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Holi Mahotsav & Shrimad Bhagwad Katha (Vrindavan)

SHRI NIMBARKA

Sampradaya

Is one of the most ancient of the vaishnava sampradays; and is based on the dwaitadwait philosophy fisrt propounded
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VSSCT

Vishwa Shanti Seva Charitable Trust

Vishwa Shanti Seva Charitable TrustVishwa Shanti Sewa Charitable Trust is a charitable trust which was established in the holy presence of Shantidoot
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Poojaya Devkinandan

Thakur Ji

Shri Devkinandan Thakur Maharaj Ji is a melodious Sankirtanist, and a Humble humanitarian.
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Priyakant Ju

Bhakt Pariwar

Shri Devkinandan Thakurji Maharaj, under provision of Indian Trust Act on 20th April 2006. The Trust works all over the
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Vishwa Shanti Sewa Charitable Trust

under provision of Indian Trust Act on 20th April 2006. The Trust works all over India and in other countries of the world for various welfare activities. Shri Devkinandan Thakur Maharaj Ji is a melodious Sankirtanist, and a Humble humanitarian. He is awakened Nimbaraki, and, devotee of Shri Radha sarveshwar, Optimistic and spell binder Orator of Bhagwat Katha, and is popularly known as Thakurji by the loved one's.

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आज के दर्शन - 2017-02-20

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सुविचार

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Live News

श्री श्याम शरण देव जी महाराज बने निम्बार्क पीठ के 49वें जगद्गुरु

परम पूज्य निम्बार्कपीठ जगद्गुरु श्री श्यामशरणदेव जी महाराज का जगद्गुरु पदाभिषेक बसंत पंचमी के पावन अवसर पर प्रातः 11.30 बजे किया गया। इसी के साथ वे निम्बार्क पीठ के 49वें जगद्गुरु बन गए है। आज उन्हें श्री "श्रीजी महाराज" की उपाधि भी दी गई। सांय के समय में श्री "श्रीजी महाराज" के पदाभिषेक के अवसर पर बाबा श्री रामदेव जी, परम् पूज्य श्री देवकी नंदन ठाकुर जी महाराज जी, राजस्थान की मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे सिंधिया जी आदि पहुंचे। इसी के साथ सांय में भोजन-प्रसाद के कार्यक्रम साथ यह तीन दिवसीय पूण्य समारोह सम्पन्न हुआ।

महाराज श्री ने श्री प्रियाकांत जू भगवान के भक्तों को दिया उपहार

प्रथम पाटोत्सव के पावन अवसर पर पूज्य महाराज श्री ने अपने भक्तों के लिए मासिक पत्रिका का विमोचन देश की दिव्य आत्माओं, दिव्य संतों के साथ किया। अब सभी भक्त श्री प्रियाकांत मंदिर, पूज्य महाराज श्री एवं विश्व शान्ति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट की सभी जानकारी इस पत्रिका के द्वारा जान पाएंगे। इस पत्रिका में भारतवर्ष की संस्कृति, संस्कार, संतानत धर्म के गूढ़ बातें और महाराज श्री के सन्देश भी पढ़ पाएंगे। यदि आप भी इस पत्रिका के पाठक बनना चाहते है और अपने घर बैठे मंगवाना चाहते हैं तो आप ऑनलाइन भी बुक कर सकते हैं। नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें और पत्रिका को अभी बुक करें। आइये इस पत्रिका से जाने अपनी संस्कृति और संस्कार के बारे में।

पूज्य महाराज श्री ने स्कूल के बच्चों के साथ मनाया गणतंत्र दिवस

पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महारज ने आज गणतंत्र दिवस के अवसर पर श्री जी बाबा सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल, मथुरा में ध्वजारोहण किया। महाराज श्री ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुवात की। पूज्य महाराज श्री ने कहा की प्यारे-प्यारे बच्चों को, देश के होनहारों को, देश के इन छोटे-छोटे गणों को, मासूम से मनो को गणतंत्र दिवस की बहुत-बहुत बधाई। आओ मेरे साथ तीन बार बोलो जय हिन्द.....जय हिन्द........जय हिन्द। आप देश का भविष्य हो, मेरे सामने जितने भी नन्हे-नन्हे हाथ हैं। मैं महसूस कर रहा हूँ कि ये देश का भविष्य बनाने के काम आएंगे, आपकी मासूम आँखों में मैं भारत की सुनहरी तस्वीर देख पा रहा हूँ। हे नन्हे वीरों आने वाले दिनों में आपके कन्धों पर यह ज़िम्मेदारी है की आप देश की प्रगति करें, अपनी संस्कृति को पूरे विश्व में फैलाएं व धर्म की रक्षा करें क्योंकि आपका जन्म ब्रज भूमि पर हुआ है तो आपकी ज़िम्मेदारी और बढ़ जाती है क्योंकि पूरा विश्व ब्रज भूमि से प्रेरणा लेने के लिए आता है। मेरा आपको शुभ आशीर्वाद और एक बार फिर से गणतंत्र दिवस की बहुत-बहुत बधाई।

प्रथम पाटोत्सव पर संत सम्मलेन

श्री प्रियकांत जू भगवान के प्रथम पाटोत्सव पर आशीर्वाद देने पहुचे बृजभूमि के दिव्य संत 5 घंटे से ज्यादा मंच पर मौजूद रहे। उन्होंने श्रद्धालुओं को अपने प्रवचनों से मंत्र मुग्ध करने के साथ-साथ पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज को ढेरों बधाईयाँ और अपना आशीर्वाद भी देते रहे। पाटोत्सव की कुछ यादगार झलकियां अगले कुछ दिनों तक हम आपके साथ साझा करते रहेंगे।

Media

मीरापुर मैं श्रीमद्भागवत कथा के दौरान बोले कथावयास देवकी नंदन ठाकुर जी

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ProgramSchedule

13Feb 2017

Shrimad Bhagwat Katha (Dewas, MP)

From: 2017-02-13 15:00:00 To: 2017-02-19 18:30:00

Venue: Dewas, MP

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Maharaj Shree With VIP

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Hamari Sanskriti Or Vigyan

कलावा बांधने के वैज्ञानिक रहस्य के बारें में जानें

हिन्दू धर्म में हर धार्मिक कार्यक्रम में कलावा बांधने का विधान होता है। हम सभी जानते हैं कि कि हमारे घर में जब भी कोई पूजा होती है तो पंडित सभी के हाथों की कलाई पर लाल रंग का धागा बांधता है जिसे कलावा कहते हैं। कलावा बांधने का एक विधान होता है, इसे युहीं जब मन करे तब नहीं बांधना चाहिए। आज हम आपको इसी के कुछ रहस्य बतायेंगे जो आज विज्ञान ने भी सच साबित किये हैं। अक्सर घरों और मंदिरों में पूजा में पंडित जी हमारी कलाई पर लाल रंग का कलावा या मौली बांधते हैं। हम में से बहुत से लोग बिना इसकी जरुरत को पहचाते हुए इसे हाथों में बंधवा लेते हैं।लेकिन हिंदू धर्म में कोई भी काम बिना वैज्ञानिक दृष्टि से हो कर नहीं गुजरता।मौली का धागा कोई ऐसा वैसा नहीं होता।कलावा को लोग हाथ, गले, बाजूऔ कमर पर बांधते हैं। कलावा बांध ने से आपको भगवान ब्रह्मा, विष्णु व महेश तथा तीनों देवियों- लक्ष्मी, पार्वतीव सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है।[ads1] इससे आप हमेशा बुरी दृष्टि से बचे रह सकते हैं। लेकिन केवल यही नहीं इसे हाथों में बांध ने से स्वास्थ्य में भी बरकत होती है। इस धागेको कलाई पर बांधने से शरीर में वात,पित्त तथा कफके दोष में सामंजस्य बैठता है।माना जाता है कि कलावा बांधने से रक्तचाप, हृदय रोग, मधुमेह और लकवा जैसे गंभीर रोगों से काफी हद तक बचाव होता है। शरीर की संरचना का प्रमुख नियंत्रण हाथ की कलाई में होता है, इसलिये इसे बांधने से व्यक्ति स्वस्थ रहता है। इस बातकी भी सलाह दी जाती है कि कलावा बांधने से रक्तचाप, हृदय रोग,मधुमेह और लकवा जैसे गंभीर रोगों से काफी हद तक बचाव होता हैशास्त्रों के अनुसार पुरुषों एवं अविवाहित कन्याओं को दाएं हाथ में कलावा बांधना चाहिए। विवाहित स्त्रियों के लिए बाएं हाथ में कलावा बांध ने का नियम है। कलावा बंधवाते समय जिस हाथ में कलावा बंधवा रहे हों उसकी मुठ्ठी बंधी होनी चाहिए और दूसरा हाथ सिर पर होना चाहिए। पर्व त्योहार के अलावा किसी अन्य दिन कलावा बांध ने के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन शुभ माना जाता है।

क्या है माथे पर तिलक लगाने की निशानी जानिए

नकारात्मक ऊर्जा को भगाता है। जब ललाट पर तिलक शुशोभित होता है तो हमारे मन में सकारात्मक्ता का प्रवाह होता है। हमे हर समय खुशी का अनुभव होता है।संकट को दूर करने कि निशानी है। संकट के समय पूजारी लोग तिलक लगाते है।सफलता प्राप्त करने के लिए तिलक देने की परम्परा है। चाहे किसी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करे। घर से रवाना होने से पहले तिलक अवश्य देते हैं।[ads1] तिलक पवित्रता की निशानी है। किसी की बुरी नजर नहीं लगे। इसलिए ही शादी के बाद बहनें तिलक अर्थात बिन्दी लगाती है।बुरी नजर नहीं लगे इस के लिए मातायें छोटे बच्चों को मस्तक पर काला तिलक लगा देती है। ताकि कोई टोक नहीं हो जाये। गाँव में आज भी यह परम्परा प्रचलित है। यहां तक कि मुझ पर भी बालपन पर नजर उतराने के लिए काला टीका लगाया गया था। युद्ध के मैदान में जाते समय बहन अपने भाई को तथा माँ अपने बच्चे को विजयी होने का तिलक देकर घर से रवाना करती है।तीसरे नैत्र की निशानी भी तिलक देते है। भृकुटी के मध्य में आज्ञा चक्र होता है। योगी लोग अपना ध्यान यहाँ पर केद्रित करते है। तिलक देना हिन्दू संस्कृति अर्थात देवी देवता धर्म की मुख्य तथा सर्वोच्च परम्परा है। तिलक लगाना ही हिन्दू धर्म की मुख्य पहचान है। सनातन धर्म की यह बहुत प्राचीन परम्परा है। सुहाग की निशानी की तिलक देना है सुहागिन मातायें बहनें अपने सुहागिन होने की निशानी भी तिलक देती हैं।आत्म स्मृति की निशानी भी चन्दन का तिलक मन्दिर में देते है। हम आत्मा भाई -भाई है इस की निशानी भी तिलक देते है।अपनी चेतना की जागृति के लिए, मन की एकाग्रता को बढ़ाने के लिए भक्ति मार्ग में तिलक लगाते है। तिलक धारण करने में अनामिका अंगुली मानसिक शांति प्रदान करती है। मध्यमा अंगुली मनुष्य की आयु वृद्धि करती है। अंगूठा प्रभाव, ख्याति और आरोग्य प्रदान करता है, इसलिए विजय तिलक अंगूठे से ही करने की परम्परा है।मस्तिष्क में सेराटोनिन व बीटाएंडोरफिन नामक रसायनों का संतुलन होता है। इनसे मेघाशक्ति बढ़ती है तथा मानसिक थकावट के विकार नहीं होते हैं। मस्तक पर चंदन का तिलक सुगंध के साथ-साथ शीतलता देता है। ईश्वर को चंदन अर्पण करने का भाव यह है कि हमारा जीवन आपकी कृपा रूपी सुगंध से भर जाए एवं हम व्यवहार से शीतल रहें अर्थात् ठंडे दिमाग से कार्य करें। अधिकतर उत्तेजना में कार्य बिगड़ता है और चंदन लगाने से उत्तेजना नियंत्रित होती है। चंदन का तिलक लगाने से दिमाग में शांति, तरावट एवं शीतलता बनी रहती है। हम अपने पुर्व लेख में तिलक का वैज्ञानिक महत्व बता चुके हैं। इस लेख में हम आपके लिए कुछ महत्वपुर्ण तिलक की जानकारियां दे रहे थे। यह लेख सनातान संस्कृति के एक ब्लाग से लिया गया है। इसे साझा करके आप तक पहुँचाना ही हमारा धर्म है।

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