है। जो व्यक्ति अपने माता पिता का सम्मान नहीं करते है। इस व्यक्ति का कभी भी भला नहीं हो सकता है। अतः हर व्यक्ति को अपने माता पिता और गुरओं का हर जगह पर सम्मान करना चाहिए। तभी हम सब का भला हो सकता है। भगवान भी उन्ही लोगों का साथ देते है जो अपने माता पिता और गुरुओं का सम्मान करते है। महाराज श्री ने कहा कि हम सब से इस भारत देश में जन्म लिया है। जिस देश में अनेक चमत्कार हुए है। यही पर सभी देवी देवताओं ने जन्म लिया है। यही पर उनके सभी चमत्कारों का उल्लेख हम सब को मिलता है और किसी देश में इस तरह के चमत्कार हमें नहीं मिलते है। भारत में ही इस तरह का वाकया हमें मिलता है। भारत की संस्कृति भी काफी विशाल है। यहाँ पर अनेक धर्मों को मानने वाले लोग रहते है। इस सब के बावजूद यहाँ पर सभी लोग मिलजुल कर रहते है। महाराज श्री ने बताया कि हमें अपने इष्ट देव की पूजा में सदा के लिए अपने जीवन को लगा देना चाहिए। तभी हम सब का अच्छी तरह से भला हो सकता है। हमें भगवान से अच्छी-अच्छी बातें सीखनी चाहिए। हमें अपने ठाकुर जी की भक्ति में लग जाना चाहिए। ताकि हमारे जीवन के सभी कष्टों को हमारे ठाकुर जी हर ले। भगवान भी उन्ही लोगों का साथ देते है जो सत्य और भलाई के रस्ते पर चलते है। इसलिए हमें सदा ही सत्य और भलाई का रास्ता अपनाना चाहिए। महाराज श्री ने कहा कि हम सब ने इस भारत जैसे विशाल देश में जन्म लिया है जहाँ पर कृष्ण और राम जैसे देवताओं ने जन्म लिया है। हमें सदा ही अपने भगवान के चरणों की सेवा में लग जाना चाहिए। अपने जीवन को उनकी ही भक्ति में लगा देना चाहिए। चाहे वो कोई भी देवता हो। उसी की भक्ति में पूरी तरह डूब जाना चाहिए। तभी हम सब का भला हो सकता है। हमें अपनी भक्ति से उस अपने इष्ट देव को सदा ही प्रसन्न करते रहना चाहिए ताकि वो हमारे जीवन में आने वाले सभी कष्टों को आसानी से हर ले। महाराज श्री ने एक सूंदर भजन "मेरे गिनियों ना अपराध लाड़ली श्री राधे" सुनाकर वहां पर मौजूद सभी भक्तों को मंत्र मुग्ध कर दिया। इस गीत के माध्यम से महाराज श्री ने अपने भक्तों को कई सन्देश दिए ताकि वह आने वाले जीवन की आने वाली कठिनाइयों को आसानी से पार कर सके। इस भजन से महाराज श्री ने भगवान कृष्ण और राधा के प्रेम का भी वर्णन किया है। महाराज श्री ने बताया कि इस भजन के माध्यम से एक भक्त अपने इष्ट देव से प्रार्थना करता है की वह कितने भी अपराध कर ले लेकिन उनके इष्टदेव उसके द्वारा किये गए अपराधों को ना गिने। उसे पूजा और पाठ करना नहीं आता है। फिर भी आपकी भक्ति में लगा हुआ है। उसको पूजा और पाठ करना तो आप ही उसे बताओगे। अगर आप मेरे अवगुण देखोगे तो आप मेरा भला नहीं कर सकते है। इसलिए आप को मुझे हर तरह से सच्चाई के मार्ग पर चलाना ही होगा। तभी आप मेरा हर प्रकार से उद्धार कर सकते है। महाराज श्री ने कहा कि जिस व्यक्ति ने कभी पूजा नहीं की हो ,जिसने कभी सत्संग नहीं किया हो ,जिसने कभी भक्ति नहीं की हो उस व्यक्ति का जीवन बेकार है। उस व्यक्ति का कभी भी भला नहीं हो सकता है। महाराज श्री ने बताया की जिस तरह से हिरण कस्तूरी के चक्कर में जगह जगह भटकता रहता है लेकिन वह कस्तूरी उसी की नाभि में ही होती है। उसी तरह ही हमें अपने भगवान की भक्ति के लिए जगह जगह नहीं भटकना चाहिए। अपनी जगह पर ही उस की भक्ति में ही लगे रहना चाहिए। संसार की सत्यता को समझ कर अपने जीवन को उस ठाकुर की भक्ति में साद के लिए लगा देना चाहिए। यहाँ पर महाराज श्री ने कहा कि हम सब को जगह जगह भटकना छोड़ देना चाहिए। अपने आप को गोविन्द की भक्ति में लगा देना चाहिए। ये हमारे गोविन्द ही हमें इस उलझन से निकल सकते है। हमें इस विपदा से सदा के लिए अलग कर देते है। महाराज श्री ने बताया कि इस बार जन्माष्टमी का पर्व भी 15 अगस्त के दिन ही पद रहा है। यहाँ पर महाराज श्री ने कहा की यह तुम पर ही निर्भर करता है है तुम गुलाम बनना चाहते हो या राजा बन कर जीना चाहते हो। तभी तो इस बार जन्माष्टमी का त्यौहार आज़ादी के दिवस के दिन पड़ रहा है। इसीलिए हमें पूर्ण रूप से आज़ाद रूप में जीना चाहिए। महाराज श्री ने बताया कि हमें अपने ठाकुर जी के प्रति अपनी भक्ति को सुदृढ़ करना चाहिए। ताकि हम सब अपनी भक्ति में कमजोर ना हो सके। हमें कभी भी गलत कामों को नहीं करना चाहिए। हमसब को हमेशा अच्छे काम करते रहना चाहिए। हमें अपने सम्बन्ध अपने ठाकुर से मजबूत करने चाहिए। कोई भी कठिनाई चाहे हम सब के सामने क्यों ना हो। आज का भक्त तो यह चाहता है की गुरु जी अपने भक्त का हाथ जोड़ कर स्वागत करता रहे। लेकिन ये सब गलत है। भक्ति करते वक़्त तो हम सब को अनेक परीक्षा देनी पड़ती है। लेकिन हम सब को उन परीक्षाओं से नहीं घबराना चाहिए। हमें तो अपने भगवान की भक्ति में सदा के लिए लग जाना चाहिए। कभी भी अपनी परीक्षा से नहीं घबराना चाहिए। जिस प्रकार राजा बलि के पास भगवान वामन गए थे तो उन्होंने राजा बलि से तीन पग धरती मांगी थी। तो राजा बलि ने उनसे कहा था की तीन पग से ज्यादा धरती भी आप मांग सकते हो। लेकिन भगवान वामन ने कहा नहीं राजन मुझे तो केवल तीन पग ही धरती चाहिए। यहाँ पर महाराज श्री ने कहा की जिस व्यक्ति के पास धन हो तो उसको समय समय पर भंडारा करते रहना चाहिए। महाराज श्री ने कहा कि हमें समय समय पर उन अनाथ लोगों की मदद करते रहना चाहिए जिनको दो वक़्त का खाना भी नसीब नहीं होता है ताकि उनका जीवन आराम से कट सके। हम सब को भूमि दान जरूर करना चाहिए। ताकि आगे आने वाले समय में हमारे लिए इस सब का लाभ मिल सके। ।।राधे राधर बोलना पड़ेगा ।।

12Aug 2017

"भगवान की भक्ति कहीं भी की जा सकती है उसके लिए इधर-उधर भटकने की ज़रूरत नहीं है।"

जन्माष्टमी के पावन अवसर पर श्री कृष्ण की जन्मभूमि से परम पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने अपने मुखारविंद से चतुर्थ दिवस की श्रीमद्भागवत कथा का रसपान भक्तों को कराया। महाराज श्री ने कहा कि इस बार हम जन्माष्टमी महा महोत्सव 15 अगस्त को मना रहे है। इतना ही नहीं देश को आजाद हुए भी 70 साल पुरे हो जाएंगे। तो यह मात्र जन्माष्टमी महोत्सव नहीं है बल्कि देश की आजादी का भी पर्व है। इस बार स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर श्री कृष्ण भगवान हमे कोई न कोई तो सन्देश देना चाहते होंगे तभी तो स्वतंत्रता दिवस पर जन्माष्टमी का पर्व आया है। महाराज श्री ने कहा कि हमें सदा ही अपने माता पिता का हर जगह पर सम्मान करना चाहिए। तभी हमारा हर प्रकार से कल्याण हो सकता है। जो व्यक्ति अपने माता पिता का सम्मान नहीं करते है। इस व्यक्ति का कभी भी भला नहीं हो सकता है। अतः हर व्यक्ति को अपने माता पिता और गुरओं का हर जगह पर सम्मान करना चाहिए। तभी हम सब का भला हो सकता है। भगवान भी उन्ही लोगों का साथ देते है जो अपने माता पिता और गुरुओं का सम्मान करते है। महाराज श्री ने कहा कि हम सब से इस भारत देश में जन्म लिया है। जिस देश में अनेक चमत्कार हुए है। यही पर सभी देवी देवताओं ने जन्म लिया है। यही पर उनके सभी चमत्कारों का उल्लेख हम सब को मिलता है और किसी देश में इस तरह के चमत्कार हमें नहीं मिलते है। भारत में ही इस तरह का वाकया हमें मिलता है। भारत की संस्कृति भी काफी विशाल है। यहाँ पर अनेक धर्मों को मानने वाले लोग रहते है। इस सब के बावजूद यहाँ पर सभी लोग मिलजुल कर रहते है। महाराज श्री ने बताया कि हमें अपने इष्ट देव की पूजा में सदा के लिए अपने जीवन को लगा देना चाहिए। तभी हम सब का अच्छी तरह से भला हो सकता है। हमें भगवान से अच्छी-अच्छी बातें सीखनी चाहिए। हमें अपने ठाकुर जी की भक्ति में लग जाना चाहिए। ताकि हमारे जीवन के सभी कष्टों को हमारे ठाकुर जी हर ले। भगवान भी उन्ही लोगों का साथ देते है जो सत्य और भलाई के रस्ते पर चलते है। इसलिए हमें सदा ही सत्य और भलाई का रास्ता अपनाना चाहिए। महाराज श्री ने कहा कि हम सब ने इस भारत जैसे विशाल देश में जन्म लिया है जहाँ पर कृष्ण और राम जैसे देवताओं ने जन्म लिया है। हमें सदा ही अपने भगवान के चरणों की सेवा में लग जाना चाहिए। अपने जीवन को उनकी ही भक्ति में लगा देना चाहिए। चाहे वो कोई भी देवता हो। उसी की भक्ति में पूरी तरह डूब जाना चाहिए। तभी हम सब का भला हो सकता है। हमें अपनी भक्ति से उस अपने इष्ट देव को सदा ही प्रसन्न करते रहना चाहिए ताकि वो हमारे जीवन में आने वाले सभी कष्टों को आसानी से हर ले। महाराज श्री ने एक सूंदर भजन "मेरे गिनियों ना अपराध लाड़ली श्री राधे" सुनाकर वहां पर मौजूद सभी भक्तों को मंत्र मुग्ध कर दिया। इस गीत के माध्यम से महाराज श्री ने अपने भक्तों को कई सन्देश दिए ताकि वह आने वाले जीवन की आने वाली कठिनाइयों को आसानी से पार कर सके। इस भजन से महाराज श्री ने भगवान कृष्ण और राधा के प्रेम का भी वर्णन किया है। महाराज श्री ने बताया कि इस भजन के माध्यम से एक भक्त अपने इष्ट देव से प्रार्थना करता है की वह कितने भी अपराध कर ले लेकिन उनके इष्टदेव उसके द्वारा किये गए अपराधों को ना गिने। उसे पूजा और पाठ करना नहीं आता है। फिर भी आपकी भक्ति में लगा हुआ है। उसको पूजा और पाठ करना तो आप ही उसे बताओगे। अगर आप मेरे अवगुण देखोगे तो आप मेरा भला नहीं कर सकते है। इसलिए आप को मुझे हर तरह से सच्चाई के मार्ग पर चलाना ही होगा। तभी आप मेरा हर प्रकार से उद्धार कर सकते है। महाराज श्री ने कहा कि जिस व्यक्ति ने कभी पूजा नहीं की हो ,जिसने कभी सत्संग नहीं किया हो ,जिसने कभी भक्ति नहीं की हो उस व्यक्ति का जीवन बेकार है। उस व्यक्ति का कभी भी भला नहीं हो सकता है। महाराज श्री ने बताया की जिस तरह से हिरण कस्तूरी के चक्कर में जगह जगह भटकता रहता है लेकिन वह कस्तूरी उसी की नाभि में ही होती है। उसी तरह ही हमें अपने भगवान की भक्ति के लिए जगह जगह नहीं भटकना चाहिए। अपनी जगह पर ही उस की भक्ति में ही लगे रहना चाहिए। संसार की सत्यता को समझ कर अपने जीवन को उस ठाकुर की भक्ति में साद के लिए लगा देना चाहिए। यहाँ पर महाराज श्री ने कहा कि हम सब को जगह जगह भटकना छोड़ देना चाहिए। अपने आप को गोविन्द की भक्ति में लगा देना चाहिए। ये हमारे गोविन्द ही हमें इस उलझन से निकल सकते है। हमें इस विपदा से सदा के लिए अलग कर देते है। महाराज श्री ने बताया कि इस बार जन्माष्टमी का पर्व भी 15 अगस्त के दिन ही पद रहा है। यहाँ पर महाराज श्री ने कहा की यह तुम पर ही निर्भर करता है है तुम गुलाम बनना चाहते हो या राजा बन कर जीना चाहते हो। तभी तो इस बार जन्माष्टमी का त्यौहार आज़ादी के दिवस के दिन पड़ रहा है। इसीलिए हमें पूर्ण रूप से आज़ाद रूप में जीना चाहिए। महाराज श्री ने बताया कि हमें अपने ठाकुर जी के प्रति अपनी भक्ति को सुदृढ़ करना चाहिए। ताकि हम सब अपनी भक्ति में कमजोर ना हो सके। हमें कभी भी गलत कामों को नहीं करना चाहिए। हमसब को हमेशा अच्छे काम करते रहना चाहिए। हमें अपने सम्बन्ध अपने ठाकुर से मजबूत करने चाहिए। कोई भी कठिनाई चाहे हम सब के सामने क्यों ना हो। आज का भक्त तो यह चाहता है की गुरु जी अपने भक्त का हाथ जोड़ कर स्वागत करता रहे। लेकिन ये सब गलत है। भक्ति करते वक़्त तो हम सब को अनेक परीक्षा देनी पड़ती है। लेकिन हम सब को उन परीक्षाओं से नहीं घबराना चाहिए। हमें तो अपने भगवान की भक्ति में सदा के लिए लग जाना चाहिए। कभी भी अपनी परीक्षा से नहीं घबराना चाहिए। जिस प्रकार राजा बलि के पास भगवान वामन गए थे तो उन्होंने राजा बलि से तीन पग धरती मांगी थी। तो राजा बलि ने उनसे कहा था की तीन पग से ज्यादा धरती भी आप मांग सकते हो। लेकिन भगवान वामन ने कहा नहीं राजन मुझे तो केवल तीन पग ही धरती चाहिए। यहाँ पर महाराज श्री ने कहा की जिस व्यक्ति के पास धन हो तो उसको समय समय पर भंडारा करते रहना चाहिए। महाराज श्री ने कहा कि हमें समय समय पर उन अनाथ लोगों की मदद करते रहना चाहिए जिनको दो वक़्त का खाना भी नसीब नहीं होता है ताकि उनका जीवन आराम से कट सके। हम सब को भूमि दान जरूर करना चाहिए। ताकि आगे आने वाले समय में हमारे लिए इस सब का लाभ मिल सके। ।।राधे राधर बोलना पड़ेगा ।।

11Aug 2017

"भगवान ना ज्ञान से मिलते हैं ना दौलत से मिलते हैं। जिसका मन पवित्र है भगवान उसी को मिलते हैं।"

जन्माष्टमी के पावन अवसर पर श्री कृष्ण की जन्मभूमि से परम पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने अपने मुखारविंद से तृतीय दिवस की श्रीमद्भागवत कथा का रसपान भक्तों को कराया। महाराज श्री ने कथा प्रारम्भ करते हुए कहा की इस बार हम जन्माष्टमी महा महोत्सव 15 अगस्त को मना रहे है। इतना ही नहीं देश को आजाद हुए भी 70 साल पुरे हो जाएंगे तो यह मात्र जन्माष्टमी महोत्सव नहीं है बल्कि देश की आजादी का भी पर्व है। इस बार स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर श्री कृष्ण भगवान हमे कोई न कोई तो सन्देश देना चाहते होंगे तभी तो स्वतंत्रता दिवस पर जन्माष्टमी का पर्व आया है। महाराज श्री ने कहा कि वृंदावन भूमि एक पवित्र भूमि है ,जहाँ पर भगवान श्री कृष्ण ने अनेकों बाल लीलाएं की थी तथा अनेक राक्षसों का नाश किया था। हमें भी सदा ही अपने इष्ट देव के चरणों में सारा ध्यान लगा देना चाहिए। सदा ही भगवान की भक्ति में लगे रहना चाहिए और अपने जीवन से उस राक्षस रूपी दानव का सदा के लिए नाश कर देना चाहिए। महाराज श्री ने अपने बच्चे और माँ बाप के बीच के रिश्ते के बारे में अपने भक्तों को बताते हुए कहा की हमें सदा ही श्रवण कुमार की तरह ही अपने माता पिता की आज्ञा का पालन करना चाहिए तथा सदा ही अपने माता पिता का हर जगह सम्मान करना चाहिए। मुंबई घटना के बारे में बताते हुए महाराज श्री ने कहा की एक माँ घर में अकेले ही मर गई और उसका अंतिम संस्कार करने वाला बेटा अमेरिका में ही नौकरी करता रह गया। जब बेटा मुंबई घर वापिस आया तो पता चला की माँ का कंकाल घर के अंदर था और माँ की मृत्यु हुए 9-10 महीने हो चुके हैं। इसमें किसकी गलती है? महाराज श्री ने सभी से पूछा। इसमें गलती है भारतीय शिक्षा की, इसमें गलती है माँ बाप की। क्यूंकि आजकल माता पिता अपने बच्चों को भी पैसा कमाने की मशीन समझते हैं। इसलिए सभी रिश्ते नाते हमारे समाज से ख़त्म होते जा रहे हैं। इसके बाद महाराज श्री ने "पत्थर की राधा प्यारी" भजन सुनाकर सभी भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस गीत के द्वारा महाराज श्री ने अपने भक्तों को भगवान की भक्ति को ही भक्त के जीवन का आधार बताया। जिसमें भगवान की सच्ची भक्ति के बिना उस भक्त का सारा जीवन बेकार है। उसे सदा ही सच्चे मन से अपने जीवन को सदा ही अपने प्रभु के चरणों में लगा देना चाहिए। तभी तो उस भक्त के जीवन के सभी पाप मिट सकते है। महाराज श्री ने बताया कि वृंदावन की भूमि हम सब को प्रेम प्रदान करने वाली भूमि है। जो भी भक्त कृष्ण नाम नहीं जपता है उस का जीवन व्यर्थ ही जाता है और जो भक्त कृष्ण नाम जपता है उस का जीवन बड़े ही अच्छे रूप में कटता है। हमें सदा ही संतो की वाणी को अपनाना चाहिए तभी हमारा उद्धार हो सकता है। हमें अपने मन पर सदा ही काबू रखना चाहिए। तभी हम कामयाब हो सकते है। जो व्यक्ति अपने मन पर काबू नहीं रख सकता है वह व्यक्ति कभी भी अपने जीवन में सफल नहीं हो सकता है। महाराज श्री ने बताया कि हमारी मृत्यु सदा ही आनी ही होती है। ये तो परम सत्य है की जिस व्यक्ति का जीवन हुआ है उसकी मृत्यु अवश्य ही होगी। इसलिए हमें अच्छे काम करके अपने जीवन को सफल बना लेना चाहिए। जितने भी भगवान के धाम होते है वैसे ही उसमें पाप और क्रोध भी रहना चाहता है। ये तो आप पर निर्भर करता है की आप किसको अपनाते है। जिसकी मृत्यु आती है उसको भागवत कथा को सुनना चाहिए। पूज्य महाराज श्री ने परीक्षित जी महाराज के प्रसंग को प्रारम्भ करते हुए कहा की जब परीक्षित जी महाराज को पता चला कि सातवें दिन उनकी मृत्यु निश्चित है तो अपना सब कुछ त्याग दिया। राजा परीक्षित ने संतो से पूछा की जिसकी मृत्यु सातवे दिन हो तो उस क्या करना चाहिए? इस पर कोई कहता है भजन करो,कोई कहता है गंगा स्नान करे, किसी संत ने कहा मोन करो, स्मरण करो ध्यान करो, उपासना करो। अनेको संत से उन्हें अनेकों विचार प्राप्त हुए।

9Aug 2017

"जो भी मांगोगे वो मिलेगा, अगर कुछ नहीं मांगोगे तो कृष्ण मिलेंगे।"

जन्माष्टमी के पावन अवसर पर श्री कृष्ण की जन्मभूमि से परम पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने अपने मुखारविंद से प्रथम दिवस की श्रीमद्भागवत कथा का रसपान भक्तों को कराया। महाराज श्री ने अपने भक्तों के साथ कलश यात्रा में भाग लिया है। यहाँ पर महाराज श्री ने कथा शुरू करने से पहले अपने सभी भक्तों के साथ पुरे मंदिर में परिक्रमा की। सबसे पहले महाराज श्री ने हाल में अंदर पहुँचते ही भगवान श्री गणेश की पूजा अर्चना की। उसके बाद महाराज श्री ने भगवान हनुमान जी की पूजा भी की। सबसे पहले महाराज श्री ने वहां पर दीप प्रज्वलित किये तथा बाद में भगवान श्री गणेश के चरणों में पुष्प अर्पित किये। महाराज श्री ने कहा कि हमें सदा ही भगावन की भक्ति में लगे रहना चाहिए। क्योंकि उससे ही हम अपने जीवन को सुचारु रूप से चला सकते है यहाँ महाराज श्री ने बताया की मानव सेवा करना ही भगवान की सेवा करना है। सभी बहन-बेटियों को मेरा साधुवाद जो उन्होंने इस बार भारतीय सभ्यता-संस्कृति की रक्षा हेतु भारतीय राखियों को महत्व दिया। ऐसे ही हम सबने मिलकर भारतीय संस्कारों को बचाना है। यहाँ बैठी सभी माताए, बहने बेटियों को मैं आज कुछ कहना चाहता हूँ। इस समय आस्था चैनल के माध्यम से सोशल मीडिया के माध्यम से जो कोई भी मुझे सुन रहा हैं मैं उनसे एक बात कहना चाहता हूँ की आप सभी को मेरा साधुवाद। आप सभी का धन्यवाद। मेरे एक बार कहने पर आपने भारतीय सभ्यता-संस्कृति की रक्षा हेतु भारतीय राखियों को महत्व दिया। माताऐं घर में सभी त्योहारों, व्रत व परवों को नियम अनुसार करना शुरु करें। सभी संस्कार घर में हो तो बच्चा बहुत जल्द उन से जुड़ता है हमारी पढ़ाई तो बिल्कुल संस्कार विहीन है पर अगर हम अपने घर को भी संस्कारविहीन बना देंगे संस्कार नहीं देंगे तो आने वाली पीढ़ियां धर्म, संस्कृति और बुजुर्गों का सम्मान बिल्कुल भूल जाएंगी फिर वह विदेशियों जैसे बनना चाहेंगे क्योंकि स्कूल की पढ़ाई हमें शुद्ध स्वदेशी नहीं विदेशी बनने की ओर धकेलती है । अगर माताएं सभी संस्कारों को सीख लें, सभी पर्वों पर ब्राह्मण को बुलाकर घर में पूजा पाठ व पर्वों की कथाएं एंव मंत्रोच्चारण हो और ब्राह्मण से कहा जाए कि इसका सार आज की भाषा के अनुसार समझाएं ताकि आज की भाषा के अनुसार पहले बच्चे उसका मतलब समझेंगे, तब जाकर बच्चों का इंटरेस्ट क्रिएट होगा । उसके बाद बच्चा संस्कारों के द्वारा संस्कृत से जुड़ेगा, और जो बच्चा एक बार संस्कृत से जुड़ गया, उसके अंदर यहां की संस्कृति की उत्पत्ति होगी, बीजारोपण होगा। महाराज श्री ने कहा कि हमें सदा ही अपने भगवान की भक्ति में लगे रहना चाहिए। यहाँ पर महाराज श्री ने वेदों के बारे में भी लोगों को बताया। सबसे पहले महाराज श्री ने अपने परमपूज्य गुरुदेव जी का धन्यवाद किया। महाराज श्री ने बताया की जो भी गुरु जी ने हमें बताया है ये बहुत ही मुश्किल से हम सब को प्राप्त होता है। जो भी गुरूजी ने थोड़ा बहुत भी हम सब को ज्ञान दिया है वो हम सब के लिए अनमोल है।महाराज श्री ने बताया कि जब भी कभी हम वृंदावन धाम में जाए तो बिना राधा के वृंदावन की यात्रा अधूरी मानी जाती है। हमें यहाँ पर आकर राधा रानी की सदा ही जयकार करनी चाहिए।

10Aug 2017

"दुःख संसार देता है भगवान तो बस सुख देते हैं।"

जन्माष्टमी के पावन अवसर पर श्री कृष्ण की जन्मभूमि से परम पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने अपने मुखारविंद से द्वितीय दिवस की श्रीमद्भागवत कथा का रसपान भक्तों को कराया। कितना बड़ा संयोग है की हम जन्माष्टमी महा महोत्सव मना रहे हैं इस बार जन्माष्टमी 15 अगस्त को है। इतना ही नहीं देश को आजाद हुए भी 70 साल पुरे हो जाएंगे। तो यह मात्र जन्माष्टमी महोत्सव नहीं है बल्कि देश की आजादी का भी पर्व है। इस बार स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर श्री कृष्ण भगवान् हमे कोई न कोई तो सन्देश देना चाहते होंगे तभी तो स्वतंत्रता दिवस पर जन्माष्टमी का पर्व आया है। हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने स्वच्छ भारत अभियान चलाया है मेरा उन्हें इस अभियान के लिए साधुवाद है। मोदी जी ने टारगेट रखा है की 2019 तक भारत में हर घर में शौचालय बनाना है और देश को शौच मुक्त बनाना है। मेरा यहाँ पर एक सवाल यह भी है की बाहरी स्वछता का लक्ष्य तो हम २-३ साल में पूरा कर लेंगे। लेकिन क्या हम में से कोई आंतरिक स्वच्छता की कोई बात करेगा उसका कोई लक्ष्य निर्धारित करेगा। शायद कोई ऐसा नहीं करने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2017 से 2022 तक संकल्प वर्ष मनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया है। पीएम मोदी ने 2017 से 2022 तक देश को न्यू इंडिया बनाने का संकल्प लिया है। मेरा मोदी जी से एक निवेदन है और यहाँ बैठे सभी भक्तों से एक निवेदन है की 2022 में भारत को आजाद हुए 75 साल हो जाएंगे तब हम एक न्यू इंडिया बनाने का संकल्प ले लेकिन वो न्यू इंडिया क्या होगा? वह न्यू इंडिया होगा मेरे देश में संस्कृत भाषा बोली जाए - पढ़ी जाए। देश की संस्कृति को हम सभी अच्छे से जाने, चाहे वो किसी भी धर्म से हो वह अपने धर्म को संस्कृति को जाने, उसे समझे। मेरे देश के सभी युवा, बच्चे, बड़े सभी अपने संस्कारों को जाने और उनका पालन करें। जो हिन्दू है वह गीता पढ़े, रामायण पढ़े, जो मुसलमान भाई है वह कुरआन पढ़े। जब ऐसा होगा तभी हमारा पूर्ण विकास होगा। आज अमेरिका, रूस, यूरोप के देश विकसित देश तो हैं लेकिन क्या वहां के सभी नागरिक भी विकसित है क्या? नहीं है। मेरा सभी से एक ही निवेदन है की देश की 70 साल की आजादी के उपलक्ष्य पर आप सभी ये संकल्प लें की अपने बच्चों को आप संस्कृत, संस्कृति और संस्कार अवश्य देंगे। आजकल के स्कूल में यह सब नहीं सिखाया जाता है। आप सभी को पता है की श्री कृष्ण भगवान् जेल में पैदा हुए थे। और उनके जन्म लेते ही उनके माता पिता की बेड़िया स्वयं खुल गई थी तो इस बार इस महोत्सव में हम यह संकल्प ले की विदेशी शिक्षा की बेड़ियों को हमने तोडना है, उनसे अपने बच्चों को बचाना है। जिस फल में तोते के चोंच लगी होती हैं वो फल मीठा होता हैं ..ये कथा तो स्वयं ही वेद रूपी वृक्ष के फल भगवान शुकदेव जी के मुँह से निकले हुए हैं तो सोचो ये फल कितना मीठा होगा।हर फल में कुछ न कुछ फेकने के लिए होता हैं लेकिन इस कथा रूपी फल में ऐसा कुछ नहीं है फेंकने लायक हो , ये वो फल हैं जो आपके साथ हमेशा रहेंगे।

10Aug 2017

"दुःख संसार देता है भगवान तो बस सुख देते हैं।"

जन्माष्टमी के पावन अवसर पर श्री कृष्ण की जन्मभूमि से परम पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने अपने मुखारविंद से द्वितीय दिवस की श्रीमद्भागवत कथा का रसपान भक्तों को कराया। कितना बड़ा संयोग है की हम जन्माष्टमी महा महोत्सव मना रहे हैं इस बार जन्माष्टमी 15 अगस्त को है। इतना ही नहीं देश को आजाद हुए भी 70 साल पुरे हो जाएंगे। तो यह मात्र जन्माष्टमी महोत्सव नहीं है बल्कि देश की आजादी का भी पर्व है। इस बार स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर श्री कृष्ण भगवान् हमे कोई न कोई तो सन्देश देना चाहते होंगे तभी तो स्वतंत्रता दिवस पर जन्माष्टमी का पर्व आया है। हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने स्वच्छ भारत अभियान चलाया है मेरा उन्हें इस अभियान के लिए साधुवाद है। मोदी जी ने टारगेट रखा है की 2019 तक भारत में हर घर में शौचालय बनाना है और देश को शौच मुक्त बनाना है। मेरा यहाँ पर एक सवाल यह भी है की बाहरी स्वछता का लक्ष्य तो हम २-३ साल में पूरा कर लेंगे। लेकिन क्या हम में से कोई आंतरिक स्वच्छता की कोई बात करेगा उसका कोई लक्ष्य निर्धारित करेगा। शायद कोई ऐसा नहीं करने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2017 से 2022 तक संकल्प वर्ष मनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया है। पीएम मोदी ने 2017 से 2022 तक देश को न्यू इंडिया बनाने का संकल्प लिया है। मेरा मोदी जी से एक निवेदन है और यहाँ बैठे सभी भक्तों से एक निवेदन है की 2022 में भारत को आजाद हुए 75 साल हो जाएंगे तब हम एक न्यू इंडिया बनाने का संकल्प ले लेकिन वो न्यू इंडिया क्या होगा? वह न्यू इंडिया होगा मेरे देश में संस्कृत भाषा बोली जाए - पढ़ी जाए। देश की संस्कृति को हम सभी अच्छे से जाने, चाहे वो किसी भी धर्म से हो वह अपने धर्म को संस्कृति को जाने, उसे समझे। मेरे देश के सभी युवा, बच्चे, बड़े सभी अपने संस्कारों को जाने और उनका पालन करें। जो हिन्दू है वह गीता पढ़े, रामायण पढ़े, जो मुसलमान भाई है वह कुरआन पढ़े। जब ऐसा होगा तभी हमारा पूर्ण विकास होगा। आज अमेरिका, रूस, यूरोप के देश विकसित देश तो हैं लेकिन क्या वहां के सभी नागरिक भी विकसित है क्या? नहीं है। मेरा सभी से एक ही निवेदन है की देश की 70 साल की आजादी के उपलक्ष्य पर आप सभी ये संकल्प लें की अपने बच्चों को आप संस्कृत, संस्कृति और संस्कार अवश्य देंगे। आजकल के स्कूल में यह सब नहीं सिखाया जाता है। आप सभी को पता है की श्री कृष्ण भगवान् जेल में पैदा हुए थे। और उनके जन्म लेते ही उनके माता पिता की बेड़िया स्वयं खुल गई थी तो इस बार इस महोत्सव में हम यह संकल्प ले की विदेशी शिक्षा की बेड़ियों को हमने तोडना है, उनसे अपने बच्चों को बचाना है। जिस फल में तोते के चोंच लगी होती हैं वो फल मीठा होता हैं ..ये कथा तो स्वयं ही वेद रूपी वृक्ष के फल भगवान शुकदेव जी के मुँह से निकले हुए हैं तो सोचो ये फल कितना मीठा होगा।हर फल में कुछ न कुछ फेकने के लिए होता हैं लेकिन इस कथा रूपी फल में ऐसा कुछ नहीं है फेंकने लायक हो , ये वो फल हैं जो आपके साथ हमेशा रहेंगे।

21Jul 2017

"धर्म आत्मा का श्रंगार होता है। हमें सदा ही सत्य और सच्चे धर्म का पालन करना चाहिए।"

परम श्रध्देय श्री देवकी नन्दन ठाकुर जी महाराज की जयपुर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा में सभी भक्तों को सप्तम दिवस भागवत कथा में भगवान श्री कृष्ण के विवाह का सुन्दर वर्णन श्रोताओं के श्रवण कराया। महाराज श्री ने कहा कि अगर इंसान को किसी भी प्रकार का कष्ट होता है तो भगवान की भक्ति से सभी प्रकार के कष्टों को भक्त दूर कर सकता है। वह इस भक्ति से कठिन से कठिन विपदा को भी दूर कर लेता है। इसलिए हमें सदा ही भगवान की भक्ति सच्चे मन से करनी चाहिए। जिस व्यक्ति भगवान के प्रति सच्चे मन से होती है वह हर विपदा को पार कर लेता है। महाराज श्री ने बताया कि कैसे हम भगवान की भक्ति से अपने सभी कष्टों को दूर कर सकते है। यहाँ महाराज श्री ने भजन श्रवण कराया। इस भजन को सुन कर वहां पर मौजूद सभी भक्तगण झूम उठे। यह भजन था "मेरी बिगड़ी तू बना दे दुनिया बनाने वाले " महाराज श्री ने बताया कि हर भक्त के मन में सदा भगवान के सच्ची भावना होनी चाहिए। जिससे की उस भक्त का आने वाला जीवन सदा अच्छा रहे। यहाँ पर महाराज श्री ने अपने भक्तों को कल्चरल टेरेरिज्म के बारे में भी बताया। हमें सदा ही सच्ची और अच्छी शिक्षा लेनी चाहिए। हमें सदा ही अपने चरित्र को अच्छा बनाना चाहिए। अपने बच्चो को अच्छे स्कूलों में कॉलेजों में भेजना चाहिए। महाराज श्री ने कहा कि जन्माष्टमी पर होने वाले अवसर पर हम लोगों को भारत की सभ्यता से अवगत कराएँगे और लोगों को गुरुकुल में ही ज्यादा से ज्यादा शिक्षा लेनी चाहिए। क्योंकि गुरुकुल की शिक्षा आजकल के स्कूलों की शिक्षा से ज्यादा अच्छी होती है। यहाँ महाराज श्री ने GST के बारे में भी लोगों को बताया। उन्होंने हमें बताया की पूजा के सामान पर किसी भी तरह का टैक्स नहीं होना चाहिए। यहाँ पर देवी देवताओं की मूर्तियों पर किसी भी प्रकार का टैक्स नहीं होना चाहिए।

19Jul 2017

"भगवान प्रेम के बिना नहीं मिलते है। प्रेम से मनुष्य अपने भगवान के दर्शन आसानी से प्राप्त कर लेता है।"

परम श्रध्देय श्री देवकी नन्दन ठाकुर जी महाराज की जयपुर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा में सभी भक्तों को पंचम दिवस भागवत कथा में भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का सुन्दर वर्णन श्रोताओं के श्रवण कराया। महाराज श्री ने कथा प्रारम्भ करते हुए कहा की मनुष्य को सदा ही सत्य का मार्ग अपनाना चाहिए। इस मार्ग पर चल कर ही हम सब अपना जीवन सदा के लिए सफल बना सकते हैं। सत्य पर चल कर हम अपने जीवन की सभी कठिनाइयों को दूर कर सकते है। सत्यवान पुरुष सदा ही अपने जीवन से सबका चहिता बन जाता है। सब उसको प्यार करने लगते है। महाराज श्री ने बताया कि हम कैसे भगवान की भक्ति करके अपने जीवन का उद्धार कर सकते है। हमें सदा ही भगवान की भक्ति में लीन रहना चाहिए। अपने इष्टदेव की सदा ही भक्ति करते रहना चाहिए। ताकि आगे आने वाले समय में हमें किसी भी तरह की समस्या न आये। उसके लिए हमें सदा तैयार रहना चाहिए। हमें अपने जीवन को गोविन्द के चरणों में समर्पित कर देना चाहिए। फिर तो हमारे जीवन के सभी कष्टों को हमारे इष्टदेव गोविन्द जी पल भर में ही दूर कर देंगे और हमें सदा ही अपने जीवन में सत्य और अच्छाई का रास्ता अपनाना चाहिए। ताकि आने वाले समय में हमें किसी भी तरह की कोई परेशानी न आये।

20Jul 2017

"सत्य क्या है? माया से दूर रहना, भगवान के चरणों की सेवा करना ही सत्य है।"

परम श्रध्देय श्री देवकी नन्दन ठाकुर जी महाराज की जयपुर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा में सभी भक्तों को षष्टम दिवस भागवत कथा में भगवान श्री कृष्ण की गोपियों संग लीलाओं का सुन्दर वर्णन श्रोताओं के श्रवण कराया। आज महाराज श्री ने "हो मनरो लागे ना सखी, म्हारो घनश्याम के बिना" भजन से कथा प्रारम्भ की। इसके बाद पूज्य महाराज श्री ने कहा की मोदी जी देश में जीएसटी ले आये हैं उन्हें एक और जीएसटी लाना चाहिए। "गौ सेवा तुरंत" शुरू की जाए। हमारे देश में जितने भी विधायक, सांसद, वकील, जज आदि सबको गाय घर में पालनी चाहिए। महाराज श्री ने कहा की यदि आप 7 दिन तक भागवत कथा मन से श्रवण करते हैं तो आपको माया से विरक्ति और कान्हा में आसक्ति हो जायेगी। कथा का काम है आपको भगवान के चरणों की सेवा में लगा दे ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सत्य का बोध हो जाता है। सत्य क्या है? सत्य है माया से दूर रहना, भगवान के चरणों की सेवा करना यही सत्य है। इस कलयुग में हम कभी भी माया से दूर नहीं जा सकते हैं लेकिन माया को प्रयोग तो करो लेकिन मन में माया ना रखो। गोविन्द को पाना है तो माया को छोड़ना पड़ेगा। इस आत्मा पर, मन पर माया को हावी मत होने दो। महाराज श्री ने कहा श्री कृष्ण ने ब्रजवासियों से कहा की इन्द्र देव की पूजा ना करें और गिरिराज पर्वत की पूजा करें। इस पर देवराज इंद्र क्रोधित हो गए और उन्होंने लगातार कई दिन तक ब्रज में वर्षा की जिससे ब्रज में बाढ़ आ गई। ब्रजवासियों को बचाने के लिए श्री कृष्ण भगवान ने अपनी कनिष्क ऊँगली पर गिरिराज पर्वत को उठा लिया जिसकी शरण में सभी ब्रजवासी आ गए। बहुत वर्षा करने के बाद भी ब्रजवासी सुरक्षित रहे क्योंकि वे सब भगवान श्री कृष्ण द्वारा उठाये गए पर्वत गिरिराज की शरण में थे।

18Jul 2017

कठिन से कठिन समय में मनुष्य को भगवान का श्रवण करते रहना चाहिए

परम श्रध्देय श्री देवकी नन्दन ठाकुर जी महाराज की जयपुर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा में सभी भक्तों को चतुर्थ दिवस भागवत कथा में प्रहलाद जी, भगवान के वामन अवतार आदि की लीलाओं का सुन्दर वर्णन श्रोताओं के श्रवण कराया। "तेरी बिगड़ी बना देगा" इस सुन्दर भजन से महाराज श्री ने आज की कथा प्रारम्भ की महाराज श्री ने कहा की व्यक्ति भगवान की भक्ति करके अपने जीवन को सभी प्रकार से सम्पन्न कर सकता है। व्यक्ति को सदा ही सत्य और सच्चाई का मार्ग अपनाना चाहिए। मनुष्य को सदा ही भगवान की भक्ति में लगे रहना चाहिए तभी हमारा जीवन हर प्रकार से सुखी रह सकता है। हमें सदा ही परिश्रम का मार्ग अपनाना चाहिए। हमें कठिनाइयों से कभी भी घबराना नहीं चाहिए। हमें सदा ही भगवन की भक्ति में डूबे रहना चाहिए। हमें प्रह्लाद की तरह ही भगवान की भक्ति करनी चाहिए। कभी भी अपनी भक्ति से नहीं हटना चाहिए। सदा ही सत्य का मार्ग अपनाना चाहिए। भक्त प्रह्लाद की तरह ही कठिनाइयों को झेलते हुए अपनी भक्ति का रास्ता नहीं छोड़ा था और अंत में प्रह्लाद को अपने प्रभु के दर्शन हुए थे और उनका जीवन सफल हो गया था। जो माता गर्भवती होती है उसको कथा जरूर ही सुननी चाहिए। अभिमन्यु ने अपनी माता के गर्भ में ही चक्रव्यूह को तोड़ने का राज जान लिया था। महाराज श्री ने बताया की कैसे भक्त प्रह्लाद ने अनेक कठिनाइयों को झेलते हुए भी अपनी भक्ति नहीं छोड़ी थी उसी तरह ही हमें भी भगवान का अनुशरण करते ही रहना चाहिए। प्रह्लाद को पहाड़ से निचे गिराया गया था और आग में जलाया गया था फिर भी प्रह्लाद ने अपनी भक्ति को नहीं छोड़ा था। प्रह्लाद के विश्वास से ही भगवान ने खम्बे को फाड़ कर राक्षस का वध किया था और अपने भक्त को नरसिंह रूप में दर्शन दिए थे। भगवान ने समय-समय पर अनेक अवतार लेकर अपने भक्तों और इस पृथ्वी का उद्धार किया था। केवल भगवान का नाम रट लेने से ही सब कुछ ठीक नहीं हो जाता है हमें उनका अनुशरण भी करना चाहिए। कितना भी सूंदर मनुष्य हो या स्त्री हो बुढ़ापे में सब नष्ट हो जाता है लेकिन गोविन्द की सुंदरता तो सदा ही बढ़ती ही जाती है और उसकी सुंदरता बढ़ती ही जा रही है। जो व्यक्ति भजन नहीं करता है वो आंतरिक रूप से कमजोर होता है। और जो भजन करता है वो आंतरिक रूप से मजबूत होता है। भगवान की कथा में कभी भी खाली हाथ नहीं जाना चाहिए और न ही कथा से खाली हाथ आना चाहिए। वामन अवतार भगवान विष्णु के दशावतारो में पांचवा अवतार और मानव रूप में अवतार था जिसमे भगवान विष्णु ने एक बौने के रूप में इंद्र की रक्षा के लिए धरती पर अवतार लिया। वामन अवतार की कहानी असुर राजा महाबली से प्रारम्भ होती है। महबली प्रहलाद का पौत्र और विरोचना का पुत्र था। महाबली एक महान शासक था जिसे उसकी प्रजा बहुत स्नेह करती थी। उसके राज्य में प्रजा बहुत खुश और समृद्ध थी। उसको उसके पितामह प्रहलाद और गुरु शुक्राचार्य ने वेदों का ज्ञान दिया था। समुद्रमंथन के दौरान जब देवता अमृत ले जा रहे थे तब इंद्रदेव ने बाली को मार दिया था जिसको शुक्राचार्य ने पुनः अपन मन्त्रो से जीवित कर दिया था। महाबली ने भगवान ब्रह्मा को प्रस्सन करने के लिए तपस्या की थी जिसके फलस्वरूप भगवान ब्रह्मा ने प्रकट होकर वरदान मांगने को कहा बाली भगवान ब्रह्मा के आगे नतमस्तक होकर बोला “प्रभु, मै इस संसार को दिखाना चाहता हूँ कि असुर अच्छे भी होते हैं। मुझे इंद्र के बराबर शक्ति चाहिए और मुझे युद्ध में कोई पराजित ना कर सके।“ भगवान ब्रह्मा ने इन शक्तियों के लिए उसे उपयुक्त मानकर बिना प्रश्न किये उसे वरदान दे दिया। शुक्राचार्य एक अच्छे गुरु और रणनीति कार थे जिनकी मदद से बाली ने तीनो लोकों पर विजय प्राप्त कर ली। बाली ने इंद्रदेव को पराजित कर इंद्रलोक पर कब्जा कर लिया। एक दिन गुरु शुक्राचार्य ने बाली से कहा अगर तुम सदैव के लिए तीनो लोकों के स्वामी रहना चाहते हो तो तुम्हारे जैसे राजा को अश्वमेध यज्ञ अवश्य करना चाहिए। बाली अपने गुरु की आज्ञा मानते हुए यज्ञ की तैयारी में लग गया। बाली एक उदार राजा था जिसे सारी प्रजा पसंद करती थी। इंद्र को ऐसा महसूस होने लगा कि बाली अगर ऐसे ही प्रजापालक रहेगा तो शीघ्र सारे देवता भी बाली की तरफ हो जायेंगे। इंद्रदेव देवमाता अदिति के पास सहायता के लिए गए और उन्हें सारी बात बताई | देवमाता ने बिष्णु भगवान से वरदान माँगा कि वे उनके पुत्र के रूप में धरती पर जन्म लेकर बाली का विनाश करें। जल्द ही अदिति और ऋषि कश्यप के यहाँ एक सुंदर बौने पुत्र ने जन्म लिया। पांच वर्ष का होते ही वामन का जनेऊ समारोह आयोजित कर उसे गुरुकुल भेज दिया। इस दौरान महाबली ने 100 में से 99 अश्वमेध यज्ञ पुरे कर लिए थे। अंतिम अश्वमेध यज्ञ समाप्त होने ही वाला था कि तभी दरबार में दिव्य बालक वामन पहुँच गया। महाबली ने कहा कि आज वो किसी भी व्यक्ति को कोई भी दक्षिणा दे सकता है। तभी गुरु शुक्राचार्य महाबली को महल के भीतर ले गये और उसे बताया कि ये बालक ओर कोई नहीं स्वयं भगवान विष्णु हैं वो इंद्रदेव के कहने पर यहाँ आए हैं और अगर तुमने इन्हें जो भी मांगने को कहा तो तुम सब कुछ खो दोगे। महाबली अपनी बात पर अटल रहे और कहा मुझे वैभव खोने का भय नहीं है बल्कि अपन प्रभु को खोने का है इसलिए मै उनकी इच्छा पूरी करूंगा।

16Jul 2017

इंसान को अच्छे गुणों को धारण करना चाहिए और बुरे गुणों से दूर रहना चाहिए

"इंसान को ऐसे गुणों को अपनाना चाहिए जिसे लोग पसंद करे, ना की नापसंद।" परम श्रध्देय श्री देवकी नन्दन ठाकुर जी महाराज की जयपुर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा में सभी भक्तों को द्वितीय दिवस भागवत कथा में राधा-रानी, भगवान् शुकदेव आदि की लीलाओं का सुन्दर वर्णन श्रोताओं के श्रवण कराया। महाराज श्री ने इस मधुर भजन से कथा प्रारम्भ की "भगवान इतना कीजिये की मुझे अपनी ही भक्ति दीजिये... हे प्रभु आपको मैं न भूल पाऊँ.. माया के बांधों से मैं मुक्ति कैसे पाऊँ.." महाराज श्री ने कहा की श्रीमद भगवत कथा के पहले ही दिन जयपुर में वर्षा हो गयी और सबको राहत मिली। दिल ये जो मांगे वो मिलता हैं और मिलता उन्ही को, जो पाना चाहता हैं। सारे काम प्लानिंग से होते हैं... प्लानिंग ऑफ़ हाउ टू लिव लाइफ, ये सबसे बड़ी प्लानिंग होती है हाउ टू लिव लाइफ - "फ्रॉम बर्थ टू डेथ।" जिंदगी के रास्तो को समझने में समय लगता हैं और जब रास्ते समझ आते हैं तो समय ख़त्म हो जाता है। हमें कथाये अपने बच्चो के साथ सुननी चाहिए। अपने जीवन के महत्त्व को समझे। राजस्थान वीरों की भूमि के साथ-साथ भक्तों की भूमि है। यकीन है की जो औरतें पुराने वस्त्रों में आई हैं उनमें से कोई न कोई मीरा बाई है। जिस समय जीव का भागवत कथा सुनने का मन बनता है उसी समय भगवान उस जीव के कल्याण करने का मन बना लेता है और जिस समय जीव कथा सुनने के लिए पंडाल में आते हैं उसी समय भगवन उनके मन में समां जाता हैं। जिस फल में तोते के चोंच लगी होती हैं वो फल मीठा होता है। ये कथा तो स्वयं ही वेद रूपी वृक्ष के फल भगवान शुकदेव जी के मुँह से निकले हुए हैं तो सोचो ये फल कितना मीठा होगा। हर फल में कुछ न कुछ फेंकने के लिए होता हैं लेकिन इस कथा रूपी फल में ऐसा कुछ नहीं है जो फेंकने लायक हो। ये वो फल हैं जो आपके साथ हमेशा रहेंगे।

17Jul 2017

"ज्ञान कृपा से मिलता है चाहे गुरु कृपा हो या गोविन्द की कृपा हो।"

परम श्रध्देय श्री देवकी नन्दन ठाकुर जी महाराज की जयपुर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा में सभी भक्तों को तृतीय दिवस भागवत कथा में कपिल देव जी महाराज की लीलाओं का सुन्दर वर्णन श्रोताओं के श्रवण कराया। महाराज श्री ने "तेरे चरणों की धुल मैं बन जाऊ, है आशा कहीं दुर न जाऊँ ऐसा भक्ति के रंग चढ़ा दे की तेरे बिन एक पल न रहूं। भजन से कथा प्रारम्भ की। पूज्य महाराज श्री ने कहा की कथा को हमें एकाग्रचित होकर सुनना चाहिए और जितने विश्वास के साथ हम भगवान की कथा सुनते हैं उतना ही फल हमें अधिक प्राप्त होता है और दुनिया में कोई भी ऐसा कार्य नहीं है जो भगवान की कथा से बड़ा है। जिसने हमें ये मानव जीवन दिया, जिसका दिया हुआ हम खाते हैं उसी की भक्ति के लिए हमारे पास समय नहीं है। पूज्य महाराज श्री ने परीक्षित जी महाराज के प्रसंग को प्रारम्भ करते हुए कहा की जब परीक्षित जी महाराज को पता चला कि सातवें दिन उनकी मृत्यु निश्चित है तो अपना सब कुछ त्याग दिया। राजा परीक्षित ने संतो से पूछा की जिसकी मृत्यु सातवे दिन हो तो उस क्या करना चाहिए? इस पर कोई कहता है भजन करो,कोई कहता है गंगा स्नान करे, किसी संत ने कहा मोन करो, स्मरण करो ध्यान करो, उपासना करो। अनेको संत से उन्हें अनेकों विचार प्राप्त हुए। उसी समय भगवान नारद के आदेश पर भगवान शुकदेव जी वहाँ पर पधारें। उनके मुख पर बहुत तेज था सभी संतो ने उनको प्रणाम किया। मेरा सभी बच्चों से निवेदन है की जब भी आपके घर में आये उनका खड़े होकर प्रणाम कर सम्मान करना चाहिए। भारत की संस्कृति है "अतिथि देवो भवः" अतिथि भगवान के समान है। मेरा सभी माताओं और बहनों से निवेदन है की आपके घर में जब भी कोई अतिथि आये तो उनका सम्मान करें पता नहीं भगवान कब मेहमान बन आपके घर आ जाए। यह सब तभी संभव है जब आप अपने बच्चों को संस्कार दोगे। शुकदेव जी महाराज जब आये तब राजा परीक्षित ने उन्हें साष्टांग दंडवत प्रणाम किया। और शुकदेव जी से पूछा जिसकी मृत्यु निश्चित हो उसे क्या करना चाहिए और मृत्यु हमारे जीवन का कटु सत्य है। हम इस संसार में खाली हाथ आए थे और खाली हाथ ही जायंगे। यह पता होने के बावजूद भी हम अपना सारा जीवन सांसारिक भोगविलास में गुजार देते हैं और प्रभु ने हमें जिस कार्य के लिए मानव जीवन दिया है उससे हम भटक जाते हैं। शुकदेव जी ने परीक्षित जी महाराज से कहा हे राजन जिस की मृत्यु निश्चित हो उसे भागवत कथा श्रवण करनी चाहिए। उसी प्रकार हमें भी सच्चे मन से भागवत कथा श्रवण करनी चाहिए और भगवान की भक्ति करनी चाहिए।

15Jul 2017

"भगवान का भजन सबसे बड़ा धर्म है"

परम श्रध्देय श्री देवकी नन्दन ठाकुर जी महाराज की जयपुर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा में सभी भक्तों को प्रथम दिवस भागवत कथा में करमेती बाई, मीरा बाई, आत्मदेव आदि की लीलाओं का सुन्दर वर्णन श्रोताओं के श्रवण कराया। अमरनाथ यात्रा के दौरान आतंकवादी हमला कर 7 श्रद्धालुओं की जान ले ली गई। तीन अलग अलग जगहों पर आतंकियों ने अमरनाथ यात्रियों के जत्थे पर सबसे कायराना और क्रूर हमला किया। निहत्थे श्रद्धालु जिनकी जुबान पर भोले का भजन और हाथों में पूजा-आरती का समान था उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी गईं। उनका कसूर सिर्फ इतना था कि वो कभी जन्नत रही घाटी के रास्तों से अपने भोलेनाथ के दर्शन करने बिना खौफ जा रहे थे क्योंक वो भक्ति में डूबे थे और आस्था में लीन थे। अमरनाथ यात्रियों से भरी बस पर आतंकियों ने फायरिंग की। दहशतगर्दों का न कोई मुल्क है और न मज़हब. लेकिन कम से कम ये आतंकी इतना तो जान लेते कि जिस अमरनाथ गुफा में महादेव के दर्शन के लिये यात्री रवाना हुए हैं उस मंदिर को ढूंढने वाला कोई काफिर नहीं बल्कि एक गडरिया मुसलमान ही था। अमरनाथ गुफा को करीब 500 साल पहले खोजा गया था और इसे खोजने का श्रेय एक मुस्लिम, बूटा मलिक को दिया जाता है। बूटा मलिक एक गड़रिए थे। पहाड़ पर ही भेड़-बकरियां वगैरह चराते थे। वहां उनकी मुलाकात एक साधु से हुई और दोनों की दोस्ती हो गई। एक बार उन्हें सर्दी लगी तो वो उस गुफा में चले गए। गुफा में ठंड लगी तो साधु ने उन्हें एक कांगड़ी दिया जो सुबह में सोने की कांगड़ी में तब्दील हो गया।

12Jul 2017

गुरु पूर्णिमा महोत्सव "युवा शांति सन्देश"

गुरु पूर्णिमा की संध्या को युवा शांति संदेश में पूज्य महाराज श्री ने युवा पीढ़ी को धर्म के प्रति जवाबदेह बताते हुये कहा कि हमारे युवा सनातन धर्म और देश का भविष्य हैं। आधुनिकता का ताना देकर इन्हें दोषी मानकर छोड़ा नहीं जा सकता। युवा शक्ति केवल तब तक ही अदृश्य रहती है जब तक कि उन्हें जीवन के असली अर्थ से परिचित ना कराया जाये। यह जिम्मेदारी गुरू के साथ-साथ माता-पिता की भी बनती है। जिसने भागवत न सुनी हो, जिसने रामायण का सार न समझा हों उसे आध्यात्म का मर्म कैसे पता चलेगा। ।। राधे राधे बोलना पड़ेगा ।।

12Jul 2017

गुरु पूर्णिमा महोत्सव (प्रथम दिवस)

ठा. प्रियाकांत जू मंदिर, शांति सेवा धाम, वृन्दावन में पूज्य महाराज श्री के सानिध्य में "गुरु पूर्णिमा महोत्सव" में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर महाराज श्री से दीक्षा लेने के लिए 2-3 दिन पहले से हजारों भक्त आश्रम में आ गए थे।

12Jul 2017

गुरूपूर्णिमा महोत्सव (प्रथम दिवस) - गुरूकृपा के लिये शिष्य में श्रद्धाभाव जरूरी

ठा. प्रियाकान्तजू मंदिर पर दो दिवसीय गुरू पूर्णिमा महोत्सव का प्रारम्भ हुआ। श्रोताओं को सम्बोधित करते हुये पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने गुरू और शिष्य का सम्बन्ध बताया। उन्होने कहा मनुष्य जीवन का एक मात्र लक्ष्य परमात्मा से मिलन कर मोक्ष की प्राप्ति है और इस आत्मा को परमात्मा से मिलाने का माध्यम गुरू है। परमात्मा की ओर ले जाने वाले सद्मार्ग से भटके हुये लोगों को राह दिखाने का कार्य गुरू करता है। उन्होने कहा कि जन्म-जन्म के बंधन से मुक्त होने के लिये ही यह मानव जीवन मिला है। गुरू द्वारा दिया गया मंत्र ही जीव को कठिनाईयों से मुक्त करता है। अगर गुरूमंत्र में श्रद्धा ना हो तो उसे ग्रहण नहीं करें अन्यथा प्राणी पाप का भागी होता है। गुरू निस्वार्थ होना चाहिये तो शिष्य के लिये श्रद्धा का भाव जरूरी है। जो निस्वार्थ है, परमार्थ है वही गुरू है। इससे पूर्व प्रातः देश-विदेश से आये श्रद्धालुओं ने ठा. प्रियाकान्तजू भगवान के दर्शन कर गुरू पूजन किया। श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने उन्हें कंठी धारण कराकर गुरूदीक्षा प्रदान की। शांति सेवा सभागृह में आर्शीवचन में भक्तों ने अच्छाई के मार्ग पर चलने की सीख ग्रहण की। ठा. प्रियाकान्तजू मंदिर कल पुर्णिमा की रात्रि 8 बजे से प्रातः मंगला आरती तक महासंकीर्तन आयोजित होगा। श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के साथ प्रसिद्ध भजन गायिका अलका गोयल, राजकुमार लक्खा, पूरन पागल आदि विभिन्न भजन गायक अपनी मधुर वाणी से भगवान के प्रति भक्तों की मूक वन्दना को भावों के स्वर प्रदान करेगें। इस अवसर पर एचपी अग्रवाल, रामधन वशिष्ठ, महेश कुमावत, अनिल त्यागी, प्रवीन कुमार, बनवारी, श्यामसुन्दर शर्मा, अजय, मुरारी, रवि रावत आदि उपस्थित रहे ।

12Jul 2017

हजारों भक्तों ने पूरी रात अपने प्रिय ठा. प्रियाकांत जू के सानिध्य में किया महासंकीर्तन

ठा. प्रियाकान्तजू मंदिर पुर्णिमा की रात्रि 8 बजे से प्रातः मंगला आरती तक महासंकीर्तन आयोजित किया गया। श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के साथ प्रसिद्ध भजन गायिका श्रीमती अलका गोयल जी, श्री राजकुमार लक्खा जी, श्री पूरन पागल जी, श्री गोपाल जिंदल जी, श्रीमती मीनू शर्मा जी, श्री तिलक वर्मा जी, सुश्री संध्या तोमर जी आदि विभिन्न भजन गायक अपनी मधुर वाणी से भगवान के प्रति भक्तों की मूक वन्दना को भावों के स्वर प्रदान किये। जिसे सुन कर भक्त मंत्रमुग्ध हो गये। इस अवसर पर महाराज श्री ने कहा की जो कोई भक्त 11 पूर्णिमा लगातार ठा. प्रियाकांत जू मंदिर में अपनी हाजिरी लगाता है उसकी हर इच्छा पूर्ण होती है। भक्तों ने कई बार बताया है की उन्हें तो मात्रा 1-2 या 3 पूर्णिमा की हाजिरी में ही इच्छा पूर्ण हो गई। इस अवसर पर संस्था के सचिव श्री विजय शर्मा जी, श्री एचपी अग्रवाल जी, श्री धमेन्द्र कुमार जी, श्री धन्नू भईया जी, श्री प्रवीन कुमार जी, श्री जगदीश वर्मा जी , श्री रवि रावत जी, श्री विष्णु शर्मा जी, श्री शंकर लाल एम कुमावत जी, श्री कीर्ती सिंघल जी, श्री गजेंद्र चौहान जी आदि उपस्थित रहे।

8Mar 2017

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत 125 गरीब कन्याओं को दी गई राशि

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर पूज्य महाराज श्री ने 125 गरीब कन्याओं को शिक्षा हेतु प्रति कन्या 5100 रूपए की सहयोग सेवा राशि ट्रस्ट के द्वारा प्रदान की। गत वर्ष 8 फरवरी 2016 को भी श्री प्रियाकान्त जू मन्दिर के उदघाटन के अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह जी के हाथों से विश्व शान्ति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के द्वारा 125 गरीब कन्याओं को प्रति कन्या साईकिल एवं शिक्षा हेतु 5100 रूपए की सहयोग सेवा राशि ट्रस्ट के द्वारा प्रदान की गई थी।

2Feb 2017

श्री श्याम शरण देव जी महाराज बने निम्बार्क पीठ के 49वें जगद्गुरु

परम पूज्य निम्बार्कपीठ जगद्गुरु श्री श्यामशरणदेव जी महाराज का जगद्गुरु पदाभिषेक बसंत पंचमी के पावन अवसर पर प्रातः 11.30 बजे किया गया। इसी के साथ वे निम्बार्क पीठ के 49वें जगद्गुरु बन गए है। आज उन्हें श्री "श्रीजी महाराज" की उपाधि भी दी गई। सांय के समय में श्री "श्रीजी महाराज" के पदाभिषेक के अवसर पर बाबा श्री रामदेव जी, परम् पूज्य श्री देवकी नंदन ठाकुर जी महाराज जी, राजस्थान की मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे सिंधिया जी आदि पहुंचे। इसी के साथ सांय में भोजन-प्रसाद के कार्यक्रम साथ यह तीन दिवसीय पूण्य समारोह सम्पन्न हुआ।

25Jan 2017

प्रथम पाटोत्सव पर संत सम्मलेन

श्री प्रियकांत जू भगवान के प्रथम पाटोत्सव पर आशीर्वाद देने पहुचे बृजभूमि के दिव्य संत 5 घंटे से ज्यादा मंच पर मौजूद रहे। उन्होंने श्रद्धालुओं को अपने प्रवचनों से मंत्र मुग्ध करने के साथ-साथ पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज को ढेरों बधाईयाँ और अपना आशीर्वाद भी देते रहे। पाटोत्सव की कुछ यादगार झलकियां अगले कुछ दिनों तक हम आपके साथ साझा करते रहेंगे।

26Jan 2017

पूज्य महाराज श्री ने स्कूल के बच्चों के साथ मनाया गणतंत्र दिवस

पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महारज ने आज गणतंत्र दिवस के अवसर पर श्री जी बाबा सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल, मथुरा में ध्वजारोहण किया। महाराज श्री ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुवात की। पूज्य महाराज श्री ने कहा की प्यारे-प्यारे बच्चों को, देश के होनहारों को, देश के इन छोटे-छोटे गणों को, मासूम से मनो को गणतंत्र दिवस की बहुत-बहुत बधाई। आओ मेरे साथ तीन बार बोलो जय हिन्द.....जय हिन्द........जय हिन्द। आप देश का भविष्य हो, मेरे सामने जितने भी नन्हे-नन्हे हाथ हैं। मैं महसूस कर रहा हूँ कि ये देश का भविष्य बनाने के काम आएंगे, आपकी मासूम आँखों में मैं भारत की सुनहरी तस्वीर देख पा रहा हूँ। हे नन्हे वीरों आने वाले दिनों में आपके कन्धों पर यह ज़िम्मेदारी है की आप देश की प्रगति करें, अपनी संस्कृति को पूरे विश्व में फैलाएं व धर्म की रक्षा करें क्योंकि आपका जन्म ब्रज भूमि पर हुआ है तो आपकी ज़िम्मेदारी और बढ़ जाती है क्योंकि पूरा विश्व ब्रज भूमि से प्रेरणा लेने के लिए आता है। मेरा आपको शुभ आशीर्वाद और एक बार फिर से गणतंत्र दिवस की बहुत-बहुत बधाई।

27Jan 2017

महाराज श्री ने श्री प्रियाकांत जू भगवान के भक्तों को दिया उपहार

प्रथम पाटोत्सव के पावन अवसर पर पूज्य महाराज श्री ने अपने भक्तों के लिए मासिक पत्रिका का विमोचन देश की दिव्य आत्माओं, दिव्य संतों के साथ किया। अब सभी भक्त श्री प्रियाकांत मंदिर, पूज्य महाराज श्री एवं विश्व शान्ति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट की सभी जानकारी इस पत्रिका के द्वारा जान पाएंगे। इस पत्रिका में भारतवर्ष की संस्कृति, संस्कार, संतानत धर्म के गूढ़ बातें और महाराज श्री के सन्देश भी पढ़ पाएंगे। यदि आप भी इस पत्रिका के पाठक बनना चाहते है और अपने घर बैठे मंगवाना चाहते हैं तो आप ऑनलाइन भी बुक कर सकते हैं। नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें और पत्रिका को अभी बुक करें। आइये इस पत्रिका से जाने अपनी संस्कृति और संस्कार के बारे में।

17Jan 2017

Facebook LIVE Question Answer

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11Jan 2017

Media

मीरापुर मैं श्रीमद्भागवत कथा के दौरान बोले कथावयास देवकी नंदन ठाकुर जी

11Jul 2017

अब आपको रोज नित्य सुबह प्रियकांत जू भगवान का संदेश मिलेगा आपके फोन पर।

आपकी हर सुबह सूहानी हो। आपका हर दिन शुभ हो।। अब आपको रोज नित्य सुबह प्रियकांत जू भगवान का संदेश मिलेगा आपके फोन पर। जिसे स्वयं पूज्य महाराज श्री भेजेंगे आपको पूज्य श्री महाराज का सन्देश प्राप्त करने के लिए आप ये नंबर सेव कर लिजिए और आपको सन्देश प्राप्त हो उसके लिए आप अपना नंबर, नाम, शहर का पता, ईमेल आईडी सहित भेज दीजिये।

11Jul 2017

श्री प्रियाकांतजू भगवान जी की संध्या आरती के लाइव दर्शन करें

जिनके दर्शन मात्र से हो जाता है सभी दुखों का नाश, मिट जाते है सभी कष्ट, ऐसे हैं भगवान श्री प्रियाकांतजू। अपने नेत्रों से हृदय में उतारें कष्ट हरने वाले श्री प्रियाकांतजू भगवान जी की संध्या आरती के लाइव दर्शन करें, आप सभी भक्त प्रियाकांतजू भगवान के दर्शन फेसबुक के पेज पर देख सकते है। यह आप आज से यानि 9.4.2016 से शाम को 7:30 बजे देख सकते है।