Upcoming Events:

  • 0

    DAYS

  • 19

    HOUR

  • 8

    MINUTES

  • 01

    SECONDS

SHRIMAD BHAGWAT KATHA - USA

News

Blog

क्या है माथे पर तिलक लगाने की निशानी जानिए

24/01/2017 | 11:57 AM
Category : संस्कृति और विज्ञान

955 View | 2 Comments

नकारात्मक ऊर्जा को भगाता है। जब ललाट पर तिलक शुशोभित होता है तो हमारे मन में सकारात्मक्ता का प्रवाह होता है। हमे हर समय खुशी का अनुभव होता है।संकट को दूर करने कि निशानी है। संकट के समय पूजारी लोग तिलक लगाते है।सफलता प्राप्त करने के लिए तिलक देने की परम्परा है। चाहे किसी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करे। घर से रवाना होने से पहले तिलक अवश्य देते हैं।[ads1] तिलक पवित्रता की निशानी है। किसी की बुरी नजर नहीं लगे। इसलिए ही शादी के बाद बहनें तिलक अर्थात बिन्दी लगाती है।बुरी नजर नहीं लगे इस के लिए मातायें छोटे बच्चों को मस्तक पर काला तिलक लगा देती है। ताकि कोई टोक नहीं हो जाये। गाँव में आज भी यह परम्परा प्रचलित है। यहां तक कि मुझ पर भी बालपन पर नजर उतराने के लिए काला टीका लगाया गया था। युद्ध के मैदान में जाते समय बहन अपने भाई को तथा माँ अपने बच्चे को विजयी होने का तिलक देकर घर से रवाना करती है।तीसरे नैत्र की निशानी भी तिलक देते है। भृकुटी के मध्य में आज्ञा चक्र होता है। योगी लोग अपना ध्यान यहाँ पर केद्रित करते है। तिलक देना हिन्दू संस्कृति अर्थात देवी देवता धर्म की मुख्य तथा सर्वोच्च परम्परा है। तिलक लगाना ही हिन्दू धर्म की मुख्य पहचान है।

सनातन धर्म की यह बहुत प्राचीन परम्परा है। सुहाग की निशानी की तिलक देना है सुहागिन मातायें बहनें अपने सुहागिन होने की निशानी भी तिलक देती हैं।आत्म स्मृति की निशानी भी चन्दन का तिलक मन्दिर में देते है। हम आत्मा भाई -भाई है इस की निशानी भी तिलक देते है।अपनी चेतना की जागृति के लिए, मन की एकाग्रता को बढ़ाने के लिए भक्ति मार्ग में तिलक लगाते है। तिलक धारण करने में अनामिका अंगुली मानसिक शांति प्रदान करती है। मध्यमा अंगुली मनुष्य की आयु वृद्धि करती है। अंगूठा प्रभाव, ख्याति और आरोग्य प्रदान करता है, इसलिए विजय तिलक अंगूठे से ही करने की परम्परा है।मस्तिष्क में सेराटोनिन व बीटाएंडोरफिन नामक रसायनों का संतुलन होता है। इनसे मेघाशक्ति बढ़ती है तथा मानसिक थकावट के विकार नहीं होते हैं। मस्तक पर चंदन का तिलक सुगंध के साथ-साथ शीतलता देता है। ईश्वर को चंदन अर्पण करने का भाव यह है कि हमारा जीवन आपकी कृपा रूपी सुगंध से भर जाए एवं हम व्यवहार से शीतल रहें अर्थात् ठंडे दिमाग से कार्य करें। अधिकतर उत्तेजना में कार्य बिगड़ता है और चंदन लगाने से उत्तेजना नियंत्रित होती है। चंदन का तिलक लगाने से दिमाग में शांति, तरावट एवं शीतलता बनी रहती है। हम अपने पुर्व लेख में तिलक का वैज्ञानिक महत्व बता चुके हैं। इस लेख में हम आपके लिए कुछ महत्वपुर्ण तिलक की जानकारियां दे रहे थे। यह लेख सनातान संस्कृति के एक ब्लाग से लिया गया है। इसे साझा करके आप तक पहुँचाना ही हमारा धर्म है।

- By Admin

Leave a Comment:

gaurav naib Aug 16, 2017 at 18:52 PM

dhanywaad prabhu ji

gaurav naib Aug 16, 2017 at 18:52 PM

jai ho

Recent Blog

गुरु पूर्णिमा व्रत के विधान को जानें

गुरु पूर्णिमा का पर्व अध्यात्म, संत-महागुरु और शिक्षकों ....

शिवलिंग पर दूध क्यों चढ़ाया जाता है?

भगवान शिव के शिवलिंग पर दूध चढ़ाने की महिमा का विशेष महत....

कलावा बांधने के वैज्ञानिक रहस्य के बारें में जानें

हिन्दू धर्म में हर धार्मिक कार्यक्रम में कलावा बांधने का विधान होत....

क्या है माथे पर तिलक लगाने की निशानी जानिए

नकारात्मक ऊर्जा को भगाता है। जब ललाट पर तिलक शुशोभित होता है तो हमा....

Mostly Viewed

कलावा बांधने के वैज्ञानिक रहस्य के बारें में जानें

हिन्दू धर्म में हर धार्मिक कार्यक्रम में कलावा बांधने का विधान होत....

क्या है माथे पर तिलक लगाने की निशानी जानिए

नकारात्मक ऊर्जा को भगाता है। जब ललाट पर तिलक शुशोभित होता है तो हमा....

क्यों देते हैं उगते सूर्य को जल जानें।

हिंदू संस्कृति में रोज सुबह सूर्य को जल देने की परंपरा है, लेकिन क्य....

शिवलिंग पर दूध क्यों चढ़ाया जाता है?

भगवान शिव के शिवलिंग पर दूध चढ़ाने की महिमा का विशेष महत....