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SHRI KRISHAN JANMASHTAMI MAHOTSAV - VRINDAVAN

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SHRI NIMBARKA

Sampradaya

Is one of the most ancient of the vaishnava sampradays; and is based on the dwaitadwait philosophy fisrt propounded
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VSSCT

Vishwa Shanti Seva Charitable Trust

Vishwa Shanti Seva Charitable TrustVishwa Shanti Sewa Charitable Trust is a charitable trust which was established in the holy presence of Shantidoot
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Poojaya Devkinandan

Thakur Ji

Shri Devkinandan Thakur Maharaj Ji is a melodious Sankirtanist, and a Humble humanitarian.
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AASHRYA

Seva Dham

Shri Devkinandan Thakurji Maharaj, under provision of Indian Trust Act on 20th April 2006. The Trust works all over
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Vishwa Shanti Sewa Charitable Trust

This a charitable trust which was established in the holy presence of Shantidoot Shradhey Shri Devkinandan Thakurji Maharaj, under provision of Indian Trust Act on 20th April 2006. The Trust works all over India and in other countries of the world for various welfare activities. Shri Devkinandan Thakur Maharaj Ji is a melodious Sankirtanist, and a Humble humanitarian. He is awakened Nimbaraki, and, devotee of Shri Radha sarveshwar, Optimistic and spell binder Orator of Bhagwat Katha, and is popularly known as Thakurji by the loved one's.

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आज के दर्शन - 2017-07-27

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सुविचार

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Live News

"धर्म आत्मा का श्रंगार होता है। हमें सदा ही सत्य और सच्चे धर्म का पालन करना चाहिए।"

परम श्रध्देय श्री देवकी नन्दन ठाकुर जी महाराज की जयपुर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा में सभी भक्तों को सप्तम दिवस भागवत कथा में भगवान श्री कृष्ण के विवाह का सुन्दर वर्णन श्रोताओं के श्रवण कराया। महाराज श्री ने कहा कि अगर इंसान को किसी भी प्रकार का कष्ट होता है तो भगवान की भक्ति से सभी प्रकार के कष्टों को भक्त दूर कर सकता है। वह इस भक्ति से कठिन से कठिन विपदा को भी दूर कर लेता है। इसलिए हमें सदा ही भगवान की भक्ति सच्चे मन से करनी चाहिए। जिस व्यक्ति भगवान के प्रति सच्चे मन से होती है वह हर विपदा को पार कर लेता है। महाराज श्री ने बताया कि कैसे हम भगवान की भक्ति से अपने सभी कष्टों को दूर कर सकते है। यहाँ महाराज श्री ने भजन श्रवण कराया। इस भजन को सुन कर वहां पर मौजूद सभी भक्तगण झूम उठे। यह भजन था "मेरी बिगड़ी तू बना दे दुनिया बनाने वाले " महाराज श्री ने बताया कि हर भक्त के मन में सदा भगवान के सच्ची भावना होनी चाहिए। जिससे की उस भक्त का आने वाला जीवन सदा अच्छा रहे। यहाँ पर महाराज श्री ने अपने भक्तों को कल्चरल टेरेरिज्म के बारे में भी बताया। हमें सदा ही सच्ची और अच्छी शिक्षा लेनी चाहिए। हमें सदा ही अपने चरित्र को अच्छा बनाना चाहिए। अपने बच्चो को अच्छे स्कूलों में कॉलेजों में भेजना चाहिए। महाराज श्री ने कहा कि जन्माष्टमी पर होने वाले अवसर पर हम लोगों को भारत की सभ्यता से अवगत कराएँगे और लोगों को गुरुकुल में ही ज्यादा से ज्यादा शिक्षा लेनी चाहिए। क्योंकि गुरुकुल की शिक्षा आजकल के स्कूलों की शिक्षा से ज्यादा अच्छी होती है। यहाँ महाराज श्री ने GST के बारे में भी लोगों को बताया। उन्होंने हमें बताया की पूजा के सामान पर किसी भी तरह का टैक्स नहीं होना चाहिए। यहाँ पर देवी देवताओं की मूर्तियों पर किसी भी प्रकार का टैक्स नहीं होना चाहिए।

"सत्य क्या है? माया से दूर रहना, भगवान के चरणों की सेवा करना ही सत्य है।"

परम श्रध्देय श्री देवकी नन्दन ठाकुर जी महाराज की जयपुर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा में सभी भक्तों को षष्टम दिवस भागवत कथा में भगवान श्री कृष्ण की गोपियों संग लीलाओं का सुन्दर वर्णन श्रोताओं के श्रवण कराया। आज महाराज श्री ने "हो मनरो लागे ना सखी, म्हारो घनश्याम के बिना" भजन से कथा प्रारम्भ की। इसके बाद पूज्य महाराज श्री ने कहा की मोदी जी देश में जीएसटी ले आये हैं उन्हें एक और जीएसटी लाना चाहिए। "गौ सेवा तुरंत" शुरू की जाए। हमारे देश में जितने भी विधायक, सांसद, वकील, जज आदि सबको गाय घर में पालनी चाहिए। महाराज श्री ने कहा की यदि आप 7 दिन तक भागवत कथा मन से श्रवण करते हैं तो आपको माया से विरक्ति और कान्हा में आसक्ति हो जायेगी। कथा का काम है आपको भगवान के चरणों की सेवा में लगा दे ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सत्य का बोध हो जाता है। सत्य क्या है? सत्य है माया से दूर रहना, भगवान के चरणों की सेवा करना यही सत्य है। इस कलयुग में हम कभी भी माया से दूर नहीं जा सकते हैं लेकिन माया को प्रयोग तो करो लेकिन मन में माया ना रखो। गोविन्द को पाना है तो माया को छोड़ना पड़ेगा। इस आत्मा पर, मन पर माया को हावी मत होने दो। महाराज श्री ने कहा श्री कृष्ण ने ब्रजवासियों से कहा की इन्द्र देव की पूजा ना करें और गिरिराज पर्वत की पूजा करें। इस पर देवराज इंद्र क्रोधित हो गए और उन्होंने लगातार कई दिन तक ब्रज में वर्षा की जिससे ब्रज में बाढ़ आ गई। ब्रजवासियों को बचाने के लिए श्री कृष्ण भगवान ने अपनी कनिष्क ऊँगली पर गिरिराज पर्वत को उठा लिया जिसकी शरण में सभी ब्रजवासी आ गए। बहुत वर्षा करने के बाद भी ब्रजवासी सुरक्षित रहे क्योंकि वे सब भगवान श्री कृष्ण द्वारा उठाये गए पर्वत गिरिराज की शरण में थे।

"भगवान प्रेम के बिना नहीं मिलते है। प्रेम से मनुष्य अपने भगवान के दर्शन आसानी से प्राप्त कर लेता है।"

परम श्रध्देय श्री देवकी नन्दन ठाकुर जी महाराज की जयपुर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा में सभी भक्तों को पंचम दिवस भागवत कथा में भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का सुन्दर वर्णन श्रोताओं के श्रवण कराया। महाराज श्री ने कथा प्रारम्भ करते हुए कहा की मनुष्य को सदा ही सत्य का मार्ग अपनाना चाहिए। इस मार्ग पर चल कर ही हम सब अपना जीवन सदा के लिए सफल बना सकते हैं। सत्य पर चल कर हम अपने जीवन की सभी कठिनाइयों को दूर कर सकते है। सत्यवान पुरुष सदा ही अपने जीवन से सबका चहिता बन जाता है। सब उसको प्यार करने लगते है। महाराज श्री ने बताया कि हम कैसे भगवान की भक्ति करके अपने जीवन का उद्धार कर सकते है। हमें सदा ही भगवान की भक्ति में लीन रहना चाहिए। अपने इष्टदेव की सदा ही भक्ति करते रहना चाहिए। ताकि आगे आने वाले समय में हमें किसी भी तरह की समस्या न आये। उसके लिए हमें सदा तैयार रहना चाहिए। हमें अपने जीवन को गोविन्द के चरणों में समर्पित कर देना चाहिए। फिर तो हमारे जीवन के सभी कष्टों को हमारे इष्टदेव गोविन्द जी पल भर में ही दूर कर देंगे और हमें सदा ही अपने जीवन में सत्य और अच्छाई का रास्ता अपनाना चाहिए। ताकि आने वाले समय में हमें किसी भी तरह की कोई परेशानी न आये।

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मीरापुर मैं श्रीमद्भागवत कथा के दौरान बोले कथावयास देवकी नंदन ठाकुर जी

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22Feb 2018

SHRIMAD BHAGWAT KATHA - VRINDAVAN

From: 2018-02-22 14:30:00 To: 2018-03-01 18:00:00

Venue: SHRIMAD BHAGWAT KATHA SHANTI SEWA DHAM, VRINDAVAN

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